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शाहीन बाग में जो हो रहा है वो सरकार के प्रति मुसलमानों का पिछले 5 सालों का डर है: नजीब जंग

News18Hindi
Updated: January 23, 2020, 7:59 AM IST
शाहीन बाग में जो हो रहा है वो सरकार के प्रति मुसलमानों का पिछले 5 सालों का डर है: नजीब जंग
शाहीन बाग नें चल रहे विरोध के समर्थन में उतरे नजीब जंग

दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग (Former Delhi LG Najeeb Jung) ने शाहीन बाग की महिलाओं का समर्थन करते हुए कहा जब तक तमीम (संशोधन) को वापस नहीं लिया जाता, तब तक सीएए (CAA) विरोधी आंदोलन जारी रहेगा.

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  • Last Updated: January 23, 2020, 7:59 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग (Former Delhi L-G Najeeb Jung) एक बार फिर एक्शन में हैं. उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) के बाहर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और इस दौरान उन्होंने कई अहम् बातें कहीं. उन्होंने शाहीन बाग की महिलाओं का समर्थन करते हुए कहा जब तक कानून को वापस नहीं लिया जाता, तब तक सीएए विरोधी आंदोलन जारी रहेगा. साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि इसे विरोधी के रूप में नहीं देखा जा सकता.

जंग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए भी अपने विचार बदल लिए हैं, जिनके साथ उनके संबंध इतने खराब हो गए थे कि मामला कोर्ट तक पहुंच गया था. दिल्ली के पूर्व एल-जी और जामिया विश्वविद्यालय के पूर्व-कुलपति ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम, केजरीवाल पर उनकी नई राय और मुस्लिम नेतृत्व में शून्य के बारे में न्यूज18 से बात की.

हमने जब सवाल किया कि- जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने हाल ही में एक हिंसक रात देखी, जहां दिल्ली पुलिस को एक क्रूर और आक्रामक बल के रूप में देखा गया था. उस घटना को आप कैसे देखते हैं जब पुलिस ने छात्रों को लाइब्रेरी में जाने से रोका था?

बेहद दर्दनाक है जामिया की घटना

उनका जवाब था कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की घटना बेहद दर्दनाक है क्योंकि इस तरह की घटना विश्वविद्यालय में पहले कभी नहीं हुई थी. वास्तव में, कुछ सप्ताह बाद हुई जेएनयू की घटना पर रोक लगाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं दिल्ली में नहीं होती हैं. मैं पूरी तरह से हैरान हूं.

हमले के स्तर पर हैरान हूं
मुझे लगता है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने लोगों को नीचे जाने दिया और ऑपरेशन की निगरानी नहीं की। पुस्तकालय में हमला दुर्भाग्यपूर्ण था. मैं उन छात्रों से मिला जो घायल थे - उनमें से लगभग 250 और कुछ 15 गंभीर रूप से घायल थे. उनमें से एक ने अपनी आंख खो दी. मुझे नहीं पता कि भविष्य उसके लिए क्या मायने रखता है. कुछ छात्रों को आघात लगा है; यह उनके दिमाग को प्रभावित कर रहा है. मैं इस हमले के स्तर पर हैरान हूं.


जामिया में कहीं अधिक आक्रामक थी दिल्ली पुलिस
उन्होंने कहा- जामिया एक धर्मनिरपेक्ष विश्वविद्यालय है. यह मुस्लिम विश्वविद्यालय है यह सोचना एक पूर्ण मिथक है. मुझे लगता है कि 40% छात्र गैर-मुस्लिम हैं. वे एक साथ हॉस्टल में रहते हैं, एक ही खेल खेलते हैं. उन पर इस कार्रवाई का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. वे अपने लिए भविष्य बनाने के लिए छोटे शहरों से आते हैं. ये छात्र भारत के युवा हैं, और अधिकारियों को अपने आत्मविश्वास को फिर से जीवित करने में मदद करनी चाहिए.

