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Delhi Violence: अदालत ने कहा- विचाराधीन कैदियों के निर्दोष होने की धारणा को मीडिया ट्रायल से खत्म करना गलत

दिल्ली दंगों को लेकर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है. (File)
दिल्ली दंगों को लेकर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है. (File)

Delhi News: जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की एक याचिका पर शुक्रवार को अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत में ‘‘निर्दोष होने की धारणा’’ को मीडिया ट्रायल से समाप्त नहीं किया जाना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 10:23 PM IST
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दिल्ली. जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद (Umar Khalid) की एक याचिका पर शुक्रवार को अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत में ‘‘निर्दोष होने की धारणा’’ को मीडिया ट्रायल से समाप्त नहीं किया जाना चाहिए. याचिका में उसने आरोप लगाया कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुए दंगों (Delhi Riots) में उसके खिलाफ ‘‘विद्वेषपूर्ण मीडिया अभियान’’ चलाया गया. अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि जिस मामले में जांच चल रही है या सुनवाई चल रही है उसमें रिपोर्टिंग करते समय मीडिया ‘‘स्वनियमन तकनीक’’ का अनुसरण करेगा. मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेटट दिनेश कुमार ने कहा, ‘स्वनियमन नियमन का बेहतर प्रारूप है.’


उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में प्रेस और समाचार मीडिया को ‘‘चौथा स्तंभ’’ बताया जाता है, लेकिन अगर वे अपना काम सावधानी से करने में विफल रहते हैं तो पूर्वाग्रह का खतरा पैदा हो जाता है और इसी तरह का खतरा है ‘मीडिया ट्रायल’. खालिद की तरफ से पेश याचिका में दावा किया गया है कि मीडिया की खबरों में यह दिखाने के लिए उसके कथित खुलासा वाले बयान का हवाला दिया गया है कि उसने दंगों में अपनी संलिप्तता के बारे में स्वीकार किया है और निष्पक्ष सुनवाई के उसके अधिकार के प्रति पूर्वाग्रह है.

अदालत ने की ये टिप्पणी

खालिद ने अदालत से कहा था कि कथित खुलासा वाले बयान के नीचे लिखा गया था कि आरोपी इस पर दस्तखत करने से इंकार करता है. यह बयान उसके खिलाफ आरोपपत्र का हिस्सा बनाया गया. अदालत ने मीडिया की खिंचाई करते हुए कहा कि संवाददाता के पास कानून की मूलभूत जानकारी होनी चाहिए क्योंकि पाठक/दर्शक समाचार के तथ्यों को परखे बगैर इसे सच मानते हैं. अदालत ने कहा, ‘साथ ही आम आदमी को उपरोक्त वर्णित कानून के बारे में जानकारी नहीं हो सकती है. इसलिए यह प्रेस और मीडिया का कर्तव्य है कि समाचार चैनल पर दिखाए जाने वाले या प्रकाशित की वाली खबरों की परिस्थितियों और संबंधित तथ्यों के बारे में अपने पाठकों और दर्शकों को सूचित करे और उन्हें जानकारी दे.’
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कोर्ट ने दिया अहम निर्देश

दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्रा एवं पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलिता की याचिका पर तिहाड़ जेल अधीक्षक को उपस्थित होने का शुक्रवार को निर्देश दिया. कलिता ने याचिका के जरिए जेल से अपने वकील को कुछ ‘नोट’ (टिप्पणी) एक बंद लिफाफे में सौंपने की अनुमति देने का अनुरोध किया है. उन्होंने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में अपने खिलाफ अदालत में दाखिल आरोपपत्र से ‘नोट’ तैयार किये हैं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जेल अधीक्षक को विधिक अधिकारी के साथ 23 जनवरी को उपस्थित होने का नोटिस जारी किया.
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