1 महीने में देश ने खो दिए 3 बड़े नेता, जानें कितना कुछ कॉमन था तीनों के बीच

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Updated: August 24, 2019, 10:44 PM IST
1 महीने में देश ने खो दिए 3 बड़े नेता, जानें कितना कुछ कॉमन था तीनों के बीच
जुलाई से अगस्त के दौरान देश ने तीन बड़े राजनेता खो दिए हैं. पहले शीला दीक्षित (Sheila Dikshit), फिर सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) और अब अरुण जेटली (Arun Jaitley).

जुलाई से अगस्त के दौरान देश ने तीन बड़े राजनेता खो दिए हैं. पहले शीला दीक्षित (Sheila Dikshit), फिर सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) और अब अरुण जेटली (Arun Jaitley).

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बीता एक महीना देश की राजनीति के लिए दुखद साबित हुआ है. जुलाई से अगस्त के दौरान देश ने तीन बड़े राजनेता खो दिए हैं. पहले शीला दीक्षित (Sheila Dikshit), फिर सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) और अब अरुण जेटली (Arun Jaitley). इन तीनों का ही दिल्ली से नाता रहा है. बीते जुलाई से लेकर अभी तक (अगस्त) इन तीनों बड़े नेताओं का निधन हो गया है. इनमें से दो दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री थीं तो अरुण जेटली कद्दावर केंद्रीय मंत्री थे. सुषमा स्वराज को दिल्ली की मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ केंद्र में भी महत्वपूर्ण मंत्री का भी गौरव हासिल था.

शनिवार 24 अगस्त को अरुण जेटली की लंबी बीमारी के बाद निधन की खबर आई. जेटली बीते 9 अगस्त से ही दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती थे. पिछले कुछ दिनों से उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही थी, लेकिन बीते शुक्रवार को उनकी हालत बिगड़ने की खबर आई थी. काफी समय से एक के बाद एक बीमारी से जूझ रहे जेटली ने लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस वजह से मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने का आग्रह किया था.

अरुण जेटली के कार्यकाल में देश में आर्थिक सुधार वाला जीएसटी कानून लागू हुआ था (फाइल फोटो)


अरुण जेटली का जन्म वर्ष 1952 में हुआ था. उनके पिता पाकिस्तान के लाहौर से परिवार सहित दिल्ली आकर बस गए थे. दिल्ली के सेंट जेवियर्स से जेटली ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की. उसके बाद 1969 में उन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की. दिल्ली यूनिवर्सिटी में रहने के दौरान 1974 में उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई. उन्होंने छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव जीता. इसके बाद वर्ष 1980 में जेटली भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बने.

साल 2000 में वो पहली बार केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए. 2002 में उन्हें बीजेपी का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया. 2009 में वो राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष चुने गए. 2012 में उन्हें गुजरात से राज्यसभा में भेजा गया. 2014 में जेटली ने कांग्रेस के दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन देश में मोदी लहर होने के बावजूद उनकी हार हुई. हालांकि नतीजों में बीजेपी की जीत होने पर केंद्र में सरकार बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुण जेटली को वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण पद दिया. पिछले साल वो उत्तर प्रदेश से चुनकर एक बार फिर राज्यसभा पहुंचे थे.

शीला दीक्षित-सुषमा स्वराज का हार्ट अटैक से हुआ था निधन

इससे पहले शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज दोनों का निधन हार्ट अटैक से हो गया था. 20 जुलाई, 2019 को हार्ट अटैक से दिल्ली की तीन बार की मुख्यमंत्री और कांग्रेस की सीनियर लीडर शीला दीक्षित का निधन हुआ. इसके तीन हफ्ते के भीतर मंगलवार 6 अगस्त 2019 की रात दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं, पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज नहीं रहीं. सुषमा स्वराज को हार्ट अटैक के बाद एम्स में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली.
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सुषमा स्वराज के खाते में कई राजनीतिक उपलब्धियां रहीं. वो हरियाणा सरकार में सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनीं. दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर पद संभाला. किसी राष्ट्रीय पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता के तौर पर काम किया. ये सारी उपलब्धियां उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल और समझबूझ से हासिल की.

