Assembly Banner 2021

NCR News: जिस यमुना एक्सप्रेसवे पर फाइटर प्लेन उतरा, वह क्यों बन गया मौत का Expressway

ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किमी लंबा यमुना एक्सप्रेस-वे शुरुआत से हादसों के लिए चर्चित रहा है.

ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किमी लंबा यमुना एक्सप्रेस-वे शुरुआत से हादसों के लिए चर्चित रहा है.

यमुना एक्सप्रेस वे का सुरक्षा ऑडिट कराने के लिए सड़क सुरक्षा समिति ने आईआईटी दिल्ली को नियुक्त किया था. आईआईटी ने अपनी रिपोर्ट जेपी इंफ्राटेक को सौंप दी हैं. जेपी का निदेशक मंडल भंग होने पर आईआरपी ने निर्देश नहीं माने, इस पर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 9:36 AM IST
  • Share this:
ग्रेटर नोएडा. ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किमी लंबा यमुना एक्सप्रेस-वे शुरुआत से हादसों के लिए चर्चित रहा है. हादसों का सिलसिला जारी रहने पर सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने सुरक्षा आडिट कराने के निर्देश दिए थे. आईआईटी दिल्ली ने एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर मार्ग 330 किमी का सुरक्षा ऑडिट कर अपने सुझावों के साथ रिपोर्ट JP इंफ्राटेक को सौंपी थी, पर जेपी इंफ्राटेक का निदेशक मंडल भंग हो गया और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इनसाल्वेंसी रेज़ेलूशन प्रोफेशनल (IRP) नियुक्त कर दिया. ये देश का इकलौता एक्सप्रेस वे है, जहां पर फाइटर प्लेन उतारा गया था. यानी इसे इतना सुरक्षित माना गया था.

यमुना प्राधिकरण आईआईटी के सुझावों को लागू करने के लिए आईआरपी को कई बार निर्देश दे चुका है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई चार बैठकों में भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए आईआईटी के सुझावों को जल्द लागू कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आईआरपी ने कोई कदम नहीं उठाया. मुख्यमंत्री एवं यमुना प्राधिकरण के निर्देशों के पालन में लगातार लापरवाही से नाराज सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बुधवार को आईआरपी और आइएमसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दे दिए.

इसलिए कहते हैं मौत का एक्सप्रेस वे


यमुना एक्सप्रेस वे पर हादसों को देखते हुए लोग इसे मौत का एक्सप्रेस वे भी कहते हैं. यह देश का ऐसा एक्सप्रेस वे है जहां आए दिन बड़ी-बड़ी घटनाएं होती रहती हैं. नया हादसा मंगलवार का है जिसमें एक भारी वाहन ने स्कॉर्पियो को टक्कर मार दी जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और दो घायल हैं. स्कॉर्पियो में 5 लोग सवार थे. स्कॉर्पियो गाड़ी गोरखपुर से दिल्ली आ रही थी. एक्सप्रेस वे के साबुता इंटरचेंज पर एक भारी वाहन ने डिवाइडर तोड़ कर सड़क के उस पार आ रही स्कॉर्पियो को टक्कर मार दी. हादसे में मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं.

क्रैश बीम बैरियर लगाने का सुझाव


आईआईटी की सुरक्षा समिति ने हादसों को रोकने के लिए एक्सप्रेस-वे के दोनों रास्तों के बीच क्रैश बीम बैरियर लगाने का सुझाव दिया था. मंगलवार रात मथुरा क्षेत्र में हुए हादसे में सात लोगों की मौत की मुख्य वजह यही थी. क्रैश बीम बैरियर लगाने पर करीब 90 करोड़ रुपए खर्च होंगे. वहीं एक्सप्रेस-वे पर स्पीड कैमरे, गन की संख्या बढ़ाने, दोनों किनारों पर लगे क्रैश बीम बैरियर की ऊंचाई बढ़ाने, पर्याप्त संख्या में साइनेज, डिस्प्ले बोर्ड, रिफ्लेक्टिग टेप, रंबल स्ट्रिप आदि लगाने के सुझाव दिए गए हैं. इन सुझाव को लागू करने में करीब ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है.


100 किमी है अधिकतम रफ्तार


यमुना एक्सप्रेस-वे पर फास्टैग लागू करने में भी लापरवाही हो रही है. पंद्रह फरवरी से देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर सभी लेन फास्टैग हो गई हैं. सीईओ ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर भी फास्टैग लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इनका भी पालन नहीं हुआ. यमुना एक्सप्रेस-वे पर हल्के वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा व भारी वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय है. यमुना एक्सप्रेस-वे पर जनवरी में ही 15 लोग जान गंवा चुके हैं. पिछले साल एक्सप्रेस-वे पर 128 मौतें हुई थीं. पिछले 5 साल में हर साल 100 से 150 लोग यहाँ सड़क हादसों में मारे जाते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज