ANALYSIS: गोपाल राय के बयान के बाद दिल्ली में AAP-कांग्रेस में जुड़ सकती है गठबंधन की गांठ!

आम आदमी पार्टी (आप) नेता गोपाल राय ने बयान देकर एक बार फिर से आप-कांग्रेस गठबंधन की बुझ रही लौ में रोशनी भर दी है.

Chandan Kumar | News18Hindi
Updated: April 19, 2019, 4:48 PM IST
ANALYSIS: गोपाल राय के बयान के बाद दिल्ली में AAP-कांग्रेस में जुड़ सकती है गठबंधन की गांठ!
दिल्‍ली-हरियाणा में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन होगा.
Chandan Kumar | News18Hindi
Updated: April 19, 2019, 4:48 PM IST
आम आदमी पार्टी (आप) नेता गोपाल राय ने बयान देकर एक बार फिर से आप-कांग्रेस गठबंधन की बुझ रही लौ में रोशनी भर दी है. गोपाल राय ने कहा है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस को एक नया फार्मूला दे रही है. इस पर कांग्रेस विचार कर सकती है. साथ ही कांग्रेस के निर्णय तक उन्होंने आप प्रत्याशियों के नामांकन को रोकने की भी बात कही है.

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों को ये डर है कि वोट बंटने से दिल्ली की एक भी सीट जीतना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा, इसलिए दोनों ही पार्टियां गठबंधन के मोह को छोड़ नहीं पा रही है. आम आदमी पार्टी कम से कम तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं हटाएगी, जिसमें उसके पुराने नेता खड़े होने जा रहे हैं. इनमें एक दक्षिण दिल्ली, दूसरी पूर्वी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीट, लेकिन इन जगहों से कांग्रेस का टिकट पाने की इच्छा रखने वाले नेता लगातार गठबंधन का विरोध करते रहे हैं.



इन तीन सीटों से कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को अपना टिकट खोने का डर है. इसलिए कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व लगातार गठबंधन का विरोध कर रहा है. वहीं, अजय माकन जैसे नेताओं को चिंता है कि बिना गठबंधन के लडाई में बने रहना मुश्किल हो सकता है. इसलिए माकन ने पहले भी दबी दुबान से कहा है कि वे बिना गठबंधन के चुनाव नहीं लड़ेंगे.

माकन कैंप से कहा गया है कि शीला दीक्षित भी कांग्रेस को मजबूती देने के लिए लड़े. शीला दीक्षित के समर्थक इसे ठीक नहीं मान रहे और उन्हें भी वही चिंता है कि क्या अकेले लड़ने पर वे जीत सकती है. ये ध्यान रखने वाली बात है कि शीला दीक्षित गठबंधन का विरोध करती रही हैं.

इधर आम आदमी पार्टी को भी पता है कि उसके लिए बीजेपी को पछाड़ना मुश्किल होगा. लेकिन पिछले छह-आठ महीने से उसने दिल्ली में अपना चुनाव प्रचार तेज कर रखा है. प्रचार के लिहाज से वो दूसरे तीसरे चरण में पहुंच गई है. रैलियों से लेकर घर-घर के जनसंपर्क में पार्टी अन्य दलों से आगे है. आम आदमी पार्टी चाहती है कि उसकी इस मेहनत के बदले में कांग्रेस हरियाणा जैसे राज्य में दे, जहां वो अपना पैर जमाने की कोशिश कर रही है.

आम आदमी पार्टी नेता गोपाल राय के ताजा बयान के बाद से फिर एक बार गेंद कांग्रेस के पाले में आ गई है. उन्होंने कहा है कि पार्टी प्रत्याशियों के नामांकन रोके जा रहे हैं और वे अब 22 को नामांकन करेंगे. लेकिन कांग्रेस की चिंता ये भी है कि विधानसभा चुनाव के दौरान उसे दिल्ली में आप से टक्कर लेनी ही होगी. फिर भी कांग्रेस नेताओं का एक धड़ा मोदी को केंद्र में दुबारा आने से रोकने और दिल्ली से कुछ सीटें जीतने का हवाला देकर गठबंधन की वकालत कर रहा है. इसी कारण से अभी भी गठबंधन को लेकर कभी हां कभी ना की स्थिति बनी हुई है. इस लड़ाई के नतीजे का इंतजार बीजेपी भी कर रही है, क्योंकि वो चाहती है कि ये पार्टियां अपने प्रत्याशियों की घोषणा करें तभी वो भी अपने उम्मीदवार आगे करेगी.

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