Ram Vilas Paswan death: तेरह-चौदह साल के पासवान जब पहली बार मिले थे अटल जी से

6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनुभव.
6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनुभव.

राम विलास पासवान ने कहा था कि मैं बचपन में केवल दो नेता के नाम जानता था. एक अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरे राम मनोहर लोहिया. लोहिया जी को पढ़ता था और वाजपेयी जी को सुनता था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 1:50 PM IST
  • Share this:
राम विलास पासवान (Ram Vilas Paswan) बड़े दिल वाले नेता थे. सबको साथ लेकर चलने की सलाहियत उन्होंने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) से सीखी थी. एक बार उन्होंने कहा था कि मैं बचपन में केवल दो नेता के नाम जानता था. एक अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरे राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia). लोहिया जी को पढ़ता था और वाजपेयी जी को सुनता था. जब अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ था तब राम विलास पासवान ने खुद बताया था कि उनकी वाजपेयी जी से पहली मुलाकात कब और कैसे हुई थी.

1957 में वाजपेयी जी से पहली मुलाकात

1957 की बात है. राम विलास पासवान तब आठवीं क्लास में पढ़ते थे. तेरह-चौदह साल की उम्र थी. खगड़िया जिले के एक स्कूल में पढ़ते थे. एक दिन जब स्कूल जा रहे थे तब उन्होंने लाउडस्पीकर पर प्रचार सुना कि अटल बिहारी वाजपेयी भाषण देने के लिए आ रहे हैं. पासवान बचपन में दो ही नेता का नाम जानते थे. राम मनोहर लोहिया और अटल बिहारी वाजपेयी. लोहिया जी की बातें अच्छी लगती थीं इसलिए उस उम्र में भी उनके बारे में पढ़ते थे. लोगों से सुना था कि अटल जी बहुत बढ़िया भाषण देते हैं. रेडियो पर एक दो बार भाषण सुना भी था. पासवान जब खगड़िया शहर में जाते थे तो बड़ी-बड़ी दुकानों में अटल जी की तस्वीर लगी देखते थे. तस्वीर से ही वे अटल जी को पहचानते थे. अगले दिन जब वे स्कूल से लौट रहे थे तो रास्ते में एक जगह बहुत भीड़ देखी. वहां मंच बना हुआ था. करीब हजार आदमी की भीड़ थी. राम विलास पासवान के साथ तीन बच्चे और थे. जब उन्होंने जाना कि अटलजी भाषण देने वाले हैं तो वे उत्सुकतावश वहां चले गये. अटल जी का भाषण शुरू हुआ. जब अटल जी के भाषण पर लोग ताली बजाते तो वे भी अपने साथियों के साथ जोर-जोर से ताली बजाने लगते. अटल जी की बोलने की शैली, लोगों की तालियां, राम विलास पासवान कभी नहीं भूले.



वाजपेयी जी के लिए राम विलास की प्रार्थना सभा
1977 में जब राम विलास पासवान रिकॉर्ड तोड़ मतों से सांसद बने तो भारत ही नहीं दुनिया भर में उनकी शोहरत फैल गई. तब उनका नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था. 1977 में सांसद बनने के बाद पासवान पहली बार दिल्ली गए थे. इस दौरान ही उनका वाजपेयी जी से आमने-सामने का परिचय हुआ. राम विलास पासवान समाजवादी थे लेकिन अटल जी के मुरीद थे. इमरजेंसी में राम विलास पासवान और अटल बिहारी वाजपेयी अलग-अलग जेलों में बंद थे. एक दिन जेल में खबर मिली कि वाजपेयी जी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है. इतना सुन कर राम विलास पासवान अधीर हो गए. उन्होंने जेल में अन्य सहयोगियों के साथ अटल जी के जल्द स्वस्थ होने के लिए एक प्रार्थना सभा की थी. राम विलास पासवान ने कहा था, कोई नेता तब बड़ा होता है जब उसका दिल बड़ा होता है और ऐसे बड़े दिल वाले नेता का दल भी बड़ा हो जाता है. पासवान के मुताबिक अटल जी ऐसे ही नेता थे.

जब राम विलास को सीएम बनाना चाहते थे अटल जी

2015 के विधानसभा चुनाव के समय राम विलास पासवान ने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी की इच्छा थी कि 2005 में वे बिहार का मुख्यमंत्री बनें. 2005 के अक्टूबर नवम्बर में चुनाव कराए जाने का एलान हो चुका था. बिहार का अगला सीएम कौन होगा, इस प्रश्न पर विचार करने के लिए अटल जी के आवास पर एक बैठक हुई थी, जिसमें अटल जी के अलावा लालकृष्ण आडवाणी, यशवंत सिन्हा, जॉर्ज फर्नांडीस, नीतीश कुमार, शरद यादव और खुद राम विलास पासवान शामिल थे. सबने अपनी अपनी बात रखी. सबकी बात सुन कर अटल जी कुछ देर तक आंखें बंद कर खामोश रहे. फिर उन्हों कहा, मेरी मानिए तो राम विलास जी को अगला सीएम प्रोजेक्ट कर दीजिए. ये सबको मिला कर चलने वाले नेता हैं. कुछ सीटें कम भी रहेंगी तब भी सरकार आराम से पांच साल चलेगी. किसी भी दल को इनकी सरकार गिराने के बारे में सौ बार सोचना होगा. तब अटल जी की बात पर सब लोग चुप रह गये थे. बाद में नीतीश कुमार को बिहार का सीएम प्रोजेक्ट किया गया था.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज