अयोध्या: राम मंदिर आंदोलन से क्या है योगी आदित्यनाथ के मठ का कनेक्शन?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  (File Photo )
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (File Photo )

दिग्विजय नाथ से आदित्यनाथ तक... गोरक्षनाथ मठ की तीन पीढ़ियां मंदिर आंदोलन से जुड़ी हुई हैं. पढ़िए पूरी कहानी...

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2018, 4:41 PM IST
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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जिस गोरखनाथ मठ के महंत हैं. उसी से अयोध्या  के राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत हुई थी. जानकार बता रहे हैं कि गोरखनाथ मठ की तीन पीढ़ियां मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही हैं. योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ और अवैद्यनाथ के गुरु महंत दिग्विजय नाथ का इस आंदोलन में खास योगदान रहा है. दिग्विजय नाथ के निधन के बाद उनके शिष्य ने आंदोलन को आगे बढ़ाया. वे श्रीराम जन्‍म भूमि मुक्‍ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्‍यक्ष रहे.

आदित्यनाथ भी इस आंदोलन को मुखरता प्रदान करते रहे हैं.  वो कहते रहे हैं कि राम मंदिर चुनावी मुद्दा नहीं...मेरे लिए जीवन का मिशन है’.सीएम की कुर्सी पर बैठने के बाद मंदिर मामले पर योगी के बयान जो भी हों लेकिन वे अपने गुरु  की तरह ही विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाए जाने के धुर समर्थक रहे हैं.

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लंबे समय से गोरखनाथ मंदिर की गतिविधियों पर रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार टीपी शाही कहते हैं,  'योगी आदित्यनाथ के गुरु गोरक्षनाथ पीठ के महंत रहे अवैद्यनाथ मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरा थे. वो 'श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति' के अध्यक्ष थे. महंत अवैद्यनाथ के दिगंबर अखाड़े के महंत रामचंद्र परमहंस के साथ बेहद अच्छे संबंध थे. रामचंद्र परमहंस राम जन्मभूमि न्यास के पहले अध्यक्ष भी थे, जिसे मंदिर निर्माण के लिए गठित किया गया था.'
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“माना जाता है कि छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाने का प्लान उनकी देखरेख में तैयार किया गया था. मंदिर के लिए विश्व हिंदू परिषद ने इलाहाबाद में जिस धर्म संसद (साल 1989 में) का आयोजन किया, उसमें अवैद्यनाथ के भाषण ने ही इस आंदोलन का आधार तैयार किया. धर्मसंसद के तीन साल बाद दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहा दिया गया."

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शाही के मुताबिक, 'अवैद्यनाथ से पहले गोरक्षनाथ मठ के महंत दिग्विजय नाथ उन चंद शख्सियतों में थे जिन्होंने शुरुआती तौर पर बाबरी मस्जिद को मंदिर में बदलने करने की कल्पना की थी. उन्हीं की अगुवाई में 22 दिसंबर 1949 को विवादित ढांचे के भीतर चोरी-छिपे भगवान राम की प्रतिमा रखवाई गई थी. उस समय हिंदू महासभा के विनायक दामोदर सावरकर के साथ दिग्विजय नाथ ही थे, जिनके हाथ में इस आंदोलन की कमान थी. हिंदू महासभा के सदस्यों ने तब अयोध्या में इस काम को अंजाम दिया था. ये दोनों लोग अखिल भारतीय रामायण महासभा के सदस्य थे.'

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योगी आदित्यनाथ भी मंदिर आंदोलन की तरह काफी मुखर रहे हैं. लेकिन सीएम बनने के बाद मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने कहा है कि वो संवैधानिक मर्यादाओं में रहकर के जनभावनाओं का आदर करने के पक्ष में हैं. हालांकि वो ये भी कह रहे हैं कि ‘जो कांग्रेस राम की नहीं, वह हमारे किसी काम की नहीं.’

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