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Lockdown: ओखला का यह ग्रुप जामिया के 55 गैर मुस्लिम छात्रों को हर रोज पहुंचा रहा है खाना

इफ्तारी का सामान.

इफ्तारी का सामान.

मोबाइल (Mobile) नंबर पर दोपहर एक बजे से शाम 4 बजे तक खाने की डिमांड नोट की जाती है. उसके बाद एक-एक जरूरतमंद के दरवाजे तक खाने के पैकेट (Food Packet) पहुंचाए जाते हैं.

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    नई दिल्ली. ओखला (Okhla) और उससे सटे 8 इलाकों में लॉकडाउन (Lockdown) के पहले दिन से ही लगातार जरूरतमंदों को खाना बांटा जा रहा है. 100 लोगों के खाने से शुरु हुआ यह सिलसिला अब 650 लोगों तक पहुंच चुका है. जसोला विहार के पास रहने वाले जामिया यूनिवर्सिटी (Jamia University) के 55 गैर मुस्लिम छात्रों को भी रोज़ाना खाना पहुंचाया जा रहा है. रमज़ान (Ramzan) शुरु होने के बाद से तो अब खाने के साथ इफ्तार का सामान भी पहुंचाया जा रहा है. मोबाइल नंबर पर दोपहर एक बजे से शाम 4 बजे तक खाने की डिमांड नोट की जाती है. उसके बाद एक-एक जरूरतमंद के दरवाजे तक खाने के पैकेट पहुंचाए जाते हैं.

    9 लोगों ने ऐसे शुरु की फूड ड्राइव

    ओखला के रहने वाले अतीफ रशीद, सईद अहमद, इरशाद खान, फहीम अख्तर, मो. नदीम, इमरान खान, सय्यद जुनैद, निहाल अहमद और मेहेर आलम ने मिलकर लॉकडाउन के दूसरे दिन से फूड ड्राइव की शुरुआत कर दी थी. शुरुआत के 5-6 दिन तक तो करीब 100 का खाना बनाकर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया. लेकिन उसके बाद आंकड़ा बढ़ने लगा.

    इसे देखते हुए खाने का सामान भी बढ़ाया गया. ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक खाना पहुंच जाए इसके लिए एक मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर जारी किया गया. साथ ही कहा गया कि जरूरतमंद लोग इस नंबर पर दोपहर एक बजे से शाम 4 बजे तक खाने की डिमांड नोट करा सकते हैं. एक कॉल पर सिर्फ दो पैकेट का आर्डर ही लिया जाता है.

    खाना पैक कराते अतीफ रशीद.


    अतीफ रशीद बोले- इस कॉल ने हमे झकझोर दिया

    फूड ड्राइव में लगे अतीफ रशीद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी हैं. उन्होंने बताया कि हमे ड्राइव शुरु किए एक-दो दिन ही हुए थे कि हमे एक कॉल आई. कॉल करने वाले ने कहा हमें खाने की जरूरत है. खाना लेकर मैं खुद गया. यह जसोला विहार के पास का एक इलाका है. वहां जाकर पता चला कि यहां खाने के जरूरतमंद कोई दो-चार लोग नहीं है.

    जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के करीब 62 छात्र अलग-अलग फ्लैट लेकर किराए पर रह रहे हैं. किसी तरह से मैगी और अंडा-ब्रेड खाकर काम चला रहे हैं. लेकिन उनका कहना था कि इससे हमारा पेट नहीं भरता. हमे रोटी या चावल चाहिए. इसमे देश के अलग-अलग राज्यों के 55 नॉन मुस्लिम बच्चे भी थे. बस उसी दिन से हर रोज़ शाम को इन्हें खाना पहुंचाया जा रहा है. इसके साथ ही जसोला, ग़फ़्फ़ार मंज़िल, हाजी कॉलोनी, नूर नगर, ओखला विहार, जोहरी फार्म मसीह गढ़ और जुलेना तक खाना पहुंचाया जा रहा है.

    पैक होता तैयार खाना.


    रोज़ चावल देखकर सोशल मीडिया वालों ने भेजी रोटी

    अतीफ रशीद ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए हम आसानी से मिलने और बनने वाला चावल बनाकर भेजते हैं. लेकिन कई बार सोशल मीडिया पर जानने वालों ने तंज किया कि रोज़-रोज़ चावल खिलाकर परेशान करोगे किसी को. तो हमने भी कह दिया कि रोटी आप भेज दो. फिर क्या था उन साहब का फोन आ गया. उन्होंने खाने वालों की संख्या पूछी और 1200 रोटी भेज दी. हमने भी उसके साथ कभी दाल मखनी तो कभी दाल तड़का बनाकर भेज दी. अब तक तीन-चार लोग रोटी भेज चुके हैं. अब इफ्तार में उबले हुए छोले, पकोड़े और खजूर भेजे जा रहे हैं.
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