दिल्ली में हेल्थ असिस्टेंट की भर्ती में प्रशिक्षण का समय बढ़ाया जाए- स्वास्थ्य विशेषज्ञ

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर दिल्‍ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, जिसमें बड़े-बड़े स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ सुधार की मांग कर रहे हैं. (फाइल)

Delhi Government health assistant vacancy: कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए दिल्‍ली सरकार (Delhi Government) की ओर से 5000 युवाओं को स्‍वास्‍थ्‍य सहायक (Health assistant) बनाने की तैयारी की जा रही है. दिल्‍ली के 12वीं पास युवाओं से इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं.

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नई दिल्‍ली. कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए दिल्‍ली सरकार (Delhi Government) की ओर से 5000 युवाओं को स्‍वास्‍थ्‍य सहायक (Health assistant) बनाने की तैयारी की जा रही है. दिल्‍ली के 12वीं पास युवाओं से इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं. इन्‍हें 15 दिन की ट्रेनिंग देकर पैरामेडिकल हेल्‍थ असिस्‍टेंट के रूप में भर्ती किया जाएगा. हालांकि मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind kerjiwal) के इस कदम की स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ न केवल आलोचना कर रहे हैं बल्कि इस पर रोक लगाने की मांग भी कर रहे हैं.

न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र का कहना है कि यह  12वीं पास युवाओं को महज 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद इस इस तरह नर्सिंग सहायक (Nursing Assistant) के रूप में कैसे भर्ती किया जा सकता है. डॉ. मिश्र कहते हैं कि यह मरीज़ों के लिए हितकारी नहीं लग रहा है. अगर लोगों को भर्ती करना ही है तो नर्सिंग और मेडिकल फील्‍ड के युवाओं को क्‍यों नहीं भर्ती किया जा रहा. क्‍या उन लोगों की कमी हो गई है देश में.



इस तरह की भर्ती से मरीजों का भलाई का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं लगता. इन्‍हें जनरल ड्यूटी में लगाया जा सकता है, लेकिन नर्सिंग में नहीं लगाया जा सकता. इस तरह की भर्ती नहीं होनी चाहिए.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बोले- 15 दिन की ट्रेनिंग नाकाफी 

वहीं नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल से रिटायर्ड और जाने माने पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. सतपाल कहते हैं कि इस तरह 15 दिन की ट्रेनिंग पाकर हर आदमी स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी मामलों का एक्‍सपर्ट कैसे हो जाएगा और सभी के साथ-साथ अपना भी इलाज कर लेगा.

जब 12वीं पास पैरामेडिकल स्‍वास्‍थ्‍य सहायक बनकर औरों की देखभाल करेंगे और कोरोना के इलाज में मदद करेंगे तो यह तो बेहद सस्‍ता सौदा है. इसे तो हर राज्‍य को अपना लेना चाहिए और अपने राज्‍य के हर व्‍यक्ति को ट्रेंड कर देना चाहिए. इसके बाद बीमारी तो फैल ही नहीं सकती, लेकिन अगर वास्‍तविकता में देखा जाए तो यह नुकसान पैदा कर सकता है. यह मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

वहीं डॉ. मंजरी त्रिपाठी कहती हैं कि नर्सिंग के बजाय अगर मुख्‍यमंत्री इन लोगों को सामाजिक रूप से वॉलंटियर बनाएं तो बेहतर होगा. ये मरीजों को अस्‍पताल ले जाने से लेकर उन्‍हें सलाह देने का काम कर सकते हैं लेकिन नर्सिंग में पढ़ाई के साथ-साथ अनुभव की भी जरूरत होती है. एक गलती काफी कुछ खराब कर सकती है. 15 दिन में नर्स और टैक्निशियन बनाने का यह आइडिया नायाब है. हालांकि यह संभव नहीं है.

आईएमए और नर्सेज यूनियन ने भी की सुधार की मांग

वहीं एम्‍स नर्सिंग यूनियन के अध्‍यक्ष हरीश कुमार काजला कहते हैं कि जो नर्सेज पहले से काम कर रहे हैं उन्‍हें उनकी सैलरी न देकर बाहर से किसी को भी भर्ती करके और ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट देकर अब सरकार मरीजों का इलाज कराएगी. यह बेहद खतरनाक है. सरकार को चाहिए ि‍कि नर्सिंग के लोगों को भर्ती करे जिससे व्‍यवस्‍था और बेहतर हो.

वहीं ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष डॉ. रॉय के जॉर्ज का कहना है कि इस तरह ट्रेनिंग प्राप्‍त लोगों को नर्स या कम्‍यूनिटी असिस्‍टेंट नहीं कहा जा सकता. नर्स होने के लिए एनाटॉमी और फिजियोलॉजी की अच्‍छी समझ होना जरूरी है. इस तरह के ट्रेंड लोग सिर्फ मरीजों के कपड़े बदल सकते हैं, रजिस्‍ट्रेशन कर सकते हैं, मरीजों को इधर से उधर ले जाने का काम कर सकते हैं.

वहीं आईएमए के कई सदस्‍यों का भी यही कहना है कि दिल्‍ली सरकार अपने इस आदेश को वापस ले या फिर इस पर रोक लगाई जानी चाहिए. यह फैसला सही नहीं है.

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