गांवों में कोरोना मौत, टेस्‍ट‍िंग और वैक्सीनेशन को लेकर क्‍या है सच्‍चाई? जानें द‍िल्‍ली, हर‍ियाणा और यूपी की ग्राउंड र‍िपोर्ट‍

एनसीआर के पांच गांवों की ग्राउंड र‍िपोर्ट

एनसीआर के पांच गांवों की ग्राउंड र‍िपोर्ट

Delhi News: दूसरी लहर में कोरोना ने शहरों को अपनी चपेट में ल‍िया है. क्‍या हैं गांव में हालात और अभी वहां वैक्‍सीनेशन और कोव‍िड जांच को लेकर क्‍या है स्‍थ‍ित‍ि? इतना ही नहीं गांव में कोरोना मौत को लेकर क्‍या है हालात, न्‍यूज 18 की इस र‍िपोर्ट में जानें एनसीआर के पांच गांवों का हाल...

  • Share this:

दीपक रावत/प्र‍ियंका कांडपाल/ यतेन्द्र शर्मा

गांवों में कोरोना किस तरह पैर पसार चुका है ये दिखलाने हम आज आपको लेकर चलेंगे उत्तर प्रदेश, हर‍ियाणा और द‍िल्‍ली के पांच गांवों में गए और द‍िखा क‍ि वहां कोरोना का क्‍या असर है? कोरोना वैक्‍सीनेशन हो रहा है, कोरोना टेस्‍ट को लेकर क्‍या हालात हैं?

उत्‍तर प्रदेश के गाजि‍याबाद जि‍ले के कुछ गांवों में लोगों की लगातार मौत हो रही है और वजह है मेडिकल सुविधाओं का अभाव है. गांवों की जमीनी हकीकत दिखाने सबसे पहले न्‍यूज 18 पंहुचा जावली गांव में... इस गांव के लोगों के मुताबिक, यहां पिछले 1 महीने में 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज़्यादातर टेस्ट में कोरोना पॉज़िटिव पाए गए थे, जबकि कुछ में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए थे. गांव के रहने वाले महकार कसाना ने तो मरने वालों की पूरी लिस्ट तैयार कर रखी है. महकार बताते हैं कि ये लिस्ट इसलिए तैयार की है ताकि प्रशासन को ये बता सकें कि लोग मर रहे है लेकिन कोई सुध लेने नहीं आ रहा. इनका कहना है कि गांव में ना तो कोई आइसोलेशन सेंटर तैयार किया गया है, ना ही कोई छिड़काव या जांच के लिए आता है. जांच कराने भी 15 किमी दूर सेंटर पर जाना होता है.

इसी गांव के रवीन्द्र कसाना ने भी बताया कि उन्हें और उनके परिवार वालों को कोरोना हो गया था. इस बीच मां की तबीयत ज़्यादा ख़राब हो गई. मां को लेकर रवीन्द्र दर-दर भटकते रहे लेकिन इलाज नहीं मिला. फिर पुलिस की मदद से इलाज मिल पाया और मां की जान बचा पाए. रविंद्र बताते हैं कि गांव में लोग बीमार है. रोज़ाना मौतें हो रही है लेकिन प्रशासन के लोग इस तरफ़ ध्यान नहीं दे रहे है.
जानें क्‍या हाल है गाजियाबाद के भूपखेडी गांव का हाल

इस गांव से थोड़ा आगे बढ़े और हमारी टीम पंहुची गाज‍ियाबाद के ही भूपखेडी गांव में. इस गांव में भी लोग मेडिकल सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे है. सही इलाज ना मिलने की वजह से कुछ लोगों की मौत तक हो गयी है.. गाँव में कुछ लोगों से बात हुयी तो पता चला कि हाल ही में एक 22-23 साल के लड़के की जान चली गयी.. उसे मेरठ से लेकर दिल्ली के तमाम अस्पतालों में इलाज के लिये ले ज़ाया गया लेकिन इलाज नहीं मिला और आख़िरकार घर वापस लौटना पड़ा. कुछ दिन में उनकी मौत हो गई. गाँव के लोगों का कहना है कि प्रशासन की तरफ़ से कोई ध्यान देने वाला नहीं है.

