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  • दिल्ली पुलिस का दावा, हिंसक अपराधों में आई कमी, आर्म्स एक्ट के तहत 5 हजार से ज्‍यादा गिरफ्तार, गैंगस्‍टर भी ढेर

दिल्ली पुलिस का दावा, हिंसक अपराधों में आई कमी, आर्म्स एक्ट के तहत 5 हजार से ज्‍यादा गिरफ्तार, गैंगस्‍टर भी ढेर

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में कई गैंगस्‍टर भी ढेर हुए हैं.

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में कई गैंगस्‍टर भी ढेर हुए हैं.

Delhi News: दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) ने कोरोना वायरस की महामारी के कारण लगे लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से हिंसक अपराधों में 15 फीसदी की कमी का दावा किया है. इसके अलावा पुलिस ने कहा है कि पिछले साल आर्म्स एक्ट के तहत 5,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अधिकांश आरोपी 25 वर्ष से कम आयु के हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस की महामारी के दौरान पिछले साल लगे लॉकडाउन (Lockdown) के कारण राजधानी दिल्ली में हिंसक अपराधों में कमी आई है, तो आर्म्स एक्ट 1959 के तहत पुलिस ने पिछले साल 5,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. वहीं, दिल्ली पुलिस का दावा है कि उन्होंने कई अंतरराज्यीय गिरोहों की ‘महत्वपूर्ण’ गिरफ्तारियां और जब्ती की है. इसकी वजह से हिंसक गतिविधियों पर विराम लगा है. पुलिस ने कहा कि 2019 की तुलना में दिल्ली में हिंसक अपराधों में 15 फीसदी की गिरावट आई है.

    इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, पुलिस ने बीते शनिवार को कहा कि उन्होंने कई खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार किया है और अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्यों को पकड़ा है जो अपराधियों और यहां तक कि किशोरों को हथियार और बारूद की आपूर्ति करते हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 2020 में 3,736 से अधिक हथियार और 4,726 गोला-बारूद जब्त किए.

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हम इन हथियारों की कीमत का ठीक से अनुमान नहीं लगा सकते, क्योंकि कई अवैध हैं और मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों से खरीदे जाते हैं. आशंका जताई जा रही है कि इन हथियारों की कीमत पांच करोड़ रुपये से अधिक है.’

    जानें क्‍या कहते हैं आंकड़े
    आंकड़े बताते हैं कि आर्म्स एक्ट 1959 के तहत पुलिस ने पिछले साल 5,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अधिकांश आरोपी 25 वर्ष से कम आयु के हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. अधिकारी ने कहा, ‘इनमें से कई गिरोह जेल के अंदर या विदेशी स्थानों से संचालित होते हैं. ये गैंगस्टर किशोरों और युवकों से संपर्क करते हैं और उन्हें हथियार की आपूर्ति करने या गिरोह के अन्य कार्यों में मदद करने के लिए कहते हैं. हम इन गिरोहों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहे हैं और हमने महत्वपूर्ण सदस्यों को गिरफ्तार भी किया है. उनमें से ज्यादातर सोशल मीडिया के माध्यम से किशोरों को निशाना बनाते हैं और उन्हें पिस्तौल और पैसे का लालच देते हैं.’

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    कई गैंगस्टर हुए ढेर, तो कई हुए गिरफ्तार
    पुलिस का दावा है कि कई अंतरराज्यीय गिरोह हत्या और जबरन वसूली में शामिल थे. वहीं मार्च में गैंगस्टर कुलदीप फज्जा एक पुलिस मुठभेड़ में उस वक्त मारा गया था जब वह कथित तौर पर अपने सहयोगियों के साथ जीटीबी अस्पताल से भाग गया था. वह छत्रसाल स्टेडियम विवाद और हत्या में शामिल था, जिसमें दो बार के ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार को गिरफ्तार किया गया था. जुलाई में स्पेशल सेल ने गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी और उसकी सहयोगी अनुराधा चौधरी को गिरफ्तार किया था. जठेड़ी हत्या, जबरन वसूली और अपहरण के 40 से अधिक मामलों में शामिल है.

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    पुलिस के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में महामारी के दौरान साइबर अपराध, धोखाधड़ी और जालसाजी के मामलों में 55 फीसदी की वृद्धि हुई है. पुलिस ने कहा कि कई “छोटे समूह” और व्यक्ति दिल्ली-एनसीआर में कारखानों से नकली नोटों का व्यापार कर रहे थे. दिल्ली पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि हमारे पास ऐसे उदाहरण हैं जहां जिला पुलिस टीमों, विशेष प्रकोष्ठ और अपराध शाखा को पीड़ितों के प्राथमिकी दर्ज नहीं करा पाने के कारण स्वत: संज्ञान से मामले दर्ज करने पड़े. यह लॉकडाउन के कारण था और इसलिए भी कि गिरोह अलग-अलग राज्यों में काम करते हैं और पुलिस क्षेत्राधिकार के मुद्दों पर चलती है.

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