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क्‍या CNG की लो फ्लोर बस खरीद में हुआ कोई घोटाला या केजरीवाल सरकार ने बचाए करोड़ों रुपये? जानें पूरा सच

क्‍या CNG की लो फ्लोर बस खरीद में हुआ कोई घोटाला या केजरीवाल सरकार ने बचाए करोड़ों रुपये? जानें पूरा सच


द‍िल्‍ली व‍िधानसभा में बजट सत्र के दौरान बीजेपी व‍िधायक ने बसों की खरीद के कथित घोटाले के मामले को उठाया.

द‍िल्‍ली व‍िधानसभा में बजट सत्र के दौरान बीजेपी व‍िधायक ने बसों की खरीद के कथित घोटाले के मामले को उठाया.

Delhi News: विजेंद्र गुप्ता के आरोप पर परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का सदन में जवाब देते हुए कहा क‍ि पिछले 3-4 दिन से ऐसा एक माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है जैसे बहुत बड़ा घोटाला हुआ है.

द‍िल्‍ली व‍िधानसभा में बजट सत्र के दौरान बीजेपी व‍िधायक ने बसों की खरीद के कथित घोटाले के मामले को उठाया. उन्‍होंने कहा क‍ि पिछले 3 दिन से लगातार विपक्ष दिल्ली सरकार द्वारा 1000 सीएनजी लो फ्लोर बसों की खरीद में हुई अनियमितता की तरफ सदन का ध्यान दिलाना चाह रहा था. पिछले काफी समय से कोई बस नहीं खरीदी गई और जब 1000 बसें खरीदी गई तो उसमें भारी घोटाला है. उन्‍होंने कहा क‍ि 875 करोड़ रुपये की कीमत से बसें खरीदी गई. इसमें 3 साल की वारंटी है और 3 साल तक बस कम्पनी के साथ 2 लाख 10 हज़ार किलोमीटर तक वारंटी है. जब बस का टेंडर किया गया तो एनुअल मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट को टेंडर के साथ नहीं जोड़ा गया था. 3-4 महीने के बाद एक और टेंडर निकाला गया जि‍समें 3500 करोड़ रुपये का कंपनी के साथ एएमसी (एनुअल मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट) के लिए करार किया जाता है.

विजेंद्र गुप्ता के आरोप पर परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का सदन में जवाब देते हुए कहा क‍ि पिछले 3-4 दिन से ऐसा एक माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है जैसे बहुत बड़ा घोटाला हुआ है. विजेंद्र गुप्ता की ये हॉबी है कि जब भी बसों की खरीद की बात होती है तब एसीबी में कम्प्लेन डालेंगे फिर सब जांच एजेंसियों को भेजेंगे, लेकिन ये कुछ भी कर लें. जब तक अरविंद केजरीवाल की सरकार है हम बसें खरीदेंगे. आपको जो करना है कर लो. हमारा नारा था हम राजनीति करने नहीं राजनीति को बदलने आए हैं. विजेंद्र गुप्ता के लिए मंत्री ने कहा क‍ि काला अक्षर भैंस बराबर इनकी हालत ये है. ये नहीं पता कि लिखा क्या है बस कह दिया की घोटाला हो गया. जहां गंभीर चर्चा होती है वहां टुच्ची राजनीति करने बैठे हैं. उन्‍होंने कहा क‍ि मैं बताऊंगा की कैसे 225 करोड़ रुपए बचाए.

मंत्री ने बताया कैसे बचाए करोड़ों रुपये
11 जुलाई 2019 में कैबिनेट निर्णय हुआ कि डीटीसी हज़ार बसें खरीदेगी, जो बसे खरीदी जाएंगी उसके साथ-साथ एक व्यापक वार्षिक मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसको ये एएमसी कह रहे हैं. कंपीटिटिव बोली के लिए टेंडर न‍ि‍काला गया. दो अलग टेंडर होंगे और दोनों टेंडर उस तालमेल से कोट किए जाएंगे क‍ि जब बसे आ जाएं तो एक भी दिन ऐसा न हो कि कोई भी बस बिना मेंटीनेंस के हो.

