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Delhi Elections 2020: क्या बीजेपी के पास है केजरीवाल के इस चुनावी दांव की काट

दिल्ली में 8 फरवरी को विधानसभा चुनाव है. (फाइल फोटो)

दिल्ली में 8 फरवरी को विधानसभा चुनाव है. (फाइल फोटो)

बीजेपी (BJP) का नया नारा 'देश बदला है अब दिल्ली बदलेंगे' थीम पर केंद्रित होगा. पार्टी अघ्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने इसे हर नुक्कड़ और घर-घर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई है.

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नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में मुफ्त बिजली, साफ पानी, बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा से लेकर सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के दावों ने ऐसा चक्रव्यूह बनाया कि ऐसा लगने लगा कि उनके तमाम विरोधियों के पांव उखड़ने लगे हैं. 22 दिसंबर को दिल्ली में हुई रैली में पीएम मोदी (PM Modi) की हुंकार और सीएए (CAA) को लेकर हुए बवाल ने बीजेपी (BJP) को एक बार फिर लड़ाई में ला खड़ा किया. गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने ऐलान कर दिया कि पीएम मोदी के नाम और काम पर ही बीजेपी चुनाव लड़ेगी और बतौर मुख्यमंत्री कोई चेहरा आगे नहीं करेगी. अब उम्मीदवारों के नाम के ऐलान के बाद सूत्र बताते हैं कि 22 जनवरी से बीजेपी प्रचार में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर चुकी है.

नया नारा क्या होगा
बीजेपी का नया नारा 'देश बदला है अब दिल्ली बदलेंगे' थीम पर केंद्रित होगा. पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे हर नुक्कड़ और घर-घर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई है. इसमें 5000 छोटी-छोटी सभाएं की जाएंगी जिसमें 250-300 लोग भी मौजूद रहेंगे. केंद्र के तमाम मंत्री और स्टार प्रचारक भी इसमें हिस्सा लेंगे. इसमें मोदी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया जाएगा और ये भी बताया जाएगा कि केजरीवाल ने केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने की कोशिशों में क्या-क्या रोड़े अटकाए?

मेट्रो रेल का सेहरा सिर बांधने की तैयारी
सबसे बड़ा उदाहरण है मेट्रो रेल का निर्माण. 17 हजार करोड़ रुपये केंद्र ने खर्च किए और 136 किमी ट्रैक का निर्माण हुआ जिसमें 50 लाख दिल्लीवासी हर रोज यात्रा करते हैं. इसे असफल बनाने में केजरीवाल ने कैसे बार-बार बाधाएं पैदा कीं. जिस यातायात के धुएं से दिल्ली से लोगों की आंखों से पानी आता था, उससे निजात दिलाने में मोदी सरकार की ही भूमिका रही. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे बनाकर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को दिल्ली के बाहर से निकालना शुरू कर दिया. बीजेपी का आरोप है कि दिल्ली सरकार को इसमें 3000 करोड़ रुपये देने थे यानी योजना की कुल लागत का 10 फीसदी लेकिन उन्होंने देर भी की और पूरा हिस्सा देने से बचते रहे. दिल्ली की सड़कें भी खस्ताहाल हैं.

पराली को लेकर स्टैंड लेना
दूसरी तरफ पराली को लेकर पर्यावरण मंत्रालय ने स्टैंड लिया. पटाखों को लेकर जागरुकता अभियान चलाया लेकिन दिल्ली सरकार न अपने कूडे़ की डंपिंग पर लगाम लगाई बल्कि दिल्ली उद्योग विकास निगम के इलाके में आग और धुंआ निकलता ही रहा. इसलिए जनता को यही बताया जाएगा कि केजरीवाल सरकार ने शोर मचाने के अलावा दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने का कोई काम नहीं किया.

मुफ्त बिजली देने की बीजेपी का काट
मुफ्त बिजली एक ऐसा मुद्दा है जिसकी निंदा करना संभव नहीं है. बल्कि बीजेपी ये बताएगी कि केजरीवाल सरकार का बिजली कंपनियों के साथ सिर्फ एक साल का अनुबंध है, जो मार्च 2020 में खत्म होगा. इसलिए ये फैसला चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है. अगर वो दोबारा वापस आते हैं तो फिर से पुराने बिल वापस आने लगेंगे. इसलिए भरोसा बीजेपी पर ही करना चाहिए. केंद्र सरकार ने मुफ्त में एलईडी बांटी. उसके दाम में भारी कटौती कराई ताकि घरों में बिजली बिल और कम आएं.