सुषमा स्वराज बनीं दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री
दिल्ली के सीएम के तौर पर सुषमा स्वराज का कार्यकाल बहुत छोटा रहा. वो 13 अक्टूबर 1998 से लेकर 3 दिसंबर 1998 तक दिल्ली की सीएम रहीं. 3 दिसंबर 1998 को विधानसभा से इस्तीफा देकर वो एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति में आ गईं. इसके बाद शीला दीक्षित ने दिल्ली के सीएम का पद संभाला. दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों की सबसे काबिल महिला नेताओं में से एक थीं.

delhi lost its two lady chief ministers sheila dixit and sushma swaraj know what was common within them
दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज का कार्यकाल काफी छोटा रहा (फाइल फोटो)


हालांकि शीला दीक्षित के राजनीतिक खाते में लगातार 15 वर्षों तक दिल्ली के सीएम रहने की उपलब्धि शामिल रहा. शीला दीक्षित वर्ष 1998 से लेकर 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के हाथों हार मिली. 2013 के विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित 25,864 वोटों से हार गईं. लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष का पद भी संभाला.

शीला दीक्षित ने दिल्ली का विकास किया और सुषमा स्वराज देश के विकास में भागीदार बनीं
शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते ही दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ. उनके कार्यकाल में दिल्ली में फ्लाईओवर का जाल बिछा. दिल्ली को मेट्रो ट्रेन के तौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का सबसे बड़ा तोहफा हासिल हुआ. शीला दीक्षित सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाली महिला थीं. उन्होंने दिल्ली को एक आधुनिक और वर्ल्ड क्लास शहर बनाने में जो योगदान दिया था, उसे उनके विरोधी भी स्वीकार करते हैं.

सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित राजनीतिक रूप से एकदूसरे की प्रतिद्वंद्वी रहीं लेकिन दोनों के बीच निजी जिंदगी में सामान्य रिश्ते थे. शीला दीक्षित के निधन पर सुषमा स्वराज ने कहा था 'हमलोग राजनीतिक जीवन में एकदूसरे के खिलाफ रहे लेकिन निजी जिंदगी में एकदूसरे के दोस्त. वो बेहतरीन इंसान थीं.'

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शीला दीक्षित लगातार 15 वर्षों तक दिल्ली की सीएम रहीं (फाइल फोटो)


शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज दोनों ने सार्वजनिक जीवन में कामयाबी पाईं. शीला दीक्षित ने जहां दिल्ली को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और राजधानी के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वहीं सुषमा स्वराज ज्यादातर वक्त तक राष्ट्रीय राजनीति में ही रहीं. उन्होंने सूचना प्रसारण मंत्रालय से लेकर विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली.

विदेश मंत्री के तौर पर काफी लोकप्रिय रहीं सुषमा स्वराज

शीला दीक्षित दिल्ली के सीएम के तौर पर मशहूर रहीं तो सुषमा स्वराज देश के विदेश मंत्री के तौर पर. विदेश मंत्री रहते हुए जिस तरह से उन्होंने भारतीय नागरिकों की विदेशों में मदद की, उसने सबका दिल जीत लिया. ट्विटर पर सक्रियता की वजह से उनतक पहुंचना किसी के लिए आसान था. लोगों ने प्यार से उन्हें सुपर मॉम कहा.

दोनों ही नेता महिलाओं की रोल मॉडल रहीं. दोनों ने राजनीति में अपना दामन किसी भी तरह के दाग से बचाए रखा. सुषमा स्वराज की पहचान जहां चौड़ी बिंदी, साड़ी और उनकी प्यारी मुस्कान रही तो शीला दीक्षित भी सार्वजनिक जीवन में करीने से साड़ी पहने और चेहरे पर हमेशा मुस्कान ओढ़े नजर आईं. राजनीतिक तौर पर एकदूसरे के विरोधी रहीं दोनों महिला नेता सार्वजनिक जीवन में अपने व्यवहार की वजह से एकदूसरे के करीब दिखाई पड़ीं.

दिल्ली के लिए ये बड़े सदमे की बात है कि पिछले एक महीने में यहां से ताल्लुक रखने वाले तीन बड़े नेताओं का निधन हो गया है.

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First published: August 24, 2019, 2:41 PM IST
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