Article 370 हटे बीता हफ्ता, अब इस 'मिशन' पर है BJP की नजर

ऐसा नहीं है कि जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से आर्टिकल 370 (Article 370) हटने के बाद बीजेपी (BJP) कमफर्ट जोन में आ गई है. देश भर में मन रहे जश्न के बीच पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी है.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 3:58 PM IST
Article 370 हटे बीता हफ्ता, अब इस 'मिशन' पर है BJP की नजर
आर्टिकल 370 हटाने के बाद भी बीजेपी और सरकार जश्न के मोड में नहीं आई. (फाइल फोटो)
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 3:58 PM IST
यह एक बार फिर पीएम मोदी (PM Modi) का एलिमेंट ऑफ सरप्राइज था. अनुच्छेद 370 (Article 370) हटने की कोई कल्पना भी नहीं कर रहा था और धमाका हो गया. इसकी गूंज दुनिया भर में सुनाई दी. एक कमजोर पाकिस्तान (Pakistan) दुनिया में अलग-थलग पड़ा रहा और दुनिया ने मान भी लिया कि ये भारत का अंदरुनी मामला (Internal Matter) है. अब अनुच्छेद 370 की समाप्ति के एक सप्ताह बीत चुके हैं. एक बार भी पीएम मोदी और सरकार ने ऐसा प्रतीत नहीं होने दिया कि बीजेपी (BJP) या फिर सरकार ने दुनिया जीत ली हो या फिर कुछ बड़ा हासिल कर लिया हो.

हां, देश भर की प्रतिक्रिया देख कर सरकार का सीना चौड़ा जरुर हो गया. आखिर संघ (RSS) और बीजेपी का अखंड भारत का एक सपना पूरा जो हो गया. पूरे जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में हिंसा और हंगामे के मद्देनजर कई तरह के प्रतिबंध लगे रहे, जो ईद के एक दिन पहले से थोड़े खुलने शुरू भी हो गए थे. पूरे हफ्ते सरकार और बीजेपी ने कोई युद्धघोष नहीं किया. बस यही संदेश देने की कोशिश करती रही कि जो हुआ संविधान के दायरे में हुआ, जिससे कश्मीरियों के हितों की और बेहतर तरीके से रक्षा होगी.

प्रतिबंधों के बावजूद ईद शांतिपूर्ण रही
सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि जम्मू कश्मीर के हर इलाके में ईद शांतिपूर्ण तरीके से मनाई गई. ज्यादातर मस्जिदों में नमाज 7 बजे सुबह ही शुरू हो गई, जो दोपहर तक चली. लोगों की आवाजाही पर पुलिस पैनी नजर बनाए हुए थी. बांदीपुरा के दारुल उलूम रहीमिया में 5000 तो वहां की जामा मस्जिद में 2000 लोगों ने नमाज अता की. बारामुला में 10000, कुपवारा की ईदगाह में 3500, त्रेहगाम में 3000, सोपोर 1500, शोपियां 3000, कुलगाम के काजीगुंड में 5500 और कीमोह में 6000, पुलवामा में 1800, अनंतनाग के गांदेरबल में 7000, अचबल में 3000, श्रीनगर के सैकड़ों स्थानीय मस्जिदों में, बडगाम के चरार-ए-शरीफ में 5000 और मागम में 8000 लोगों ने एक साथ नमाज अता की.

स्थानीय स्तर पर थोड़े विरोध प्रदर्शन भी हुए
हालांकि आतंकी हमलों और शरारती तत्वों को शांति में खलल डालने से रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में भीड़ जुटाने को लेकर खासी पाबंदी भी रखी गई थी. ये बात और है कि कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर थोड़े विरोध प्रदर्शन भी हुए और थोड़ी पत्थरबाजी जैसी घटनाएं भी हुईं. लेकिन पुलिस ने इसे अपने स्तर पर ही दुरुस्त कर लिया और विरोध पर उतारू लोगों को भगा दिया.

