World Sparrow Day 2021: पढ़‍िए आर्टिफिशियल घोंसलों में गौरैयाओं को पालने वाले योगेंद्र की कहानी, राष्‍ट्रपति भी दे चुके सम्‍मान

World Sparrow Day: पिछले सात साल से गौरैयाओं के  लिए घर बनवाकर उन्‍हें पाल रहे हैं तिहाड़ जेल के कर्मचारी योगेंद्र.

World Sparrow Day: पिछले सात साल से गौरैयाओं के लिए घर बनवाकर उन्‍हें पाल रहे हैं तिहाड़ जेल के कर्मचारी योगेंद्र.

विश्‍व गौरैया दिवस 2021: योगेंद्र कुमार बताते हैं कि गौरैया के लिए वे हर साल करीब पांच हजार आर्टिफिशियल घोंसले बनवाते हैं. अभी तक वे दिल्‍ली में करीब 25 से 30 हजार घोंसले लगा चुके हैं. ये घोंसले घरों में बनने वाले फर्नीचर की बची हुई कतरनों से बनते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2021, 10:58 AM IST
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नई दिल्‍ली. आज पूरा विश्‍व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) मना रहा है हालांकि भारत में गौरैया हमेशा से ही सबसे प्‍यारी और चहेती चिड़‍िया रही है साथ ही दिल्‍ली राज्‍य का राजकीय पक्षी भी है. एक समय ऐसा आया कि गांवों में घरों के आंगन में आकर दाना चुगने वाली गौरैया (Gauraiya) धीरे-धीरे विलुप्‍त होती चली गई. हालांकि दिल्‍ली के रहने वाले योगेंद्र कुमार एक ऐसे शख्‍स हैं जो पिछले कई सालों से इस शहर में गौरैया को बसाने का काम कर रहे हैं.

दिल्‍ली की तिहाड़ जेल (Delhi Tihar Jail) में हेड वार्डर योगेंद्र कुमार अपनी नौकरी के साथ-साथ पिछले सात साल से गौरैयाओं को आर्टिफिशियल घोंसलों में पाल रहे हैं. उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि दिल्‍ली की मंडोली जेल (Mandoli Jail) में जहां कभी सिर्फ 40-50 गौरैया दिखाई देती थीं वहां अब हजारों की संख्‍या में इन चिड़ि‍यों ने अपना बसेरा कर लिया है. साथ ही दिल्‍ली के कई इलाकों में अब गौरैया की चहचहाहट आसानी से सुनी जा सकती है.

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योगेंद्र कुमार ने मंडोली जेल में घोंसले लगवाकर और देखभाल करके गौरैयाओं की संख्‍या हजारों में पहुंचा दी है.


न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में योगेंद्र कुमार बताते हैं कि गौरैया के लिए वे हर साल करीब पांच हजार आर्टिफिशियल घोंसले (Artificial Nests) बनवाते हैं. अभी तक वे दिल्‍ली में करीब 25 से 30 हजार घोंसले लगा चुके हैं. ये घोंसले घरों में बनने वाले फर्नीचर की बची हुई कतरनों से बनते हैं. इसके लिए वे लोगों से फर्नीचर की कतरनें इकठ्ठी करते हैं और अपने खास बढ़ई से घोंसले बनवाते हैं. जिन्‍हें दिल्‍ली में कई जंगलों, पार्कों, सड़क किनारों या ऐसी जगहों पर लगा दिया जाता है जहां गौरैया (Sparrow) के आने की संभावना रहती है.
योगेंद्र बताते हैं कि गौरैया के घोंसलों की शुरुआत उन्‍होंने जूते-चप्‍पलों के डिब्‍बों से की थी. इन डिब्‍बों में घास और तिनके रखकर कई जगहों पर लगाए और जब इनमें गौरैया आने लगीं तो उनके लिए लकड़ी के घर बनवाना शुरू किया.

गौरैयाओं के लिए जूते के डिब्‍बों के अलावा कवर बॉक्‍स से बनाया गया घर.
गौरैयाओं के लिए जूते के डिब्‍बों के अलावा कवर बॉक्‍स से बनाया गया घर.


वे कहते हैं कि दिल्‍ली में दाना-पानी की कमी होने के साथ ही घोंसले बनाने के लिए तिनके भी नहीं मिल पाते शायद इसीलिए गौरैया यहां से पलायन कर गई. हालांकि अब वे जो घोंसले बनवाते हैं उन्‍हें ऐसी जगहों पर लगवाते हैं जहां आसपास लोग दाना डाल देते हैं और पानी का भी इंतजाम रहता है.



इनके साथ ही हर साल दिल्‍ली में जगह-जगह पर गौरैया और अन्‍य पशु-पक्षियों को बचाने और उनके सर्वाइव करने की व्‍यवस्‍थाएं करने की जानकारी देते हुए कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं. योगेंद्र कहते हैं कि अब लोग गौरैया को लेकर जागरुक भी हैं और मदद करने के लिए भी तैयार रहते हैं.

गौरैया के लिए ये जगहें ली हैं गोद

गौरैया दिल्‍ली का राजकीय पक्षी भी है.
गौरैया दिल्‍ली का राजकीय पक्षी भी है.


योगेंद्र कुमार ने गौरैया के लिए दिल्‍ली की मंडोली जेल, टैगोर गार्डन पार्क, रघुबीर नगर पार्क और राजा गार्डन को पूरी तरह गोद ले लिया है. तिहाड़ जेल जाने से पहले योगेंद्र इन जगहों पर जाते हैं और गौरैयाओं के लिए सभी सुविधा करते हैं. वे बताते हैं कि सात साल से लगातार काम करने के कारण अब बहुत सारे लोग इस विलुप्‍त होती चिड़िया को बचाने के लिए आगे आने  लगे हैं. लोग अब उनसे खुद ही कहते हैं कि इन घोंसलों का ध्‍यान रख लेंगे. ऐसे में अधिकांश जगहों पर लोग वॉलंटियर की तरह काम कर रहे हैं.

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