निर्भया केस: पढ़िए क्या-क्या लिखा है ब्लैक डेथ वारंट के फॉर्म नंबर 42 में
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निर्भया केस: पढ़िए क्या-क्या लिखा है ब्लैक डेथ वारंट के फॉर्म नंबर 42 में
'निर्भया' की मां आशा देवी चारों दोषियों को फांसी देने में हो रही देरी से काफी दुखी हैं (फाइल फोटो)

इस डेथ वारंट में दोषियों को दी जाने वाली फांसी की सजा की जानकारी लिखी होगी. आइये जानते हैं कि क्या होता है फॉर्म नंबर 42 जिस पर लिखी जाती है मौत की सजा.

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  • Last Updated: January 7, 2020, 5:16 PM IST
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नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Case) के मामले में चारों दोषियों को फांसी (Hanging) पर लटकाए जाने की तैयारी पर मुहर लग गई है. कोर्ट ने फांसी की तारीख 22 जनवरी तय की है. ब्लैक डेथ वारंट जारी करने से पहले कोर्ट में जज ने दोषियों से उनका पक्ष भी सुना. इसके बाद ही कोर्ट ने फॉर्म नंबर 42 पर ब्लैक डेथ वारंट जारी कर दिया. इस डेथ वारंट में दोषियों को दी जाने वाली फांसी की सजा की जानकारी लिखी है. आइये जानते हैं कि क्या होता है फॉर्म नंबर 42 जिस पर लिखी जाती है मौत की सजा.

12 लाइन के ब्लैक डेथ वारंट में लिखा होता है यह

ब्लैक डेथ वारंट  के फॉर्म नंबर 42 के पहले कॉलम में उस जेल का नाम लिखा होता है जहां उन्हें फांसी दी जानी है. इसके बाद उन दोषियों के नाम लिखे होते हैं जिन्हें फांसी दी जानी है. इसके बाद उस केस का नंबर लिखा जाता है जो केस दोषियों के खिलाफ चलाया गया है.



फिर बाद में कोर्ट उस तारीख, महीने और साल को लिखती है जिस दिन ब्लैक डेथ वारंट जारी हो रहा होता है. केस से संबंधित हाईकोर्ट का जिक्र भी किया जाता है.



ब्लैक डैथ वारंट का फॉर्म नंबर 42


दम निकलने तक गले से लटकाए जाने के होते हैं आदेश

अगर ब्लैक डैथ वारंट  के फॉर्म नंबर 42 को गौर से देखा जाए तो उसमे-उसमे साफ-साफ लिखा होता है कि फांसी दिए जाने वाले को गले से तब तक लटकाया जाए कि जब तक उसकी जान न निकल जाए. और फिर ऐसा करने के लिए आगे के कॉलम में दिन, वक्त और जगह का नाम दिया जाता है. और फिर जेल प्रशासन को कोर्ट की ओर से निर्देश होते हैं कि ऐसा करने के बाद ब्लैक डेथ वारंट दोषियों के डेथ वारंट के साथ वापस कोर्ट को भेजा जाए.

सबसे आखिर में लिखी जाती है पेन तोड़ने वाली लाइन

जब कोर्ट में जज ब्लैक डेथ वारंट यानि फॉर्म नंबर 42 के सभी कॉलम को भर देते हैं तो उसके बाद सबसे नीचे की ओर वारंट जारी करने वाली तारीख लिखते हैं और अपने साइन करते हैं. यही वो मौका होता है जब डेथ वारंट जारी करने के बाद जज पेन की निब को तोड़ देते हैं. फॉर्म 42 पर सबसे आखिर में जज अपने साइन करते हैं. और साइन करते ही पेन को तोड़ देते हैं.

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