क्या कोरोना की तीसरी लहर में भी काम आएंगे दूसरी लहर में मिले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर? जानें एक्सपर्ट की राय

कोरोना की दूसरी लहर में अस्पतालों को जो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मिले थे, उसको लेकर अब क्यों सवाल उठने लगे हैं? (फाइल फोटो)

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों को मिले अधिकांश ऑक्सीजन कंसंट्रेटर किसी काम के नहीं है. एक्सपर्ट का कहना है कि विधायक निधि, सांसद निधि या अन्य दानवीरों ने जो कंसंट्रेटर दिए हैं, उनमें से अधिकांश की क्षमता 5 LPM की है, जबकि जरूरत 10 LPM के कंसंट्रेटर की है.

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नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों को जो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (Oxygen Concentrator) मिले थे, उसको लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. 24 घंटे पहले ही राजस्थान के गंगापुर में एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर फट जाने से पत्नी की मौत हो गई, तो पति जिंदगी और मौत से अभी भी अस्पताल में जूझ रहा है. अगर बात दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की करें तो यहां के सरकारी अस्पतालों को मिले ज्यादातर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की पैकिंग अभी तक नहीं खुली है. हां, जिन ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की पैकिंग खुल भी गई है, वह ऐसे ही अस्पताल के एक कोने में पड़े हैं.

मेडिकल एक्सपर्ट का कहना है कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों को मिले अधिकांश कंसंट्रेटर किसी काम के नहीं है. कोरोना मरीजों को 10 एलपीएम (Litres Per Minute) क्षमता वाले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर चाहिए, लेकिन विधायक निधि, सांसद फंड, अन्य मदों या फिर दानवीरों ने जो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर अस्पतालों को दिए हैं, उनमें से अधिकांश की क्षमता 5 एलपीएम की है. कोरोना के गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को हाई फ्लो वाली ऑक्सीजन की जरूरत होती है. तेज फ्लो से ही ऑक्सीजन फेफड़ों के जरिए ब्लड तक पहुंचती है. 5 एलपीएम ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कम फ्लो पैदा करती है. इससे ऑक्सीजन ब्लड तक नहीं पहुंच पाती है.

गाजियाबाद के अस्पतालों का ये है हाल
अगर बात गाजियाबाद की करें तो मई के अंतिम सप्ताह तक स्वास्थ्य विभाग और यहां के अस्पतालों को तकरीबन 255 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मिले हैं. इनमें तकरीबन 100 कंसंट्रेटर अभी भी स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में ही रखे हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन 255 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में से महज 30 कंसंट्रेटर ही 10 एलपीएम क्षमता के हैं. ये 30 ऑक्सजीन कंसंट्रेटर विभाग के द्वारा ही खरीदे गए थे.

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तेज फ्लो से ही ऑक्सीजन फेफड़ों के जरिए ब्लड तक पहुंचती है और 5 एलपीएम ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कम फ्लो पैदा करती है.


दिल्ली के सरकारी अस्पतालों का क्या है हाल
यही हाल दिल्ली सरकार के कई सरकारी अस्पतालों का भी है. अगर बात करें दिल्ली सरकार के सबसे बड़े कोविड अस्पताल एलएनजेपी की तो यहां पर तो अब ऑक्सीजन प्लांट चालू हो गया है, लेकिन इस अस्पताल में भी 5 एलपीएम वाले कई ऑक्सीजन कंसंट्रेटर वैसे पैक पड़े हैं. कमोबेश यही हाल दिल्ली के अन्य सभी सरकारी अस्पतालों का भी है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉ अमित कुमार कहते हैं, 'देखिए 5 एलपीएम वाले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का फ्लो बहुत कम होता है. इसकी जरूरत केवल उन मरीजों की होती है, जिनका ऑक्सीजन लेवल थोड़ा ही कम होता है. लेकिन, ऑक्सीजन लेवल 88-90 से नीचे आ जाए तो 5 एलपीएम ऑक्सीजन कंसंट्रेटर काम नहीं करता. सामान्य मरीजों के लिए यह ठीक है लेकिन गंभीर मरीजों के लिए इनका कोई मतलब नहीं है. हालांकि, तीसरी लहर में जरूरत पड़ने पर इसका भी प्रयोग किया जा सकता है. अधिकांश कोरोना मरीजों को 10 एलपीएम क्षमता वाले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर चाहिए, लेकिन विधायक निघि फंड, सांसद निधि फंड या अन्य मदों या फिर दानवीरों ने जो ऑक्सीजन कंसंट्रेटरअस्पतालों को दी है उनमें से अधिकांश की क्षमता 5 एलपीएम है. कोरोना के गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को हाई फ्लो वाली ऑक्सीजन की जरूरत होती है. तेज फ्लो से ही ऑक्सीजन फेफड़ों के जरिए ब्लड तक पहुंचती है और 5 एलपीएम ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर कम फ्लो पैदा करती है.'

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कोरोना मरीज को जब सांस लेने में दिक्कत शुरू होती है तो ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है.


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कोरोना मरीज को जब सांस लेने में दिक्कत शुरू होती है तो ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है. कोरोना की दूसरी लहर में देश में ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद देश-विदेश से भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर आयात किए गए और निजी अस्पतालों ने बड़े पैमाने पर इसकी खरीदारी भी की. कुछ लोगों ने अपने घरों के लिए भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदे हैं. देश के बड़े शहरों के अस्पतालों में तो ऑक्सीजन प्लांट लग गया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में कोरोना की तीसरी संभावित लहर को देखते हुए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की जरूरत पड़ सकती है.

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