दिल्ली: कोरोना से मृत लोगों के अंतिम संस्कार के लिए VHP की अनूठी पहल

विहिप ने अंतिम संस्खार के लिए इस तरह के लोहे के स्टैंड बनवाए हैं.

विहिप ने अंतिम संस्खार के लिए इस तरह के लोहे के स्टैंड बनवाए हैं.

विहिप ने दिल्ली के पंचकुइंया रोड स्थित श्मशान स्थल पर लकड़ियों की जगह गाय के गोबर से बनी लकड़ियों जैसे उपले रखवाए हैं. शव को रखने के लिए लोहे के स्टैंड बनाए गए हैं. इसी पर अंतिम संस्कार किया जा रहा

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी (corona epidemic) के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है, जिसके कारण श्मशानों (Crematorium) में लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं. बड़ी संख्या में हो रही मौतों के कारण कई श्मशान घाटों में लकड़ी की कमी होने लगी. ऐसे में विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) ने दिल्ली में अंतिम संस्कार (funeral) के लिए एक अनूठी पहल की है. इसकी शुरुआत विहिप ने दिल्ली के पंचकुइंया रोड (Panchkuiya Road) स्थित श्मशान स्थल पर लकड़ियों की जगह गाय के गोबर से बनी लकड़ियों जैसे उपले रखवाए हैं. शव को रखने के लिए लोहे के स्टैंड बनाए गए हैं.

पर्यावरण की भी रक्षा होगी

विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे का दावा है कि लकड़ी की जगह अंतिम संस्कार में गोबर के उपले प्रयोग करने से लकड़ी की कमी भी नहीं होगी और पर्यावरण की भी सुरक्षा हो जाएगी. मिलिंद परांडे के अनुसार गाय के गोबर से उपले बनाने और शव के अंतिम संस्कार के लिए लोहे का स्टैंड बनाने की मशीन पाक से आए शरणार्थियों को विहिप द्वारा प्रदान की गई हैं. जिससे वे इनका निर्माण कर सकें. इससे लकड़ी कम कटेगी, जंगल बचेंगे और पर्यावरण का नुकसान कम होगा. साथ ही इन शरणार्थियों की आजीविका भी चलेगी. परांडे के मुताबिक शव रखने वाले लोहे के स्टैंड को इस तरह से बनाया गया है कि अंतिम संस्कार में प्रयुक्त होने वाली सामग्री का कम से कम इस्तेमाल हो और अंतिम संस्कार भी पर्यावरण अनुकूल हो.

तरीका कारगर हुआ तो दूसरे श्मशानों में भी होगा इस्तेमाल
विहिप की योजना है कि यदि यह प्रयोग यहां सफल होता है तो जल्दी ही आने वाले कुछ ही दिनों में दिल्ली के सभी श्मशान घाटों पर इस तरह के स्टैंड और गाय के गोबर से बने उपलों की व्यवस्था कर दी जाएगी. जल्दी ही दिल्ली के दूसरे श्मशानों में इनका प्रयोग किया जाएगा.

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