एजुकेशन सिस्टम पर सवाल खड़ा करता नीतीश राजपूत का वीडियो वायरल, कहा- हर बच्चे की तुलना दूसरे से करना है गलत

कोविड काल में तेजी से बच्चों के पास फोन और इंटरनेट आए हैं. ऐसे में वे पढ़ने के अलावा फोन का इस्तेमाल दूसरी चीजों के लिए भी कर रहे हैं.

कोविड काल में तेजी से बच्चों के पास फोन और इंटरनेट आए हैं. ऐसे में वे पढ़ने के अलावा फोन का इस्तेमाल दूसरी चीजों के लिए भी कर रहे हैं.

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    परीक्षाओं के महौल में इन दिनों सोशल मीडिया पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े वीडियो भी वायरल हो रहे हैं. कई लोगों के पढ़ाने का तरीका बहुत अच्छा लगता है तो कुछ लोगों के जरूरी सवालों को भी सोशल मीडिया यूजर तरजीह दे रहे हैं. दरअसल, कोविड काल में तेजी से बच्चों के पास फोन और इंटरनेट आए हैं. ऐसे में वे पढ़ने के अलावा फोन का इस्तेमाल दूसरी चीजों के लिए भी कर रहे हैं. वहां अगर उनसे जुड़े वीडियो आते हैं तो छात्र ना केवल उसपर अपनी राय देते हैं, बल्कि अपने दोस्तों में शेयर भी करते हैं.

    ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों आया हुआ जिसमें मौजूदा एजुकेशन सिस्टम को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं. डिजिटल सोशल एक्टिविस्ट और एनालिस्ट के तौर पहचाने जाने वाले नीतीश राजपूत के इस वीडियो में कहा गया है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ब्रिटिश शासन की पूंजीवादी जरूरतों का बीज है, फिर भी अभी तक बिना किसी बड़े बदलाव के जारी है और तब से वही सिस्टम चला आ रहा है.

    इस वीडियो में उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों में मौजूदा शिक्षा व्यवस्‍था स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान न देकर सिर्फ परीक्षाओं और अंकों को बच्चे का लक्ष्य बनाती है और इसी लक्ष्य की पूर्ति को सफलता का प्रमाण बताती है.  साथ ही अंग्रेज़ी बोलने के अहम विवाद के बारे वे कहते हैं कि अंग्रेज़ी हमारी मुख्य भाषा नहीं है, तब भी इसे एक व्यक्ति के स्तर से जोड़ा जाता है. ऐसे में अगर कोई अंग्रेज़ी नहीं बोल पाता तो उसे लोगों की कड़ी निंदा को झेलना पड़ता है. इससे बच्चों में न केवल खुद के प्रति अविश्वास पैदा होता है बल्कि कई बार उनके रिजल्ट पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है.

    हाथी, सांप और बंदर की पेड़ चढ़ने की परीक्षा रखने का उदाहरण रखते हुए वे काबीलियत को साबित करने के तरीके पर सवाल खड़ा करते हैं. कहते हैं कि निश्चित तौर पर बंदर तेजी से ऊपर चढ़ेगा जबकि अगर उसकी तुलना किसी और कर देंगे तो वो ठीक नहीं होगा. बच्चों को लेकर भी ऐसा होता है. अगर किसी और विधा में माहिर बच्चे को आप अंक हासिल करने को कहेंगे तो हो सकता है वो इतना सफल न हो जबकि दूसरे काम को वो बेहतर करे.

    उनका कहना है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में रचनात्मता और स्किल्स को कोई बढ़ावा नहीं मिलता जब की विज्ञान की दुनिया में रोज़ नए आविष्कार हो रहे हैं और टेक्नोलॉजी की दुनिया में डेवलपमेंट आ रहा है. इसलिए इसकी बहुत संभावना है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था द्वारा पढ़ाई हुई जानकारी शायद कहीं काम ही न आए.

    नई दिल्ली निवासी नीतीश राजपूत अपनी IT फर्म के बिजनेस हेड हैं, सोशल मीडिया सनसनी हैं और अपने विचारों से निरंतर लोगो का ध्यान आकर्षित करते रहते है. हाल ही में उन्हें टिकटॉक बनाम यूट्यूब विवाद पर अपनी राय साझा करने के लिए 93.5 रेड एफएम पर गेस्ट पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया था.