- 20 मार्च 2020 में टेंडर 1000 बसों कोट किया
- 19 अगस्त 2020 को कॉम्प्रिहेंसिव एएमसी टेंडर किया
- 14 अक्टूबर 2020 को एएमसी की बिड्स खोलीं

बस देने वाली कम्पनी चंद ही हैं, जो भी बसें देने के टेंडर में पार्टिसिपेट करेगा उसको AMC के टेंडर में भी पार्टिसिपेट करेगा. ये टेंडर का हिस्सा है, जिसे ये वारंटी कह रहे हैं. पहले डीटीसी की जितनी भी बसें थी उसे डीटीसी मेंटेन किया करती थी, लेकिन लो फ्लोर बसें आनी शुरू हुईं इसका मेंटिनेंस डीटीसी के स्‍टॉफ खुद करते हैं. 71 आइटम्स ऐसे हैं जो वारंटी में कवर नहीं होते. सिर्फ CNG को छोड़कर दिल्ली सरकार या डीटीसी कुछ नहीं देती, हर एक चीज़ AMC अलग से देती है. अगर हमे ये पक्का करना है कि 92% बसें जो सड़क पर निकलें वो अच्छी हालत में हों इसके लिए वारंटी पीरियड में ये सारी चीज़ें कवर नहीं होती, जिसे हम AMC कहते हैं. AMC का L1 रेट आया ₹48.50, दूसरा रेट आया ₹49.29. हमने उनसे कहा इसको दोबारा देखा. 48.50 से खरीद फरोख्त करके 45.50 पर लेकर आए. 3 रुपए कम किए और एक बस की अगर अपनी लाइफ में साढ़े 7 लाख किलोमीटर चलती है तो हमने करीब 225 करोड़ रुपए बचाए. जिन्होंने किसानों को बेच खाया, जवानों को बेच दिया वो लोग आरोप लगा रहे हैं

बीजेपी व‍िधायक का क्‍या है आरोप ?
उस 3500 करोड़ रुपए में पहले 3 साल और 2 लाख 10 हज़ार किलोमीटर जो वारंटी पीरियड में कवर है, यानी जिस दिन बसे डीटीसी को मिलेंगी उसी दिन एएमसी 70 लाख रुपये शुरू हो जाएगी. नई गाड़ी में कम्पनी खुद हर सर्विस करके देती है. 890 करोड़ की बसों पर करीब 340 करोड़ रुपये आप एएमसी पर पहले ही साल में दे देती हैं. जब टेंडर किया 1 हज़ार बस का तो 1250 बस का टेंडर क्यों किया गया. अगर भविष्य में कोई आवश्यकता लगती तो टेंडर को 25% बढ़ा सकते, लेकिन जब टेंडर की ओपेनिंग हुई तो 1000 की जगह साढ़े 1200 बसों करोड़ का टेंडर किया. 27 नवम्बर को बोर्ड मीटिंग हुई, उसमें 250 करोड़ अतिरिक्त का फैसला वापस लिया गया. उसके बाद साढ़े 3 महीने से आज तक डीटीसी बोर्ड मीटिंग के मिनट अपलोड होने में इतना समय नहीं लगता है. 8 मार्च को सदन के पहले दिन जब विपक्ष ने मामला खड़ा किया तब शाम को आनन-फानन में इसे अपलोड किया गया.

विजेंद्र गुप्ता ने कहा क‍ि ये चीज़े हैं संदिग्ध
इसके बाद 1 हज़ार बस का टेंडर किया गया. उसमें से स्प्लिट किया गया कि 700 L1 से ली जाएंगी. 300 L2 से ली जाएंगी. टेंडर के बाद वर्क ऑर्डर के समय जो फैसले लिए गए हैं उससे साफ लग रहा है कि एक कम्पनी विशेष टेंडर को ले सके. बसों को स्‍पील‍िट करके जो कंडि‍शन रखी और एएमसी का टेंडर 3-4 महीने बाद किया. इसका मतलब ये है कि डेढ़ वर्ष पहले जिस जेपीएम कम्पनी को फेवर किया गया है हमने उसी कम्पनी का मामला उठाया. तब वो टेंडर वापस कर लिया गया. इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है? 3500 करोड़ में जो एएमसी की जा रही है उसका कोई औचित्य नहीं है.

जिन कम्पनियों ने बस खरीद का टेंडर लिया गया, वही कम्पनी एएमसी के लिए आवेदन कर पाएगी. सवाल यह है कि जो टेंडर किया उसका अनुमानित लागत कहां है, उसका औच‍ित्‍य क्‍या है. प्रतियोगिता को को लिमिटेड कर दिया.

Tags: CNG low floor alleged scam, Delhi news, Kailash Gehlot, Vijendra Gupta

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