खेती-किसानी लायक नहीं रह गई है देश की 960 लाख हेक्टेयर जमीन, इन राज्यों में ज्यादा संकट!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 2, 2019, 6:12 PM IST
खेती-किसानी लायक नहीं रह गई है देश की 960 लाख हेक्टेयर जमीन, इन राज्यों में ज्यादा संकट!
बंजर होती जमीन खेती-किसानी के लिए है बड़ा खतरा

50 लाख हेक्टेयर बंजर जमीन (Barren Land) को उपजाऊ बनाएगी मोदी सरकार. इस पहल से 75 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार (Employment), जैविक खेती (Organic Farming) बन सकती है बड़ा विकल्प, लेकिन किसानों (Farmers) के भी हैं कुछ सवाल!

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 2, 2019, 6:12 PM IST
  • Share this:
देश की करीब 30 फीसदी जमीन बंजर हो चुकी है. मतलब यह है कि उसमें आप कुछ उगा नहीं सकते. इसकी वजह से न सिर्फ कृषि (Agriculture) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार की संभावना भी कम हो रही है. इसलिए मोदी सरकार अगले 10 साल में 50 लाख हेक्टेयर बंजर जमीन (Barren Land) को उपजाऊ बनाएगी. इससे लगभग 75 लाख लोगों को रोजगार (Employment) मिलेगा. इसे लेकर आज सोमवार से ग्रेटर नोएडा में एक वैश्विक सम्मेलन शुरू हुआ. 13 सितंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में बंजर यानी खराब जमीन को उपजाऊ बनाने पर चर्चा होगी. कई देशों के वैज्ञानिक इस बारे में अपने रिसर्च मॉडल को पेश करेंगे. 9 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भी इसमें शामिल होंगे. इस संकट से निपटने के लिए जैविक खेती (Organic Farming) बड़ा विकल्प है.

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश की 960 लाख हेक्टेयर जमीन हो बंजर हो चुकी है. राजस्थान, दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र, झारखंड, नागालैंड, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश में 40 से 70 प्रतिशत जमीन बंजर बनने वाली है. दूसरी ओर सरकार के दावों पर शत-प्रतिशत यकीन भी कर लें तो अगले दस साल में सिर्फ 50 लाख हेक्टेयर जमीन ही उपजाऊ हो पाएगी. केमिकल फर्टिलाइजर के अंधाधुंध इस्तेमाल और कहीं बाढ़ और कहीं पानी की कमी से ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं.

किसान, farmers, खेती-किसानी, Farming, रोजगार, employment, narendra modi, नरेंद्र मोदी, barren land, बंजर जमीन, wasteland, Agricultural Situation in India, भारत में कृषि की स्थिति, सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट, CSE, kisan, Ministry of Agriculture, कृषि मंत्रालय, ministry of environment, पर्यावरण मंत्रालय
जमीन को बंजर होने से बचाने के लिए ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ मंथन


जैविक खेती और किसानों के सवाल!

देश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल हरित क्रांति (1965-66) के बाद शुरू हुआ. लेकिन कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जिस यूरिया को हम उत्पादन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं वह धीरे-धीरे हमारे खेतों को बंजर बना रही है. इसके खतरे को समझने के लिए भारत ने नाइट्रोजन के आकलन के लिए साल 2004 में सोसायटी फॉर कन्जरवेशन ऑफ नेचर (एससीएन) की स्थापना की गई. इससे जुड़कर करीब सवा सौ वैज्ञानिकों ने इंडियन नाइट्रोजन असेसमेंट नामक एक रिपोर्ट प्रकाशित की. जिसमें इसके दुष्परिणाम बताए गए हैं.

इसलिए अब सरकार किसानों को जैविक खेती की ओर लौटने की अपील कर रही है. ऐसी खेती करने वालों को आर्थिक मदद भी दे रही है. लेकिन किसान इसके लिए फिलहाल तैयार नहीं दिखते. आम किसानों में इस बात की चिंता है कि अगर वो रासायनिक खाद कम कर देंगे तो क्या अनाज और सब्जियां का उत्पादन पहले जैसा रह पाएगा? किसानों का कहना है कि अगर यूरिया इतनी नुकसानदायक है तो सरकार उसका उत्पादन ही क्यों नहीं बंद कर देती.

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भूगोल विभाग के प्रमुख रहे प्रो. केएन सिंह कहते हैं जैविक खेती करने में चुनौतियां बहुत हैं. लेकिन हमें अंत में अपनाना इसे ही पड़ेगा, क्योंकि रासायनिक खाद और कीटनाशक न सिर्फ हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा है. हरित क्रांति आधारित खेती में जो गेहूं-चावल की प्रजातियां हैं वो ज्यादा पानी और खाद पर निर्भर हैं. इससे जमीन बंजर होने का खतरा बढ़ रहा है.
Loading...

भारत में जैविक खेती का दायरा
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय करीब 27.70 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती हो रही है. इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, यूपी और राजस्थान सबसे आगे हैं. भारत में जैविक खेती की तरफ ध्‍यान 2004-05 में गया, जब जैविक खेती पर राष्‍ट्रीय परियोजना (एनपीओएफ) की शुरूआत की गई. नेशनल सेंटर ऑफ आर्गेनिक फार्मिंग के मुताबिक 2003-04 में भारत में जैविक खेती सिर्फ 76,000 हेक्टेयर में हो रही थी जो 2009-10 में बढ़कर 10,85,648 हेक्टेयर हो गई.

किसान, farmers, खेती-किसानी, Farming, रोजगार, employment, narendra modi, नरेंद्र मोदी, barren land, बंजर जमीन, wasteland, Agricultural Situation in India, भारत में कृषि की स्थिति, सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट, CSE, kisan, Ministry of Agriculture, कृषि मंत्रालय, ministry of environment, पर्यावरण मंत्रालय
मेादी सरकार ने 50 लाख हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का रखा है लक्ष्य


सरकारी सहायता
आर्गेनिक फार्मिंग  को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर है. था. इसके लिए परम्परागत कृषि विकास योजना बनाई गई है. (Paramparagat Krishi Vikas Yojana) के तहत आपको प्राकृतिक खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सरकारी सहायता मिल सकती है. इसमें से किसानों को जैविक खाद, जैविक कीटनाशकों और वर्मी कंपोस्ट आदि खरीदने के लिए 31,000 रुपये (61 प्रतिशत) मिलता है.

यह भी पढ़ें:

सबसे बड़ी किसान स्कीम का ऐसे मिलेगा लाभ, खेती-किसानी के लिए सालाना 25 हजार रुपये!        

अब इसलिए सीधे किसानों के मोबाइल पर पहुंचेगी खेती-किसानी से जुड़ी योजनाओं की जानकारी!        

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नोएडा से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 2, 2019, 5:43 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...