12वीं के बच्चों को टीका: केंद्र ने दिल्ली HC में हलफनामा देकर कहा- अभी नहीं लगा सकते वैक्सीन

12वीं के बच्चों को टीका लगाने के मामले में केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट से कहा है कि बच्चों की वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं.. (सांकेतिक तस्वीर)

12वीं के बच्चों को टीका लगाने के मामले में केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट से कहा है कि बच्चों की वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं.. (सांकेतिक तस्वीर)

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि भारत बायोटेक को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने 12 मई को स्वस्थ्य बच्चों के परीक्षण की इजाजत दी है.

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नई दिल्ली. देश में 12वीं क्लास के बच्चों को टीका (Vaccine to 12th class children) लगाने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) पहुंच गया है. इस मामले पर शुक्रवार को केंद्र सरकार (Central Government) ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि भारत बायोटेक (Bharat biotech) को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने 12 मई को स्वस्थ्य बच्चों के परीक्षण की इजाजत दी है. केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में यह कहा कि बच्चों को अभी वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती.

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि जब तक बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल पूरे नहीं हो जाते तब तक उन्हें वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती. केंद्र सरकार ने कहा कि वैक्सीन कंपनियों के पास अभी आपातकालीन परिस्थितियों में ही वैक्सीन लगाने की इजाजत है लेकिन जब तक बच्चों पर क्लीनिकल ट्रायल पूरे नहीं हो जाते तबतक बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती है.

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में एक छात्रा ने याचिका दाखिल कर कहा था कि 12वीं क्लास में पढ़ने वाले बच्चों को वैक्सीन लगाई जाए. क्योंकि उनको कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल होना होता है. हाईकोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केन्द्र सरकार से जवाब मांगा था.

कोरोना काल के दौरान अनाथ हुए बच्चों को लिए दिल्ली हाईकोर्ट गुरुवार को अहम निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने ऐसे बच्चों को लिए 24 घंटे शेल्टर होम खोलने का आदेश दिया था. इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार ने कहा कि शेल्टर होम्स में ही बच्चों के लिए भोजन और स्नान की व्यवस्था हो. साथ ही कोरोना से बचाव की भी व्यवस्था होनी चाहिए. कोर्ट ने पूछा, दिल्ली में बच्चों के 9 शेल्टर होम्स हैं. इनमें काफी कम संख्या में बच्चे रहते हैं, यह क्यों है? जबकि सड़क पर इतने बच्चे हैं. बचपन बचाओ आंदोलन की वकील ने कहा कि अब कोई और समय बर्बाद नहीं किया जा सकता है. बच्चों ने माता-पिता को खो दिया है. कहीं ये बच्चे बचपन ना खो दें.

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