आख‍िर क्‍यों महामारी बनती जा रही है ब्‍लैक फंगस की बीमारी? 10 राज्‍यों के आंकड़े बयां कर रहे हैं सच्‍चाई

10 राज्‍यों में क्‍या है ब्‍लैक फंगस का हाल, जानें

10 राज्‍यों में क्‍या है ब्‍लैक फंगस का हाल, जानें

Black Fungus News: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस को लेकर सभी राज्यों को इसे महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहतअधिसूच्य बीमारी बनाने का आग्रह किया है. मंत्रालय ने राज्‍यों से कहा है क‍ि वह सभी मामलों की रिपोर्ट करें. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सभी सरकारी, निजी स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय और आईसीएमआर द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें.

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कोरोना के बाद अब राज्यों में ‘ब्लैक फंगस’ यानी म्यूकरमाइकोसिस के मामलों में वृद्धि हो रही है. अब केंद्र सरकार ने भी राज्यों से कहा है कि वह म्यूकर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस को महामारी रोग अधिनियम के तहत अधिसूचित करे. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत म्यूकर माइकोसिस को एक अधिसूच्य बीमारी बनाने का आग्रह किया है. इतना ही नहीं केन्‍द्र ने राज्यों से कहा है कि वह सभी मामलों की रिपोर्ट करें. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सभी सरकारी, निजी स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय और आईसीएमआर द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें. वहीं राजस्‍थान पहले ही ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर चुका है. वहीं कई राज्‍यों ने इससे न‍िपटने के ल‍िए अस्‍पतालों में वॉर्ड बना द‍िए हैं. मध्‍य प्रदेश में ब्लैक फंगस के मद्देनजर कोविड रोगियों की नेज़ल एंडोस्कोपी का अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है. वहीं ह‍िमाचल प्रदेश एक ऐसा राज्‍य है जहां ब्‍लैक फंगस का अभी तक एक भी मामला नहीं म‍िला है. यहां की राज्‍य सरकार ने इसको लेकर एक टीम गठ‍ित कर रही है जो इस पर नजर बनाए हुए है.

1- महाराष्‍ट्र में ब्‍लैक फंगस के सबसे ज्‍यादा केस

महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस से राज्य में 1500 केस पाए गए और 500 लोग ठीक हुए 850 पर इलाज चल रहा है. राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा क‍ि इंन्फोटेरेसिन बी के रोज 6 इंजेक्‍शन की जरूरत है और बीमारी की तीव्रता को देखते हुए इसका उत्पादन करने वाली कंपनियों को 1 लाख 90 हजार की ऑर्डर द‍िए गए है. इसका कंट्रोल भारत सरकार कर रही है. केंद्र सरकार इसे महाराष्ट्र को एलॉट करे इसके लिए भी हमने ग्लोबल टेंडर निकाला है. राज्‍य सरकार ने 9 पेज की गाइडलाइन डॉक्टरों को दी है. ब्लैक फंगस के लिए ENT, डेंटिस्ट आय स्पेशलिस्ट की व्यवस्था की जा रही है एक हजार अस्पताल में इलाज हो पाएंगे.

2- राजस्थान में महामारी घोष‍ित क‍िया, यहां ब्‍लैक फंगस के करीब 700 केस 
राजस्थान सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों में सामने आ रहे है म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) को महामारी घोषित कर दिया. राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है. अधिसूचना के मुताबिक कोरोना संक्रमण के प्रभाव के कारण म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि, ब्लैक फंगस के कोरोना वायरस संक्रमण के दुष्प्रभाव के रूप में सामने आने, कोविड-19 व ब्लैक फंगस का एकीकृत व समन्वित उपचार किए जाने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है. राजस्थान में करीब 100 मरीज ब्लैक फंगस से प्रभावित हैं. इनके उपचार के लिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में अलग से वार्ड बनाया गया है, जहां पूरे प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया जा रहा है लेकिन अपुष्ट आंकड़ों के मुताबिक करीब 700 से अधिक रोगी ब्लैक फंगस के राज्य में शिकार है.

