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आखिर बेचारा बनने की कोशिश में क्यों हैं अरविंद केजरीवाल?
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Anil Rai | News18Hindi
Updated: February 6, 2020, 2:30 PM IST
आखिर बेचारा बनने की कोशिश में क्यों हैं अरविंद केजरीवाल?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटे हैं.

क्या अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) दिल्ली चुनाव में ठीक उसी तरह अपने लिए कैंपेन कर रहे हैं, जैसा कि नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) अपने पिछले कार्यकाल में करते रहे हैं?

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  • Last Updated: February 6, 2020, 2:30 PM IST
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पिछले 5 साल से अरविंद केजरीवाल दिल्ली में बेहतर स्वास्थ सुविधा, बेहतर शिक्षा, फ्री बिजली, फ्री पानी के साथ बेहतर सड़कों की बात कर रहे हैं. यहां तक कि चुनाव के कुछ दिन पहले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा और फ्री मेट्रो सेवा का प्रस्ताव भी रखा. यानि ये बातें साफ करती हैं कि केजरीवाल सिर्फ विकास की राजनीति करना चाहते हैं. केजरीवाल के पिछले 5 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल को देखें तो वह शुरू के 2 साल तक प्रधानमंत्री मोदी से गाहे-बगाहे उलझते नजर आए. केजरीवाल की हर लाइन प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ होती थी और अक्सर देखा जाता था कि केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार पर हमला करने का कोई भी मौका नहीं चूकते थे. लेकिन पिछले 2 सालों में केजरीवाल ने अपनी राजनीति का तरीका बदला है. केजरवील प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की जगह दिल्ली में विकास की बात करते दिखते हैं. केजरीवाल लगातार दिल्ली के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं जिसमें मोहल्ला क्लीनिक, बेहतर शिक्षा, हाईटेक स्कूल में पेरेंट्स-टीचर मीटिंग, फ्री बिजली और फ्री पानी की बातें करते दिखे. दिल्ली में औपचारिक चुनाव प्रचार की शुरुआत भी केजरीवाल इन्हीं मुद्दों पर करते नजर आए. लेकिन पिछले चार-पांच दिनों से केजरीवाल दिल्ली की जनता में 'बेचारा' की छवि पेश करने में लगे हैं. आखिर चुनाव के बीच में ऐसा क्या हुआ कि केजरीवाल अपने उन मुद्दों के साथ-साथ बेचारा की छवि से चुनाव लड़ना चाहते हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (News18Hindi क्रिएटिव)


बीजेपी की रणनीति से ही बीजेपी को घेरने में लगे केजरीवाल
केन्द्रीय मंत्री और बीजेपी के दिल्ली प्रभारी प्रकाश जावडेकर ने अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी क्या कहा, केजरीवाल को बेचारा बनने का मौका मिल गया. पहले आप नेताओं ने, फिर खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने और अब उनके परिवार के सदस्यों ने दिल्ली की जनता से सवाल किया कि क्या आपका बेटा, आपका मुख्यमंत्री आतंकवादी है? साफ है केजरीवाल ने अपना बेचारा कार्ड खेल दिया, केजरीवाल ने बीजेपी के इस हमले को उसी तरह हथियार बना लिया जिस तरह पिछले दो चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. वह अपने ऊपर हुए हमले को ही अपना हथियार बना लेते हैं. तो क्या केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी बीजेपी के राजनीतिक हथियार के सहारे ही बीजेपी को दिल्ली में पटकनी देना चाहते हैं.

बेचारा बनने के पीछे ये है केजरीवाल का प्लान
अरविंद केजरीवाल की इस रणनीति को ठीक से समझें तो पाएंगे कि पिछले दो चुनावों में जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर चाय वाला और नीच जैसे शब्दों के जरिए हमला किया तो प्रधानमंत्री ने उस हमले को ही अपना हथियार बना लिया और जनता से इस मामले पर अपने पक्ष में खड़े होने की अपील की. कुछ-कुछ इसी तरह की रणनीति केजरीवाल भी दिल्ली चुनाव में अपनाते दिख रहे हैं. आतंकवाद के समर्थन के भाजपा के आरोप के बाद केजरीवाल जहां खुद अपने को बेचारा बनाने में लगे हैं वहीं पार्टी के और नेता विकास के मुद्दे पर बात कर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं. भारतीय राजनीति में बेचारा एक ऐसा शब्द है जो जिसके साथ लग जाता है उसकी चुनाव में सफलता की गारंटी हो जाती है. इंदिरा गांधी की मौत के बाद इसी बेचारे शब्द में राजीव गांधी को 400 से ज्यादा सीटें देकर प्रधानमंत्री बना दिया था और अब केजरीवाल भी इसी बेचारे शब्द से दिल्ली की राजनीति में अपनी नैया पार करने की जुगत में लगे हैं.

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First published: February 6, 2020, 2:24 PM IST
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