Union Home Minister Amit Shah Article 370
आर्टिकल 370 के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सामने रखी थी सरकार की बात. (फाइल फोटो)

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ईद पर जमकर हुई भेड़ों और बकरियों की बिक्री
एक-दो लोगों को छोड़ कर घायलों की संख्या भी नगण्य रही. शनिवार यानी 10 अगस्त से ही पाबंदियों में थोड़ी ढील शुरू हो गई थी. श्रीनगर में भी शनिवार को भारी संख्या में लोग घरों से निकले. लगभग 20 फीसदी दुकानें खुलीं और सड़कों पर रेहड़ी पटरी वालों ने भी अपनी दुकानें सजाईं. ईद के दिन तो और भी कमाल हुआ, जब 50 फीसदी तक दुकानें खुल गईं और भारी संख्या में लोग ईद की खरीददारी करते दिखे. बकरियों और भेड़ों की जबरदस्त बिक्री हुई. एक सरकारी अनुमान के मुताबिक श्रीनगर में 2.5 लाख से ज्यादा भेड़ें बेची गईं.

सरकार ने हेल्पलाइन के जरिए रिश्तेदारों से कराई बात
उधर जम्मू इलाके में 5 जिलों में पाबंदियां पूरी तरह से हटा ली गईं और 5 जिलों में रात को पाबंदियां बरकरार रहीं. सरकारी सूत्र बताते हैं कि ऐसे ही कश्मीर के करीब 9 जिलों में लगी पाबंदियों में थोड़ी ढील दी गई. कश्मीर के कई इलाकों में लोगों को अपने रिश्तेदारों से हेल्पलाइनों के जरिए सरकार ने संपर्क कराया.

श्रीनगर से ईद के दिन की गई 5 हजार कॉल
सरकारी अनुमान के मुताबिक सिर्फ श्रीनगर से ईद के दिन 5000 टेलीफोन कॉल्स की गईं. पूरे कश्मीर डिविजन में 300 सार्वजनिक इलाकों में टेलीफोन की हेल्पलाईन चलाई गई. सरकार ने सुरक्षा बलों की फायरिंग के चलते लोगों के हताहत होने की खबरों को सिरे से खारिज भी कर दिया. स्थानीय स्थितियों को देख कर ही पाबंदी घटाने या फिर हटाने का फैसला लेने का काम स्थानीय प्रशासन पर ही छोड़ा गया है.

पीएम मोदी की बीजेपी को फिजूल की बयानबाजी से बचने की नसीहत
अनुच्छेद 370 की बात जब कैबिनेट की बैठक में रखी गई तो सूत्र बताते हैं कि अगले 6 से 7 मिनटों तक सभी मंत्री मेज थपथपाते रहे. सबको लग रहा था कि कश्मीर पर एक बड़ा फैसला होने जा रहा है, लेकिन 370 इतिहास का हिस्सा बन जाएगा, इसकी उम्मीद कोई नहीं कर रहा था. गृहमंत्री अमित शाह ने जब दो प्रस्ताव और 2 विधेयक पढ़े तो माहौल जोशीला हो गया.

ऐसे में पीएम मोदी ने तमाम मंत्रियों और सांसदों को यह नसीहत दी कि इस फैसले के जोश में ज्यादा हंगामा बरपाने की जरूरत नहीं है और इसे जितना डाउन प्ले किया जा सके, उतना ही बेहतर होगा. पीएम मोदी जानते थे कि अगर देश के बाकी हिस्सों में उत्सव मना तो कश्मीर में शांति वापस लाने में खासा वक्त लग जाएगा. इसलिए न ही बीजेपी की ओर से कोई युद्धघोष हुआ और न ही पीठ थपथपाई गई.

PM Modi And Amit Shah Article 370 Jammu And Kashmir
प्रधानमंत्री मोदी के साथ गृहमंत्री अमित शाह. (फाइल फोटो)


जब तक जिंदगी लौट के पटरी पर न आ जाए, अपनी पीठ थपथपाने से बचें
पीएम मोदी ने भी जब अनुच्छेद 370 को लेकर राष्ट्र के नाम संदेश दिया, तब कहा कि जम्मू कश्मीर जो इस अनुच्छेद के चलते राष्ट्र की मुख्यधारा से अलग थलग पड़ा है. यह बदलाव वहां के सरकारी कर्मचारी, युवा वर्ग से लेकर आम आदमी की जिंदगी को बदल देगा. एजेंडा साफ था कि जब तक जिंदगी लौट के पटरी पर न आ जाए, अपनी पीठ थपथपाने से बचें. इसलिए न तो बड़े-बड़े इंटरव्यू हुए और न ही बीजेपी नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर सीना चौड़ा किया.