3- उत्‍तर प्रदेश में लखनऊ और मेरठ में सबसे ज्‍यादा केस

उत्‍तर प्रदेश में भी ब्‍लैक फंगस के मरीजों की संख्‍या बढ़ रही है. यहां अब तक 250 केस सामने आ चुके है और 11 मरीजों की मौत हो चुकी है. ब्‍लैक फंगस के सबसे ज्‍यादा केस राजधानी लखनऊ में सामने आए है यहां 73 केस समाने आए हैं और सात मरीजों की मौत हो चुकी है. इसके बाद मेरठ में करीब 67 केस सामने आ चुके हैं और यहां चार मरीजों की मौत हो चुकी है. कानपुर में 50 और वाराणसी में 30 से ज्‍यादा केस सामने आ चुके हैं. ओरैया में एक और झांसी में पांच केस सामने आए हैं. यहां सरकार ने मेड‍िकल कॉलेज और ज‍िला अस्‍पताल में अलग से वॉर्ड बनाने के न‍िर्देश दे द‍िए हैं.



4- बिहार में म‍िल चुके है ब्‍लैक फंगस के 110 मरीज

बिहार में अब तक लगभग 110 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है,ब्लैक फंगस से मरनेवालों में अब तक एक मरीज की ही पुष्टि हुई है जो कि बेतिया मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ यूएस पांडेय जिनकी रुबन अस्प्ताल में मौत हुई है।वहीं आईजीआईएमएस में अबतक 10 मरीजों का ऑपरेशन हुआ है ,जबकि पटना एम्स में भी 15 मरीजों का अबतक ऑपरेशन हो चुका है।सरकार ने ब्लैक फंगस को लेकर आईजीआईएमएस और पटना एम्स को सेंटर ऑफ एक्सलेंस घोषित कर दिया है जहां अलग से वार्ड बनाये गए हैं और डॉक्टरों की टीम भी गठित की गई है।

5- क्‍या है द‍िल्‍ली में हाल और क्‍या है तैयारी?

ब्‍लैक फंगस के इस समय दिल्‍ली में करीब 200 मामले हैं. दिल्‍ली एम्‍स में 61 और सर गंगाराम अस्‍पताल में ब्‍लैक फंगस के 69 मरीजों को इलाज चल रहा है. हालांकि इससे पहले दिल्‍ली एम्‍स में ऐसी बीमारी के 12 से 15 मामले ही सामने आते थे. यही नहीं, दिल्‍ली एम्‍स और सर गंगाराम अस्‍पताल के अलावा मैक्‍स और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में ब्लैक फंगस के कई मरीज सामने आ चुके हैं. ब्लैक फंगस बीमारी के बढ़ते मामलों को लेकर मुख्‍यमंत्री अरव‍िंद केजरीवाल ने अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. इसमें बीमारी को बढ़ने से रोकने और जिनको ये बीमारी हो रही है उन्हें जल्द से जल्द बेहतर इलाज देने समेत इस बीमारी की रोकथाम और इलाज के लिए बैठक में कुछ अहम निर्णय लिए गए है. पहला ब्लैक फंगस के इलाज के लिए LNJP, GTB और राजीव गांधी अस्पताल में सेंटर बनाए जाएंगे. दूसरा इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का पर्याप्त मात्रा में प्रबंध और तीसरा बीमारी से बचाव के उपायों को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना.

6- हर‍ियाणा में भी 200 के करीब पहुंचे केस और 25 की मौत

हरियाणा में ब्लैक फंगस के अब तक 190 से ज्यादा केस आ चुके हैं. प्रदेश के विभिन्न जिलों में करीब 25 मरीजों की मौत हो चुकी है. हरियाणा सरकार ने ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए 15 मई को ब्लैक फंगस को अधिसूचित रोग घोषित कर दिया था. हरियाणा में ब्लैक फंगस के संक्रमण से बुधवार को चार की मौत हो गई और कई जिलों में नए मामले भी सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में अब तक रोहतक में 2, झज्जर में 2, सिरसा 5, गुरुग्राम 2, करनाल 3 की मौत ब्लैक फंगस के संक्रमण से हुई है। वहीं दो संदिग्ध मरीजों की मौत पानीपत जिले में हुई है. सिरसा जिले में अब तक 25 मरीज मिल चुके और पांच की मौत हो चुकी है. वहीं करनाल जिले में अब तक तीन की मौत हो चुकी है, इनमें से एक की मौत पंचकूला में हुई थी और 7 केस मिल चुके हैं। भिवानी जिले में ब्लैक फंगस के छह और मरीज मिलने से कुल संख्या 10 हो गई है. इनमें से आठ अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भर्ती है.

