यहां पढ़िए क्यों कम होता है नवंबर से जनवरी के बीच पैदा होने वाले बच्चों का कद?

एन्वायरमेंटल हेल्थ जर्नल की रिपोर्ट में IIT दिल्ली के प्रोफेसर साग्निक डे का दावा है कि बढ़ते प्रदूषण से बच्चों की हाइट कम हो रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कुपोषित और कमज़ोर बच्चों पर प्रदूषण का प्रभाव शहरी बच्चों की अपेक्षा ज्यादा तेजी से हो रहा है.

Rachna Upadhyay
Updated: July 13, 2019, 9:27 PM IST
Rachna Upadhyay
Rachna Upadhyay
Updated: July 13, 2019, 9:27 PM IST
बढ़ता प्रदूषण कहीं आपके बच्चे की हाइट कम ना कर दे, ये लिखा है IIT दिल्ली के एनवायरमेंटल हेल्थ जर्नल में पेश की गई रिपोर्ट में. इस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में प्रदूषण के कारण बच्चों का कद कम हो रहा है. बच्चों की सेहत और कद पर ये असर खासतौर पर उन महीनों में ज्यादा होता है जब प्रदूषण अपने चरम पर होता है. रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर से जनवरी के बीच पैदा होने वाले बच्चे प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

शहरी-ग्रामीण बच्चों की सेहत-कद पर प्रदूषण का प्रभाव



बच्चों की सेहत पर पड़ता है प्रभाव, pollution affects kids badly
बच्चों की सेहत पर पड़ता है प्रभाव


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर साग्निक डे ने बताया कि देश भर में तेजी से बढ़ता प्रदूषण सिर्फ शहरी बच्चों पर ही नहीं बल्कि ग्रामीण अंचल में रहने वाले बच्चों की सेहत और कद पर भी प्रभाव डाल रहा है. प्रोफेसर डे ने बताया कि नवंबर से जनवरी तक के बीच प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा रहता है और इसका असर भी इन्हीं महीनों में पैदा होने वाले बच्चों पर सबसे अधिक देखा गया है. उन्होंने कहा कि तत्व पीएम 2.5 से बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. इसी का असर बच्चों की ऊंचाई पर भी पड़ रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि इस तरीके की रिपोर्ट पहली बार बनाई गई है जो प्रदूषण और बच्चों के कद पर आधारित है.

केंद्र सरकार के सर्वे के आधार पर बनाई गई रिपोर्ट
उन्होंने बातचीत में बताया कि अपनी यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के डेमोग्राफिक एंड हेल्थ सर्वे से लिए गए आंकड़ों के आधार पर बनाई गई है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने देश के 640 जिलों में पांच साल के लगभग ढाई लाख बच्चों पर सर्वे किया था. प्रोफेसर साग्निक ने बताया कि कोई बच्चा अगर 100 माइक्रोग्राम मीटर प्रति घन के प्रदूषण में पैदा हुआ है तो उसकी ऊंचाई पांच साल में .024 में कम पाई गई है. प्रोफेसर साग्निक डे ने बताया कि जिस तरीके से लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है. ऐसे में सरकार की योजनाओं को देखते हुए लोगों को उन्हें अपनाना होगा और सरकार के साथ मिलकर काम करना होगा तभी प्रदूषण का स्तर कम हो पाएगा.

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