दिल्ली हिंसा: हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या में महिला की जमानत अर्जी कोर्ट से खारिज

हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला.

हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला.

दिल्ली की कडक़डड़ूमा कोर्ट ने हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या (Murder) के मामले की आरोपी महिला के खिलाफ गंभीर आरोपों और सबूतों को दृष्टिगत रखते हुए की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. 

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 11, 2021, 10:15 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट इलाके में पिछले साल हुई हिंसा (Delhi Violence) के दौरान हेड कांस्टेबिल की हत्या की आरोपी महिला कीक जमानत याचिका खारिज हो गई है. कडक़डड़ूमा कोर्ट ने हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले की आरोपी महिला के खिलाफ गंभीर आरोपों और सबूतों को दृष्टिगत रखते हुए की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. कडक़डड़ुमा कोर्ट के जज विनोद यादव ने चांद बाग निवासी तबस्सुम की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. जमानत अर्जी खारिज करते हुए जज ने माना है कि मोबाइल फोन की सीडीआर (CDR) से यह अहम खुलासा हुआ है कि वह कई से सह आरोपियों के लगातार संपर्क में थी. मामले की सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं. उन्होंने कहा कि अपराध की गंभीरता के साथ मामले के सभी तथ्य और परिस्थितियों पर विचार करते हुए महिला को जमानत देने का यह सही मामला नहीं बनता है. इसी को आधार बनाते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा की पूरी तरह स्पष्ट है कि प्रदर्शनकारियों और आयोजकों ने भीड़ में शामिल लोगों को उकसाया. कुछ शरारती तत्वों ने घटनास्थल को घेर लिया. वे पत्थरों धारदार हथियारों और अन्य तरह के हथियारों के साथ पूरी तरह लैस प्रतीत दिखे थे . उन्होंने कहा कि यहां तक कि एक बुर्कानसी महिला भी पुलिस दल पर क्षणों जैसी चीजों से हमला करती हुई स्पष्ट रूप से दिखी है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि रिकॉर्ड में यह भी आया है कि भीड़ में से कुछ लोगों ने 25 फुट चौड़ी सडक़ के आसपास स्थित ऊंची इमारतों की छतों पर कब्जा कर लिया, जिनके पास आग्नेयास्त्र

और दंगे में इस्तेमाल की जाने वाली अन्य चीजें भी थीं. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि सब कुछ एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया जिसका मकसद वजीराबाद रोड को अवरुद्ध करना और पुलिसकर्मियों द्वारा रोके जाने पर उन पर हमला करने का था.

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जमानत याचिका का विरोध

वही मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि तबस्सुम ने प्रदर्शनकारियों के साथ मंच साझा भी किया. लोगों को सरकार के खिलाफ भडक़ाया. इसका परिणाम उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को दंगा भडक़ाने के रूप में निकला, जिसमें कांस्टेबल रतन लाल सहित 50 से अधिक लोग मारे गए. अभियोजन के अनुसार घटना के दौरान पुलिस उपायुक्त (शहादरा) अमित शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त (गोकलपुरी) अनुज कुमार समेत अन्य 51 पुलिसकर्मियों को भी दंगाइयों ने घायल कर दिया था.
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