लाइव टीवी

अंधे हो तो प्रोटेस्‍ट करने क्‍यों आए? जानें JNU के दृष्टि बाधित छात्र और पुलिस के बीच झड़प की कहानी

News18Hindi
Updated: November 20, 2019, 11:25 AM IST
अंधे हो तो प्रोटेस्‍ट करने क्‍यों आए? जानें JNU के दृष्टि बाधित छात्र और पुलिस के बीच झड़प की कहानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जेएनयू के अन्य छात्रों के साथ शशि भूषण पांडे. (फाइल फोटो)

JNU के छात्र शशि भूषण ने बताया कि मानव श्रृंखला (Human Chain) से अलग ले जाकर पुलिसकर्मियों (Policeman) ने लाठियों से उनकी पिटाई की और वहीं छोड़ कर चले गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 20, 2019, 11:25 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में फीस वृद्ध‌ि (Fee Hike) के विरोध में सोमवार को संसद मार्च पर निकले छात्रों में शशि भूषण पांडे भी शामिल थे. वह मानव श्रृंखला (Human Chain) का हिस्सा भी बने. आरोप है कि इसी दौरान उन्‍हें पुलिस (Police) ने पकड़ लिया और अलग ले जाकर लाठियों से इतना पीटा की उन्‍हें एम्स (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराना पड़ा. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शशि ने पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाते हुए बताया, 'मुझे मानव श्रृंखला से कुछ पुलिसकर्मियों ने अलग किया और एक तरफ ले गए. मैंने उन्हें बताया भी कि मैं दृष्टि बाधित (Visually Impaired) हूं और मुझे न मारें, लेकिन उनमें से एक ने मुझे सामने से मारा. जब मैंने वहां से भागने की कोशिश की तो मेरे पैरों पर लाठियां मारी गईं. जिस युवक ने मेरी मदद की और मुझे अस्पताल तक लाया उसे भी पीटा गया.' जेएनयू के दिव्‍यांग छात्रों ने बुधवार को इस घटना के विरोध में दिल्‍ली पुलिस मुख्‍यालय के बाहर प्रदर्शन करने की बात कही है.

'अंधा है तो प्रदर्शन में क्यों आया?'
शशि ने कहा, 'जब मैंने पुलिसकर्मियों को जानकारी दी कि मैं देख नहीं सकता तो उनमें से एक ने कहा कि अंधा है तो प्रोटेस्ट करने क्यों आता है?' शशि के अनुसार, डॉक्‍टरों ने उनकी जांच करने के बाद कहा कि उनकी हड्डियां मजबूत हैं और इसके चलते उन्‍हें गंभीर चोट नहीं लगी है. शशि ने कहा, 'देश भर की यूनिवर्सिटीज अब जेएनयू के साथ इस लड़ाई में खड़ी हैं. हम शिक्षा का निजीकरण नहीं होने देंगे. शशि ने कहा कि जेएनयू में पढ़ने वाले छात्र दिल्ली के नहीं हैं. वे यूपी, बिहार, झारखंड और देश के अन्य इलाकों से यहां आते हैं. क्या आप यह कहना चाहते हैं कि यह जगह देशद्रोही बनना सिखाती है?'

'प्रदर्शन भी कर रहे हैं और पढ़ भी रहे हैं'

इतिहास विभाग में स्नात्कोत्तर की पढ़ाई कर रहे पांडे ने कहा कि हम प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी क्लास में भी जा रहे हैं. हम अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे और हमारा नारा है- सबको शिक्षा दे न सके जो वो सरकार निकम्मी है, जो सरकार निक्कमी है वो सरकार बदलनी है.

दिल्ली पुलिस की निंदा
JNU के विजुअली चैलेंज्ड स्टूडेंट्स फोरम ने भी छात्रों के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट को लेकर दिल्ली पुलिस की निंदा की है. साथ ही फोरम के सदस्यों ने इस बात पर दुख जताया है कि किस तरह से पुलिसकर्मियों ने शशि की छाती और पेट पर लात मारी और उसके बाद उसे सड़क पर छोड़ दिया. उनको किसी भी पुलिसकर्मी ने अस्पताल पहुंचाने के बारे में भी नहीं सोचा.
Loading...

पुलिस बोली- बल प्रयोग नहीं किया गया
इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली पुलिस के डीसीपी (सेंट्रल) मंदीप सिंह रंधावा ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने ‌किसी भी प्रकार का बल प्रयोग नहीं किया है. उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज की गई होगी तो वे इस मामले को जरूर देखेंगे.

ये भी पढ़ेंः JNU फीस विवाद: छात्रसंघ अध्यक्ष ने की मांग, छात्रों के खिलाफ न हो कोई कार्रवाई

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 20, 2019, 9:35 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...