बीजेपी चलाएगी पानी को लेकर कैंपेन
पानी को लेकर भी बीजेपी चुनाव तक बड़ा कैंपेन चलाने की तैयारी में है. केजरीवाल ने साफ पानी का शगूफा छोड़ा है. ये साबित करने के लिए बीजेपी कार्यकर्ता हर दिन एक नए मोहल्ले से नल का पानी लेकर केजरीवाल को देने जाएंगे और कहेंगे कि पानी पीकर दिखाओ केजरीवाल. ये साबित करेंगे कि पानी के वायदे कितने झूठे हैं. 'फ्री नहीं साफ पानी चाहिए' का नारा होगा.

अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का मुद्दा
अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का मुद्दा भी बीजेपी को लगता है कि वोट उनकी तरफ खींचेगा, क्योंकि एक बड़ी संख्या में दिल्ली वासियों को इसका लाभ पहुंचा है. साथ ही दिल्ली की जनता को ये बताया जाएगा कि अगर बीजेपी की सरकार आती है तो वो गरीबों के सपनों को पूरा करेगी. इसका नारा होगा जहां झुग्गी वहां मकान. यानी जहां गरीब की झोपड़ी हो वहीं पक्के मकान बनाकर सरकार देगी. ये सुनिश्चित किया जाएगा कि वो जहां नौकरी कर रहे थे, वहीं नौकरी करते रहे और बच्चे जिन स्कूलों में पढ़ा रहे थे, वहीं पढ़ते रहें. कॉलोनियों की हालत भी सुधर जाएगी. 10 लाख से ज्यादा दुकानदारों यानी दस लाख घरों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने का फैसला भी लोगों को पहुंचाया जाएगा.

बीजेपी के प्रचार में निशाने पर मोहल्ला क्लीनिक भी होंगे. बीजेपी कहेगी कि जिस मुफ्त इलाज का केजरीवाल दम भर रहे हैं वो इलाज सरकारी अस्पतालों में पहले से ही मुफ्त होता है. यहां तक कि गरीबों के लिए बनी आयुष्मान भारत योजना को भी केजरीवाल सरकार ने लागू नहीं किया.

राष्ट्रीय मुद्दे
सीएए को लेकर दिल्ली भर में प्रदर्शन चल रहे हैं. इसे आप पार्टी के लोगों ने गलत ठहराया है. भले ही केजरीवाल इस पर कुछ नहीं बोल रहे हों. पार्टी को लगता है कि इससे उनका वोट बैंक और मजबूत हो रहा है. इसलिए ये मुद्दा तो प्रचार में छाया रहेगा. बीजेपी कार्यकर्ता घर-घर जाएंगे तो राम मंदिर और कश्मीर में धारा-370 हटाने के फैसले के बारे में भी लोगों को बताएंगे. इसके लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को घर-घर प्रचार का निर्देश भी दिया गया है. यानी चुपचाप ध्रुवीकरण की कोशिशें जारी रहेंगी. साथ ही केजरीवाल पर ये भी आरोप लगाया जाएगा कि अन्ना के कंधे पर पांव रख मुख्यमंत्री बनने वाले केजरीवाल ने कैसे लोकपाल से किनारा कर लिया है.

जाहिर है कि बीजेपी ये साबित करने की कोशिश में हैं कि उनकी सरकार और निगमों ने समाज के हर वर्ग के लिए कुछ ना कुछ किया है. 21 जनवरी को नामांकन का सिलसिला खत्म होते ही 22 जनवरी से पार्टी पूरी ताकत से मैदान में कूदेगी और जनता को यही विश्वास दिलाएगी कि दिल्ली में ट्रिपल इंजन ग्रोथ होगी अगर वो बीजेपी सरकार चुनते हैं. केंद्र में बीजेपी, एमसीडी में बीजेपी और अब दिल्ली में बीजेपी. अब देखना होगा कि इस थीम के साथ बीजेपी केजरीवाल को कितनी टक्कर दे पाती है?

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