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Solar Scheme: रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट लगाकर आप भी बचा सकते हैं बिजली का बिल, जानें BSES ने कैसे बचाए 68 करोड़ !

बीएसईएस रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है. (File Photo Pixabay)
बीएसईएस रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है. (File Photo Pixabay)

Solar Scheme: दिल्ली भर में बीएसईएस अपने इलाकों में रूफटॉप सौर ऊर्जा के तहत कुल 106 मेगावाट यानी 1.6 लाख किलो वाट बिजली का उत्पादन कर चुकी है. बीएसईएस उपभोक्ताओं के लिये अब तक सौर ऊर्जा के 3000 से अधिक प्लांट लगा चुकी हैं जिससे उपभोक्ताओं की 68 करोड रुपए की बचत हुई है. कंपनी अब आने वाले समय में 1000 से ज्यादा सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की तैयारी में है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 6:04 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली में जिस तरह से पावर की डिमांड पीक पर रहती है. ऐसे में निजी बिजली कंपनी बीएसईएस अपने अधीनस्थ इलाकों में रूफटॉप सौर ऊर्जा (Rooftop Solar Power) को बढ़ावा देकर इसको पूरा करने का भी बड़ा अभियान छेड़े हुये है.


दिल्ली भर में अब तक बीएसईएस  (BSES) ने अपने इलाकों में रूफटॉप सौर ऊर्जा के तहत कुल 106 मेगावाट यानी 1.6 लाख किलो वाट बिजली का उत्पादन कर चुकी है. बीएसईएस उपभोक्ताओं के लिये अब तक सौर ऊर्जा के 3000 से अधिक प्लांट लगा चुकी हैं जिससे उपभोक्ताओं की 68 करोड रुपए की बचत हुई है. कंपनी अब आने वाले समय में 1000 से ज्यादा सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की तैयारी में है.


इन उपभोक्ताओं में 1805 घरेलू उपभोक्ता हैं, जबकि 655 शैक्षिक संस्थाएं, 554 व्यावसायिक इकाइयां, 35 औद्योगिक इकाइयां और 91 अन्य श्रेणियों के उभोक्ता हैं. बीएसईएस ने इन प्लांट्स को नेट मीटरिंग के माध्यम से अनेक ग्रिडों से जोड़ दिया है.


छतों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने से इन उपभोक्ताओं को सालाना कुल 68 करोड़ रूपये की आर्थिक बचत हो रही है. करोड़ों की यह बचत ग्रिड की पारंपरिक बिजली का बिल्कुल इस्तेमाल न करने या कम करने की वजह से हो रही है. साथ ही, ग्रिड की बिजली की कम खपत करने से, इनमें से ज्यादातर उपभोक्ता, दिल्ली सरकार (Delhi Government) द्वारा बिजली पर दी जा रही सब्सिडी के दायरे में भी आ गए हैं. गौरतलब है कि जिन उपभोक्ताओं ने रूफटाॅप सोलर पैनल लगाए हैं. उनके बिजली बिल में भारी कमी देखने की मिल रही है.




वित्त वर्ष 2021-22 में बीएसईएस ने 1000 और रूफटाॅप सौर ऊर्जा प्लांटों को एनर्जाइज करने का लक्ष्य रखा है. उल्लेखनीय है कि घरेलू समेत शैक्षिक व धार्मिक संस्थाओं, रेलवे स्टेशन (Railway Station), मेडिकल काॅलेज, जेल, आदि तमाम श्रेणियों के उपभोक्ताओं ने सोलर पावर प्लांट्स लगाए हैं.


बीएसईएस प्रवक्ता के मुताबिक, समावेशी विकास की दिशा में सौर ऊर्जा काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. राष्ट्रीय राजधानी में इसकी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए बीएसईएस लगातार प्रयास कर रही है. इस कड़ी में बीएसईएस के सोलर सिटी और सोलराइज प्रोजेक्ट्स गेम चेंजर साबित होंगे. बीएसईएस के सोलर प्रोजेक्ट्स, उपभोक्ता और डिस्काॅम के साथ साथ पर्यावरण के लिए भी काफी लाभदायक हैं.


बीएसईएस ने सौर ऊर्जा के जिन प्लांट्स को नेट मीटरिंग से जोड़ा है, उनमें 1 किलोवाॅट से 2000 किलोवाॅट तक के सैंक्शंड लोड वाले प्लांट्स हैं. उपभोक्ताओं को अब बिजली बिल में कमी के रूप में, सौर ऊर्जा नेट मीटरिंग का लाभ मिलना शुरू हो चुका है. सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं ने बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ी है.



इस स्कीम में लगवा सकते हैं सौर ऊर्जा पैनल्स

सेलर पैनल्स लगवाने के लिए दो माॅडल्स उपलब्ध हैं इनमें रेस्को और कैपेक्स माॅडल शामिल हैं. रेस्को माॅडल के तहत पैनल लगवाने पर उपभोक्ता को तुरंत अपनी ओर से कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता, इसका खर्च वेंडर द्वारा वहन किया जाता है.


केंद्र सरकार के नवीन व अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New & Renewable Energy) की फेज-2 गाइडलाइन अब उपभोकताओं के लिए उपलब्ध है. अब एक घरेलू उपभोक्ता को सौर ऊर्जा पैनल्स लगाने के लिए 40 प्रतिशत तक की कैपिटल सब्सिडी मिल सकती है. यह सोलर के लोड पर निर्भर करेगा.


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