कश्मीर में डिलिमिटेशन की तैयारी
संकेत हैं कि पीओके की दो दर्जनों सीटों को छोड़ दें तो बाकी राज्य में कुल 90 विधानसभा सीटें की जाएंगी. बीजेपी आलाकमान जानता है कि इसके बाद राज्य में जम्मू इलाके में सीटों की संख्या कश्मीर से ज्यादा हो जाएंगी. अब तक जम्मू में 37, कश्मीर में 46 और लद्दाख में 4 विधानसभा सीटें आतीं थीं. जल्दी ही चुनाव आयोग इस दिशा में काम शुरू कर देगा.

सरकार को उम्मीद है कि जब तक डिलिमिटेशन का काम पूरा होगा, तब तक शांति लौट आएगी. उधर डिलिमिटेशन के बाद बीजेपी भी जम्मू-कश्मीर पर भगवा लहराने की तैयारी में है. जम्मू की सीटें बढ़ते ही बीजेपी को भरोसा है कि अगला मुख्यमंत्री उनका ही होगा, क्योंकि वही सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरेगी और कश्मीर के कुछ निर्दलियों और समर्थन देने वाली पार्टियों के साथ सरकार बन लेगी.

बीजेपी का देशव्यापी अभियान
शुक्रवार को बीजेपी ने तय किया कि देश के सभी राज्य और जिला मुख्यालयों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर जनता और समर्थकों को अनुच्छेद 370 के हटाने संबंधी जानकारियां दी जाएं. साथ ही ये निर्देश भी कि हर बीजेपी शासित राज्य की विधानसभाओं में मोदी सरकार की तारीफ करते प्रस्ताव पारित किए जाएं. इन प्रस्तावों की कॉपी पीएम मोदी और बीजेपी मुख्यालय भेजी जाएगी. यानी कोशिश कि मुद्दा जिंदा भी रहे और संदेश ये जाए कि अपने संकल्प पत्र में लिखे हर वायदे को पूरा करने में बीजेपी सक्षम है. आलाकमान को उम्मीद है कि इस अभियान से लोगों के बीच भी पहुंचेंगे और उनके साथ भी.

तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए प्रभारी नियुक्त
संगठन में खामोशी नहीं है. चुनावों की तैयारियां चल रही हैं. एक के बाद एक समाज के प्रबुद्ध लोगों को विभिन्न राज्यों से लाकर बीजेपी में शामिल किया जा रहा है. महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा के विधानसभा चुनावों की तैयारियां भी शुरू हो गईं हैं. मुख्यंत्रियों और नेताओं ने राज्यव्यापी यात्राएं भी शुरू कर दी हैं.

Amit Shah In Rajya Sabha
देश के गृहमंत्री अमित शाह ने आर्टिकल 370 के मुद्दे पर संसद में विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया. (फाइल फोटो)


ओम माथुर को झारखंड की जिम्मेदारी
अमित शाह ने भूपेन्द्र यादव को महाराष्ट्र का प्रभारी बना कर जता दिया है कि कमान उनके ही हाथ में रहेगा. साथ ही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या को सहप्रभारी बनाकर वहां बसे पूर्वांचलियों को भी संदेश दिया और उनकी संगठन क्षमता का इस्तेमाल भी पार्टी कर लेगी. लंबे समय तक गुजरात के प्रभारी रहे और पिछले विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र के प्रभारी रहे ओम माथुर को झारखंड का प्रभारी बनाया गया है. इनके साथ नंद किशोर यादव को सह प्रभारी बनाया गया है. उधर हरियाणा में नरेन्द्र सिंह तोमर प्रभारी बने हैं.

वायदे के मुताबिक जल्द कराने हैं कश्मीर में चुनाव
पीएम मोदी जानते हैं कि कश्मीर को लेकर एक लंबी लड़ाई लड़नी है. एक तो वहां कि जिंदगी पटरी पर लानी है और दूसरा अपने वायदे के मुताबिक जल्द ही चुनाव करवाने हैं. इसलिए न तो वे खुद गरजे और न ही उनके निर्देश के बाद पार्टी ने ढोल पीटे. बहरहाल अपने मैनिफेस्टो का एक वायदा मोदी सरकार ने पूरा कर दिया है और पूरा देश इसके समर्थन में खड़ा है. उम्मीद इस बात की बढ़ गई है कि पीएम मोदी बाकी वायदों को भी पूरा करेंगे. बीजेपी आलाकमान ये बखूबी जानता है. इसलिए धीरे-धीरे ही सही ये मुद्दा विधानसभा चुनावों में उनकी नैय्या पार तो लगाएगा ही.

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First published: August 13, 2019, 3:25 PM IST
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