Youtube Video



भूपखेडी गांव में ही गांव वाले हमें एक प्राथमिक चिकित्सालय तक लेकर गए. ये चिकित्सालय उन दावों की पोल खोलता हुआ नज़र आया, जिसमें ये दावा किया जाता है कि गांववालों के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था गांव में ही की जाती है. चिकित्सालय के अंदर गोबर और भूसा भरा हुआ नज़र आया. इस पर गांव के लोगों का कहना है कि अगर ये चिकित्सालय ठीक तरह से काम कर रहा होता तो इसे कोविड केयर सेंटर बनाया जा सकता था. इसमें डॉक्टर होता तो लोगों को प्राथमिक उपचार मिल पाता और शायद किसी की जान बच पाती, लेकिन ये सालों से ऐसा ही पड़ा है कोई सुध लेने वाला नहीं.

क्‍या है हर‍ियाणा के पलवल के औरंगाबाद के गांव का हाल

हर‍ियाणा के पलवल के कई गांव भी कोरोना महामारी की चपेट में आ गए हैं. कोरोना संक्रमण के कारण इन गांवों के हालात बदहाल हो गए हैं. गांववालों का दावा है कि उनके गांव में कई मौतें कोरोना के कारण हुई गई हैं. हरियाणा के पलवल से महज़ 5 किमी की दूरी पर हैं गांव औरंगाबाद. इस गांव में कोरोना का क़हर जारी है. गांव के सरपंच का दावा है कि उनके यहां 20 से 25 मौतें तक कोरोना के कारण हो गई हैं. गांव में लगातार कोरोना के मरीज़ निकल रहे हैं, लेकिन सरपंच के अनुसार, गांव में टेसिंटग हो रही है और वेक्सीनेशन भी किया जा रहा है. वहीं दूसरे गांव मितरोल के सरपंच भी अपने गांव में कोरोना के कारण मौतों को लेकर ऐसा ही दावा करते नज़र आए.

वहीं दूसरी तरफ़ औरंगाबाद गांव की बुजुर्ग महिलाएं और बुजुर्ग कोरोना के कारण दहशत में हैं. उनका आरोप है कि गांव में कोई भी सुविधा सरकार और प्रशासन द्वारा नहीं दी जा रही. सामुदायिक केन्द्र पर तो टेस्टिंग हो रही है लेकिन घर-घर जाकर टेस्टिंग के दावे झूठे हैं. वहीं वैक्सीन के लिये सेंटर कई किमी दूर आंवटित किया जा रहा है. कोरोना का डर है जिसके कारण औरंगाबाद सुनसान नज़र आ रहा है. स्थानीय गांव वालों के अनुसार, हर दूसरे या तीसरे घर में कोरोना पॉज़ीटिव हैं लेकिन डर के कारण वो टेस्टिंग के लिए सेंटर पर जाने को तैयार नहीं हैं और स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर भेजने की महिम केवल कागजों पर नज़र आ रही है.

दिल्ली के खेड़ा कलां से ग्राउंड र‍िपोर्ट

द‍िल्‍ली के खेड़ा कलां के 5 गांव के ल‍िए एक टेस्टिंग सेंटर है, जिसमें एक दिन में केवल 50 टेस्ट्स ही होते है. यहां 45000 की आबादी के किए एक दिन में केवल 50 कोरोना टेस्‍ट क‍िट ही म‍िलती हैं. इस गांव के एक घर में चार लोग पॉज़िटिव थे और प्रशासन से कोई मदद नहीं म‍िली तो दवाई और राशन के लिए पड़ोसियों से मदद मांगी.

वहीं एक परिवार ने पिता खोया दि‍या, दो दिन तक टेस्टिंग की कोशिश की नहीं करवा पाए तो लोकल डॉक्टर को दिखाया. टाइफ़ॉड समझ के इलाज कराया और बाद में ऑक्सीजन डाउन हुआ और मृत्यु हो गई. परिवार का कहना है क‍ि टेस्टिंग और कोरोना की जानकारी पहले होती तो शायद पिता बच जाते. इनका कहना है क‍ि इनकी मदद के लिए कोई प्रशासन काम नहीं आया.

आरडब्‍लयू प्रेसिडेंट सुमन कौशिक ने बताया क‍ि यहां 70 प्रत‍ियात लोग इंफ़ेक्टेड है. हर परिवार में यहां टेस्टिंग नहीं है. वैक्‍सीनेशन सेंटर नहीं है और अस्पताल नहीं है. इतने बड़े बड़े सरकारी स्कूल है उनको आइसोलेशन वॉर्ड बना दो. कोव‍िड केयर सेंटर बनवा दो. एक गांव वाले ने बताया क‍ि 15-20 दिन में पचास से ज़्यादा मौत हुई है .

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज