Analysis: Exit poll 2019अगर सही हैं तो क्या Lok Sabha 2019 result में 'बर्बरीक' PM नरेंद्र मोदी को ही कहेंगे श्रीकृष्ण

हर सीट पर मोदी ही लड़ रहे थे. जिलों में, कस्बों में, काम करने वाले पत्रकारों से पूछो कि चुनाव कैसा रहा तो कह रहे हैं लड़ाई तो बहुत कड़ी रही लेकिन मोदी फैक्टर चला है

RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: May 21, 2019, 12:33 PM IST
Analysis: Exit poll 2019अगर सही हैं तो क्या Lok Sabha 2019 result में 'बर्बरीक' PM नरेंद्र मोदी को ही कहेंगे श्रीकृष्ण
पीएम नरेंद्र मोदी (File Photo)
RajKumar Pandey
RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: May 21, 2019, 12:33 PM IST
महाभारत से जुड़ी एक कथा कही सुनी जाती है. लोक में मशहूर भी है. कहा जाता है जब महायुद्ध खत्म हो गया तो चर्चाएं होने लगी कौन सबसे बढ़िया लड़ रहा था. बात लोगों और फिर सैनिकों से होते होते राजभवन तक पहुंची. सबने सोचा सबसे ज्यादा बुद्धि विवेक केशव में हैं. उन्हीं से पूछ लिया जाए. पांडवों ने खास मंत्रियों के साथ जाकर श्रीकृष्ण से पूछ लिया.

बर्बरीक से पूछा गया था -'कौन सबसे बढ़िया लड़ा'

गीता का उपदेश देने वाले ऐसे कैसे बताते. बता भी देते तो अविश्वास के दौर में कौन मानता. लिहाजा कहा- "हम सब तो लड़ने में व्यस्त थे. अकेले बर्बरीक महज द्रष्टा था. उसी ने पूरा युद्ध देखा है. चलो उसी से पूछते हैं."

बर्बरीक ने कहा सिर्फ श्रीकृष्ण को ही लड़ते देखा

सभी को लेकर यदुकुल नंदन बर्बरीक के पास पहुंचे. पूछा - "तुम तो योद्धा होने के बाद भी इस महासमर में सिर्फ देखने वाले रहे हो. बताओ कौन लड़ रहा था." उसने जवाब दिया- "प्रभु, मैने तो किसी को लड़ते देखा ही नहीं. अकेले आप ही लड़ रहे थे."

इस चुनावी महासमर में क्या था

यह कहानी उस युग की थी. कही गई -सुनी गई. इस बार यह कहानी इस कारण से याद आई क्योंकि लोकतंत्र के महासमर में नतीजों की जो झलक दिखाई गई, उससे लग रहा है, इस युद्ध में भी वैसी ही स्थिति दुहराई गई है.
तो क्या हर सीट पर मोदी ही थे

हर सीट पर मोदी ही लड़ रहे थे. जिलों में, कस्बों में, काम करने वाले पत्रकारों से पूछो कि चुनाव कैसा रहा तो कह रहे हैं लड़ाई तो बहुत कड़ी रही लेकिन मोदी फैक्टर चला है. आखिर क्या था मोदी फैक्टर? क्या था वो अंडर करेंट, जिसके झटकों को क्षेत्र में काम करने वालों ने महसूस किया.

बीजेपी चाहती भी यही थी

क्या बीजेपी अपने इस प्रचार में सफल रही कि मोदी ही देश का विकास कर सकते हैं. मोदी ही देश की सुरक्षा कर सकते हैं. मोदी ही दुनिया में भारत का नाम ऊंचा कर सकते हैं. अगर जिलों के पत्रकारों की माने तो बीजेपी का ये प्रयास सफल रहा है. हर सीट पर मोदी के लिए वोट हुआ है. बीजेपी इस चुनाव को एक तरह से अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव बनाने में सफल रही.

अपने देश में वोट बैंकों की राजनीति लंबे समय से एक परंपरा के तौर पर रही है. पार्टियां तक जातियों की राजनीति के हिसाब से बनी और चल रही हैं. फल फूल भी रही हैं. सबके बाद भी अगर एग्जिट पोल के नतीजे जैसे आए हैं, वैसे ही नतीजे आते हैं तो एक नया वोट बैंक देश में तैयार हो गया है.

वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय के शब्दों में- "अगर नतीजे उसी तरह से आते हैं जैसा कि एग्जिट पोल में दिखाया गया है तो देश में मोदी वोट बैंक एक नए वोट बैंक के तौर पर तैयार हो गया है."
वे कहते हैं कि ये वोट बैंक अन्य चुनावों में तो अलग अलग मुद्दों पर विचार कर रहा है लेकिन लोकसभा चुनाव में सीधे प्रधानमंत्री चुन रहा है.

अंबिकानंद सहाय इससे सहमत है कि बीजेपी ने खुद ही इस लड़ाई को मोदी बनाम अन्य के तौर पर खड़ा किया. पार्टी इसमें सफल रही है. वे मिसाल देते हैं कि इससे पहले इंदिरा गांधी जिस दौर में सफल हो रही थीं तो उन्होंने भी ऐसी ही स्थिति बनाई थी. नारों तक में इंदिरा का ही जिक्र था.

'मैं भी चौकीदार' अभियान का योगदान

चौकीदार का जो अभियान बीजेपी की ओर से चला, उसने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई. जब बीजेपी के सारे नेताओं ने अपने नाम के आगे चौकीदार लगा लिया तो हर आदमी के जिक्र से मोदी का ही जिक्र आता रहा. और पार्टी प्रत्याशी का काम उसकी भूमिका सब दर किनार हो गई. वोट मोदी के नाम मिले.

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