Article 370: अमित शाह ने एक तीर से साधे कई निशाने, अब ये होंगे बदलाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35ए को निरस्त करने के लिए राज्यसभा में प्रस्ताव पेश किया. इसके साथ ही उन्होंने एक तीर से कई शिकार किए हैं.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 10:19 PM IST
Article 370: अमित शाह ने एक तीर से साधे कई निशाने, अब ये होंगे बदलाव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा जाते हुए.
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 10:19 PM IST
जम्मू-कश्मीर को संविधान से विशेष प्रावधान देने वाले अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को निरस्त करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में प्रस्ताव पेश किया. इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा के माध्यम से देश को बताया कि जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग किया जाएगा और ये दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश होंगे. लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी वहीं जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा. आइए जानते हैं कि इस एक फैसले से अमित शाह ने किन-किन मामलों पर निशाना साधा है.

बीजेपी का बढ़ेगा कद
जम्मू-कश्मीर की जिन 87 सीटों पर विधानसभा चुनाव होते हैं, उनमें से 37 सीटें जम्मू में आती हैं जबकि 50 सीटें कश्मीर में आती हैं. 2014 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने जम्मू इलाके की 37 सीटों में 25 पर जीत दर्ज की और राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होकर उभरी. ऐसे में लद्दाख के अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कद बढ़ेगा. दरअसल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 111 सीटें हैं, जिनमें 24 पाक अधिकृत कश्मीर में होने के कारण उस पर चुनाव नहीं होता है. जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुच्‍छेद 47 के तहत इन सीटों को रिक्‍त रखा गया है.

जम्मू-कश्मीर में मजबूत होगी बीजेपी

जम्मू-कश्मीर स्टडी सेंटर की डायरेक्टर (मीडिया) डॉक्टर आभा का कहना है कि बदली हुई परस्थितियों के बाद सरकार विधानसभा सीटों का परिसीमन जरूर कराएगी. वैसे भी इसके लिए लंबे समय से मांग हो रही है. इसकी जरूरत इसलिए भी है कि जम्मू परिक्षेत्र में ज्यादा इलाका और ज्यादा जनसंख्या होने के बाद भी यहां विधानसभा सीटों की संख्या कम है, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.

परिसीमन का बीजेपी को होगा फायदा
ऐसे में वर्तमान सरकार और चुनाव आयोग अगर जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से परिसीमन कराता है, तो मैदानी इलाके में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ेंगी. पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जिस तरह जम्मू के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान किया है, उससे साफ है कि परिसीमन के बाद भारतीय जनता पार्टी जम्मू-कश्मीर में मजबूती के साथ उभरेगी.
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इस तरह जम्मू-कश्मीर में बन सकती है बीजेपी सरकार
ऐसा नहीं है कि परिसीमन की मांग वर्तमान परिस्थितियों में ही उठी हो. इससे पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों परिसीमन की मांग लंबे अर्से से कर रहे हैं. दोनों पार्टियों का कहना है कि 1995 में जो परिसीमन हुआ था उसके बाद से हालात काफी बदले हैं. दोनों इलाकों के प्रतिनिधियों को देखें तो क्षेत्रफल और जनसंख्या में बड़ा अंतर है, इसलिए चुनाव से पहले परिसीमन जरूरी है. साफ है लद्दाख के अलग होने और नए परिसीमन के बाद जम्मू क्षेत्र में विधानसभा सीटों की संख्या कश्मीर से ज्यादा होगी, जिसका फायदा बीजेपी को मिलने की उम्मीद करना गलत नहीं होगा.

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First published: August 5, 2019, 2:38 PM IST
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