7- मध्‍य प्रदेश में म‍िल चुके हैं ब्‍लैक फंगस के करीब 600 मरीज

मध्‍य प्रदेश में 585 कोविड-19 का इलाज करवा रहे या ठीक हुए व्यक्तियों में दुर्लभ ब्लैक फंगस संक्रमण पाया गया है. वहीं प्रदेश सरकार ने ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोविड मरीजों की नेज़ल एंडोस्कोपी का अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है, ताकि ब्लैक फंगस बीमारी की प्राथमिक स्तर पर पहचान कर रोकथाम एवं त्वरित उपचार किया जा सके. बताया जा रहा है क‍ि इस अभियान के अंतर्गत, अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों की निःशुल्क नेज़ल एंडोस्कोपी की जा सकेगी. नेज़ल एंडोस्कोपी एक प्रक्रिया है जिससे एंडोस्कोप के जरिए नाक के अंदर की जांच की जाती है और पता लगाया जाता है कि साइनस मार्ग रूका हुआ तो नहीं है.

8- छत्‍तीसगढ़ में ब्‍लैक फंगस के 100 केस

छत्‍तीसगढ़ में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 100 के करीब और करीब एक मरीज की मौत हो चुकी है. वहीं 92 मरीजों का इलाज अस्‍पतालों में चल रहा है. बताया जा रहा है क‍ि सबसे ज्यादा 69 मरीज एम्स में भर्ती हैं और इनमें से 19 का ऑपरेशन हो चुका है. महासमुंद के निजी अस्पताल जैन नर्सिंग होम में ब्लैक फंगस के 6 मामले सामने आए थे, जिसमें 1 मरीज की मौत हो गई है और 1 मरीज को इलाज के लिए रायपुर एम्स रेफर किया गया था. वहीं सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले से संभाग का पहला ब्लैक फंगस का मामला सामने आया है.

9- उत्‍तराखंड में भी हो चुकी है दो मौत, उत्‍तरकाशी में आया था पहला केस

उत्‍तराखंड में ब्‍लैक फंगल से अब तक 40 से ज्‍यादा केस सामने आ चुके हैं और दो लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इसका पहला मामला उत्‍तरकाशी में सामने आया था. सरकार ने ऋषिकेश एम्‍स में ब्‍लैक फंगस के मरीजों के इलाज की व्‍यवस्‍था की गई है. इसको लेकर राज्‍य सरकार ने एसओपी भी जारी की है, ज‍िसमें इस बीमारी में इस्‍तेमाल होने वाले इंजेक्‍शन से लेकर दवाई तक की व्‍यवस्‍था सरकार करके देगी.

10- झारखंड में भी पहुंच चुका है ब्‍लैक फंगस अब तक चार की मौत

झारखंड में ब्लैक फंगस के अब तक 30 मरीज म‍िल चुके हैं और चार मरीजों की मौत हो चुकी है.

क‍िन कोरोना मरीजों को है ब्‍लैक फंगस का ज्‍यादा खतरा

दिल्‍ली एम्‍स में न्‍यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. एमवी पद्मा श्रीवास्‍तव ने बताया कि इस समय हमारे यहां ब्‍लैक फंगस के रोजाना 20 से ज्‍यादा मामले आ रहे हैं. वैसे तो यह डायबिटीज के मरीजों के साथ हाई स्‍टीरॉयड डोज लेने वालों में यह होता आया है, लेकिन इस तरह से मामले कभी नहीं बढ़े हैं. इसके साथ उन्‍होंने कहा कि पहले इनकी संख्‍या सिंगल डिजिट में होती थी और अस्‍पताल में एक अलग वार्ड बनाया गया है. उन्‍होंने कहा,'इस बात की आशंका है कि कमजोर इम्‍यूनिटी वालों को यह ज्‍यादा संक्रमित कर रहा है.'

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