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यासीन मलिक के गुनाहों का हिसाब पूरा; NIA ने फांसी देने की मांग की, 3.30 बजे सजा का ऐलान

यासीन मलिक को कोर्ट पहले ही दोषी करार दे चुकी है.

यासीन मलिक को कोर्ट पहले ही दोषी करार दे चुकी है.

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सजा की अवधि पर आज यानी बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली. कोर्ट साढ़े तीन बजे यासीन मलिक की सजा पर अपना फैसला सुनाएगा. सुनवाई के दौरान एनआईए ने यासीन मलिक को फांसी देने की मांग की.

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नई दिल्ली: टेरर फंडिंग केस में दोषी करार दिए जा चुके अलगाववादी यासीन मलिक को आज उसके गुनाहों की सजा मिल सकती है. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सजा की अवधि पर आज यानी बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली. अब कोर्ट साढ़े तीन बजे (3.30 बजे) यासीन मलिक की सजा पर अपना फैसला सुनाएगा. सुनवाई के दौरान एनआईए ने यासीन मलिक को फांसी देने की मांग की. इससे पहले यासीन को भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया. बता दें कि जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक को पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोषी करार दिया था और यासीन ने आतंकवाद के वित्त पोषण के एक मामले में सभी आरोप स्वीकार कर लिये थे, जिनमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आरोप भी शामिल हैं.

गौरतलब है कि पटियाला हाउस कोर्ट के स्पेशल जज प्रवीण सिंह ने 19 मई को मलिक को दोषी करार दिया था और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को उसकी वित्तीय स्थिति का आकलन करने को कहा था, ताकि उस पर लगाये जा सकने वाले जुर्माने को निर्धारित किया जा सके. इतना ही नहीं, कोर्ट ने यासीन मलिक को भी अपनी संपत्ति के बारे में एफिडेविट देने को कहा था. बताया जा रहा है कि यासीन मलिक को अधिकतम सजा के तौर पर मृत्युदंड, जबकि न्यूनतम सजा के तौर पर उम्र कैद सुनाई जा सकती है.

यासीन ने स्वीकार किए थे सभी आरोप
जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मलिक ने अदालत में कहा था कि वह खुद के खिलाफ लगाए आरोपों का विरोध नहीं करता. इन आरोपों में यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य), 17 (आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाना), 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश) और धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) और 124-ए (राजद्रोह) शामिल हैं. बता दें कि जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यूएपीए के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है.

यासीन के अलावा कौन-कौन हैं दोषी
अदालत ने पूर्व में, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, शब्बीर शाह, मसरत आलम, मोहम्मद युसूफ शाह, आफताब अहमद शाह, अल्ताफ अहमद शाह, नईम खान, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा मेहराजुद्दीन कलवल, बशीर अहमद भट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल राशिद शेख तथा नवल किशोर कपूर समेत कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे.

टेरर फंडिंग का है मामला
लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिन्हें मामले में भगोड़ा अपराधी बताया गया है. यह मामला हाफिज सईद और हुर्रियत कांफ्रेंस के सदस्यों सहित अलगवावादी नेताओं की कथित साजिश से संबंधित है, जिन्होंने प्रतिबंधित आतंकी संगठन – हिजबुल मुजाहिदीन, दुख्तरान ए मिल्लत, लश्कर ए तैयबा – और अन्य के सक्रिय सदस्यों के साथ हवाला सहित विभिन्न अवैध माध्यमों से देश-विदेश से धन जुटाने की साजिश रची थी.

जानें पूरा केस
यह धन जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों और कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव करने, स्कूलों को जलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के कृत्य के लिए था. एनआईए के मुताबिक, जांच से यह स्थापित हुआ है कि यासीन मलिक जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिवधियों में संलिप्त था. मामले में शेष आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी है. (इनपुट भाषा से)

Tags: Delhi news

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