Delhi Pollution: सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी-हम मेट्रो में यात्रा करना शान के खिलाफ समझते हैं

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस एक्ट को रद्द करने की मांग कर दी है. (File Photo)
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस एक्ट को रद्द करने की मांग कर दी है. (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हमारी मानसिकता देखिए. हम मेट्रो में नहीं जाना चाहते.हमारी कुछ अजीब धारणा है कि मेट्रो में यात्रा करना हमारी शान के खिलाफ है. कोई भी मेट्रो में एयरपोर्ट नहीं जाना चाहता.’

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को दिल्ली सरकार (Delhi Government) की Odd-Even योजना को लेकर तल्ख टिप्पणी की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा उसने उन कारों को सड़कों पर दौड़ने से क्यों रोक दिया जो दुपहिया तथा तिपहिया वाहनों तथा टैक्सियों के मुकाबले कम प्रदूषण फैला रही हैं. दिल्ली-NCR के प्रदूषण के मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि वह इस योजना से क्या हासिल कर रही है?

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि दुपहिया, तिपहिया और टैक्सियां Odd-Even योजना के दौरान सड़कों पर ज्यादा चलेंगी जबकि खासतौर से पेट्रोल से चलने वाली कारों से होने वाले प्रदूषण का उत्सर्जन टैक्सियों और ऑटो रिक्शा के मुकाबले कम है. दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में तिपहिया वाहन और टैक्सियां सीएनजी पर चलते हैं जो पेट्रोल तथा डीजल के मुकाबले ज्यादा स्वच्छ ईंधन है.

कोर्ट ने मांगे पहले के आंकड़े
पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि पूर्व में जब इस योजना को लागू किया गया था तो उस समय प्रदूषण के स्तर पर आंकड़ों को वह आठ नवंबर को उसके समक्ष पेश करें. उसने दिल्ली सरकार को ऐसे आंकड़ों को भी पेश करने के निर्देश दिए जिसमें पूर्व में लागू की गई Odd-Even योजना के दौरान चारपहिया वाहनों को सड़कों पर चलने से रोककर प्रदूषण के स्तर में आए फर्क का पता चल सके.
न्यायालय ने दिल्ली सरकार के वकील से पूछा, 'ऑटो और टैक्सी Odd-Even योजना के दौरान अधिक चलेंगे. वे प्रदूषण फैलाएंगे. आप कारों को क्यों रोक रहे हैं जो कम प्रदूषण करती हैं?’ पीठ ने दिल्ली सरकार से यह भी पूछा कि क्या वाकई उसे लगता है कि लोग Odd-Even योजना के दौरान अन्य लोगों के साथ साझा तौर पर सफर करना शुरू करेंगे?



पीठ ने कहा, ‘डीजल वाहनों पर रोक लगाना ठीक है लेकिन इस Odd-Evenका क्या औचित्य है? मुद्दा यह है कि आप एक वाहन को रोक रहे हैं लेकिन अन्य वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं. ’

कहां गईं 3000 बसें
न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा, ‘तीन साल पहले जब मैं सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बना था तो कहा गया कि सार्वजनिक परिवहन में 3,000 बसें लाई जाएंगी. अभी तक केवल 300 बसें लाई गईं.’ उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हमारी मानसिकता देखिए. हम मेट्रो में नहीं जाना चाहते.हमारी कुछ अजीब धारणा है कि मेट्रो में यात्रा करना हमारी शान के खिलाफ है. कोई भी मेट्रो में एयरपोर्ट नहीं जाना चाहता.’
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