जब जंग से पूछा गया कि- चूंकि दिल्ली पुलिस एल-जी और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, आप इस स्थिति को अलग तरह से कैसे संभालेंगे?
तो उन्होंने जवाब दिया कि देखिए, मैं मानता हूं परिस्थितियां बदलती हैं, परिस्थितियां बदलती हैं. मेरा मानना है कि पुलिस अधिक चौकस हो सकती थी और मुझे नहीं लगता कि L-G को सूचित किया गया था कि पुलिस इस तरह की कार्रवाई कर रही है. मुझे पता है कि अनिल बैजल एक अनुभवी सिविल सेवक हैं. उन्होंने जो बर्बरता की, वह होने नहीं देता.

विभिन्न समाचार रिपोर्टों से पता चलता है कि सीएए-एनआरसी ने पूरे भारत में अल्पसंख्यकों के बीच बड़े पैमाने पर भय पैदा किया है. आप इन घटनाक्रमों को कैसे पढ़ते हैं और आशंकाओं को दूर करने के लिए केंद्र को क्या करना चाहिए?
जंग बोले- पिछले छह वर्षों में देंखें तो, मुसलमानों और ईसाइयों के बीच डर बढ़ रहा है. मेरा यह भी मानना है कि राज्य और केंद्र सरकारों को इन आशंकाओं को दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए थे. प्रधानमंत्री ने कहा है कि फ्रिंज तत्व इस तरह से व्यवहार करते हैं. हमें इस आधार पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है कि फ्रिंज तत्वों को लोहे के हाथ से नियंत्रित किया जा सकता है. यह भय सरकार के उन फैसलों से उपजा है, जिन्हें अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अग्रणी माना जाता है.

धारणा यह है कि सरकार पूरी तरह से मुस्लिम समुदाय पर कठोर है
उदाहरण के लिए, कश्मीर को देखें, जो मुस्लिम बहुल राज्य था. मैं यहां धारा 370 के अच्छे या बुरे होने की बात नहीं कर रहा हूं. ट्रिपल तालक को देखें, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह अच्छा है या बुरा है, लेकिन इसे मुसलमानों के मामलों में हस्तक्षेप माना जाता है. और अब, सीएए-एनआरसी. धारणा यह है कि सरकार पूरी तरह से मुस्लिम समुदाय पर कठोर है. इससे डर पैदा हो गया है और इस डर की प्रतिक्रिया अब भारत की सड़कों पर दिखाई दे रही है.

शाहीन बाग में आप जो देख रहे हैं, वह इस सब की प्रतिक्रिया है, पिछले पांच वर्षों में संचयी भय, जो भय अब सामने आया है. और जो आप आज विभिन्न विरोधों में देख रहे हैं. भारत सभी धर्मों को जोड़ता है, आप दो को बाहर नहीं कर सकते हैं और कहते हैं कि मैं उनकी देखभाल करूंगा. हम इस देश में एक साथ रहेंगे और मरेंगे.

अंत में ये पूछे जाने पर कि क्या- CAA विरोध प्रदर्शन में ला इलाहा इल्लल्लाह का आह्वान बहिष्कार या आवश्यक है? तो उनका जवाब था कि - यह सिर्फ एक भावनात्मक कॉल है. मुझे नहीं लगता कि यह एक सांप्रदायिक है. मुख्य बात यह है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावना पढ़ी, आज उन्होंने वंदे मातरम का जाप किया. सीएए आंदोलन के कारण सबसे बड़ा सुधार यह है कि मुसलमान समझते हैं कि वंदे मातरम गाने में कुछ भी गलत नहीं है. अपनी मां को नमन करने में गर्व है और यह देश हमारी मां है. हम यह भी कभी न भूलें कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है क्योंकि 85% हिंदू हैं.

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First published: January 22, 2020, 8:15 PM IST
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