Farmer Protest: गाजीपुर बार्डर पर अब बजेगा बैंड बाजा, आएगी बारात, तैयार होगा वैवाहिक मंडप! जानिये और क्या-क्या हो रही तैयारियां?

गाजीपुर बॉर्डर पर आने वाले समय में शादी समारोह भी आयोजित किए जाएंगे. (प्रतीकात्मक फोटो) .

गाजीपुर बॉर्डर पर आने वाले समय में शादी समारोह भी आयोजित किए जाएंगे. (प्रतीकात्मक फोटो) .

Farmer Protest: गाजीपुर बॉर्डर पर आने वाले समय में अलग ही नजारा देखने को मिलेगा. इस स्थल पर जहां किसान अपना जन्मदिन मना रहे हैं. वहीं आने वाले समय में यहां पर शादी समारोह और वैवाहिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इसका प्रस्ताव गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन का मोर्चा संभाल रहे राकेश टिकैत के पास आया है. 2 मार्च को एक वैवाहिक कार्यक्रम गाजीपुर बार्डर पर करने की इच्छा जाहिर की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 1:48 AM IST
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नई दिल्ली.  तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस करने की मांग को लेकर 3 माह से गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur Border) पर किसान डटे हुए हैं. दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर धरना देकर यह किसान लगातार तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग अपने तरीके से उठा रहे हैं. लेकिन अब दिल्ली की एक सीमा गाजीपुर बॉर्डर पर आने वाले समय में अलग ही नजारा देखने को मिलेगा.




इस स्थल पर जहां किसान अपना जन्मदिन मना रहे हैं. वहीं आने वाले समय में यहां पर शादी समारोह और वैवाहिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इसका प्रस्ताव गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन का मोर्चा संभाल रहे राकेश टिकैत के पास आया है.



इस प्रस्ताव पर टिकैत का कहना है कि किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर तीन माह का समय पूरा होने को है. आंदोलन के दौरान ऐसे तमाम लोग रहे जिन्होंने अपना जन्मदिन यहां मनाया. अब किसान इस बात की मांग करने लगे हैं कि उनके शादी ब्याह और सगाई समारोह आदि आंदोलन स्थल पर ही किए जाएं.




टिकैत ने बताया कि 2 मार्च को एक वैवाहिक कार्यक्रम यूपी गेट (गाजीपुर बार्डर) पर करने की इच्छा जाहिर की गई है. ऐसे कार्यक्रम जो लोग यहां करेंगे तो वर और वधु, दोनों पक्षों की ओर से 51 हजार रुपये सेना के रिलीफ फंड में दिए जाएंगे.






टिकैत ने यह भी कहा है कि किसानों के लिए जय जवान, जय किसान का नारा केवल नारा नहीं बल्कि हकीकत है और इसे किसान आंदोलन (Kisan Andolan) में मूर्तरूप दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसान देश की जनता का पेट भरता है और सरहद पर जवान देश की रक्षा करता है. लेकिन सरकारें इन दोनों को भूल गई हैं. ऐसे में सरकार को कुंभकर्णी नींद से जवानों के परिवारजनों को मदद के माध्यम से जगाने का भी काम किसान करेगा.

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