केजरीवाल ने नहीं दिया विभागों में अल्पसंख्यकों की गिनती करने का आदेश: जफरुल इस्लाम खान

दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सरकारी विभागों में अल्पसंख्यकों की गिनती शुरू करने के मामले पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जफरुल इस्लाम खान ने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस प्रकार का कोई आदेश नहीं दिया है.

Rachna Upadhyay | News18Hindi
Updated: July 27, 2019, 6:51 PM IST
केजरीवाल ने नहीं दिया विभागों में अल्पसंख्यकों की गिनती करने का आदेश: जफरुल इस्लाम खान
केजरीवाल ने नहीं दिया विभागों में अल्पसंख्यकों की गिनती करने का आदेश: जफरुल इस्लाम खान
Rachna Upadhyay
Rachna Upadhyay | News18Hindi
Updated: July 27, 2019, 6:51 PM IST
दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सरकारी विभागों में अल्पसंख्यकों की गिनती शुरू करने के मामले पर अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जफरुल इस्लाम खान ने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस प्रकार का कोई आदेश नहीं दिया है. हमारी जानकारी में तो कोई ऐसा आदेश नहीं है. उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक आयोग हर साल एक रिपोर्ट बनाता है, इसमें एक सेक्शन यह भी होता है कि दिल्ली सरकार में जितने भी विभाग हैं उसमें अल्पसंख्यकों की तादाद क्या है? इसका ब्योरा उन विभागों से हासिल करके हम अपनी रिपोर्ट में छापते हैं. इस बार हम ने दिल्ली सरकार के तकरीबन 175 विभागों को इस संबंध में लिखा कि उनके वहां जो भी अल्पसंख्यक काम करते हैं उनकी संख्या दीजिए. यह बात बिल्कुल गलत है कि हमने सिर्फ मुसलमानों का आंकड़ा मांगा है. हमने सभी अल्पसंख्यकों के आंकड़े की बात कही है.

3 महीने में बैंकों के साथ मीटिंग करती है दिल्ली सरकार
इस्लाम खान ने कहा कि पिछले सालों की तरह इस बार भी जो आंकड़ा आ रहा है उसमें कोई भी सुधार नहीं हुआ है. संख्याएं पहले की तरह ही कम हैं. यह अल्पसंख्यकों के हक में नहीं है क्योंकि दिल्ली सरकार चाहती है कि अल्पसंख्यकों को सरकारी विभागों में बराबर का हिस्सा मिले. प्रदेश सरकार बैंकों को भी मॉनिटर करती है कि वह अल्पसंख्यकों को किस तरीके से लोन देते हैं. हर तीन महीने पर दिल्ली सरकार बैंकों के साथ भी मीटिंग करती है.

अल्पसंख्यक आयोग को कोई आदेश नहीं दे सकती दिल्ली सरकार

अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने बताया कि, ‘17 जून को हमने समाज कल्याण विभाग के सेक्रेटरी को खत लिखा था और कहा था कि विभागों में कार्यरत अल्पसंख्यकों की जानकारी दी जाए और जिस सर्कुलर की बात हो रही है वह हमारे लेटरहेड पर जारी किया गया है ताकि सिंगल विंडो में हमें सभी अल्पसंख्यकों की संख्या का ब्यौरा मिल सके.’ सरकार ने ऐसा कोई सर्कुलर जारी नहीं किया है. यह सर्कुलर सिर्फ अलग-अलग विभागों को एक करने के लिए जारी किया गया है और दिल्ली सरकार अल्पसंख्यक आयोग को कोई आदेश नहीं दे सकती है. आयोग एक स्वतंत्र संस्था है.

सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भागीदारी बढ़नी चाहिए
अल्पसंख्यक आयोग सरकार को अल्पसंख्यकों की संख्या का ब्यौरा देता है. अब सरकार उसको मानें या ना मानें वह सरकार का काम है. उन्होंने बताया कि दिल्ली में तकरीबन 13% मुसलमान हैं जबकि उनकी सरकारी नौकरियों में भागीदारी दो से ढाई पर्सेंट है और कहीं-कहीं जीरो है. सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भागीदारी बढ़नी चाहिए लेकिन इंदिरा गांधी के समय में 20 कार्यक्रमों की एडवाइजरी जारी की गई थी. ठीक है ऐसा होना चाहिए, लेकिन उस पर कोई आर्डर नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि जिस तरीके से विपक्ष कह रहा है कि मुस्लिम वोट को साधने के लिए अरविंद केजरीवाल ने इस तरीके का ब्यौरा तैयार करने को कहा है. इसमें बिल्कुल सच्चाई नहीं है. यह बेबुनियाद है.
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First published: July 27, 2019, 6:07 PM IST
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