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पंजाब, हरियाणा में पराली जलाने वालों पर तत्काल सख्त कदम उठाएं एजेंसियां: EPCA

भाषा
Updated: November 2, 2019, 9:18 AM IST
पंजाब, हरियाणा में पराली जलाने वालों पर तत्काल सख्त कदम उठाएं एजेंसियां: EPCA
दिल्ली में प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर बढ़ गया है. इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है साथ ही वो बीमारियों के शिकार हो रहे हैं (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश (Delhi, Haryana, Rajasthan and Uttar Pradesh) के मुख्य सचिवों को अलग से लिखे पत्र में ईपीसीए प्रमुख भूरेलाल (EPCA Chief Bhurelal) ने कहा, दिल्ली और एनसीआर (Delhi and NCR) की वायु गुणवत्ता बीती रात और खराब हो गई तथा अब वह अत्यधिक गंभीर स्तर पर है. हमें इसे जनस्वास्थ्य के लिए आपात स्थिति के तौर पर लेना है.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से अधिकार प्राप्त प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) ने क्रियान्वयन एजेंसियों को पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाने के निर्देश दिये हैं. शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता आपात स्थिति में पहुंच जाने पर ईपीसीए ने यह निर्देश दिया.

दिल्ली के प्रदूषण में 35 प्रतिशत पराली जलाने की हिस्सेदारी
गुरुवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में 27 फीसदी हिस्सेदारी इन दोनों राज्यों (पंजाब और हरियाणा) में पराली जलाए जाने की घटनाओं की रही. जबकि बुधवार को इसकी हिस्सेदारी 35 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो अब तक की सर्वाधिक थी. पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) ने एजेंसियों को यह निर्देश भी दिया कि दिल्ली और इसके बाहरी इलाकों में ‘बायोमास’ (पराली) जलाने पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं. इससे पहले शुक्रवार को ही ईपीसीए ने दिल्ली-एनसीआर में जन स्वास्थ्य के लिए आपातस्थिति (इमरजेंसी) की घेाषणा की और निर्माण गतिविधियों पर पांच नवंबर तक पूरी तरह रोक लगा दी. साथ ही उसने सर्दियों के मौसम के दौरान पटाखे जलाने पर भी पाबंदी लगा दी.

दो पड़ोसी राज्यों को EPCA प्रमुख ने लिखा पत्र

ईपीसीए प्रमुख भूरेलाल द्वारा दो पड़ोसी राज्यों को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण ने क्रियान्वयन एजेंसियों को पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाने के निर्देश दिये हैं.’ पंजाब और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में पराली जलाने की घटनाएं 27 अक्टूबर के 12,027 से बढ़कर 30 अक्टूबर को 19,869 हो गई. उसी प्रकार हरियाणा में पराली जलाने के मामले 27 अक्टूबर के 3,735 से बढ़कर 30 अक्टूबर को 4,211 हो गए. दिल्ली में शुक्रवार को इस मौसम की सबसे खराब वायु गुणवत्ता थी और वायु गुणवत्ता सूचकांक 483 पर आ गया था.

रोक के बावजूद हरियाणा में किसान जला रहे है पराली-Farmers are burning parali in Haryana hrrm
दिल्ली और एनसीआर के वातावरण में प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारण हरियाणा और पंजाब में किसानों द्वारा खेतों में पराली जलाना है


ये होता है सूचकांक का मतलब
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बता दें कि एक्यूआई जब 0-50 होता है तो इसे अच्छी श्रेणी का माना जाता है. 51-100 को संतोषजनक, 101-200 को मध्यम, 201-300 को खराब, 301-400 को अत्यंत खराब, 401-500 को गंभीर और 500 से ऊपर एक्यूआई को बेहद गंभीर और आपात श्रेणी का माना जाता है. दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को अलग से लिखे पत्र में भूरेलाल ने कहा, ‘दिल्ली और एनसीआर की वायु गुणवत्ता बीती रात और खराब हो गई तथा अब वो अत्यधिक गंभीर स्तर पर है. हम इसे जनस्वास्थ्य के लिए आपात स्थिति के तौर पर लेना है, क्योंकि इसका सभी पर, खासकर बच्चों पर गंभीर प्रभाव पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में दिल्ली, फरीदाबाद, गुरूग्राम, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निर्माण गतिविधियां, हॉट-मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर पांच नवंबर की सुबह तक बंद रहेंगे.

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First published: November 2, 2019, 6:25 AM IST
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