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दिल्ली में 14 लाख से ज्यादा लोगों का नहीं आया बिजली का बिल, ये है वजह

विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: October 11, 2019, 4:10 PM IST
दिल्ली में 14 लाख से ज्यादा लोगों का नहीं आया बिजली का बिल, ये है वजह
जिनकी बिजली खपत की यूनिट 200 या उससे कम रहेगी उन्हें बिजली का बिल जमा नहीं करना होगा ये घोषणा सीएम अरविंद केजरीवाल ने की थी. (File Photo)

दिल्ली विधानसभा 2020 (Delhi Assembly Election 2020) के आने वाले चुनाव और 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली (Free Electricity) की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं. शुरु से ही सीएम अरविंद केजरीवाल (CM Arvind kejriwal) की इस योजना को एक चुनावी स्टंट के तौर पर देखा जा रहा था.

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  • Last Updated: October 11, 2019, 4:10 PM IST
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दिल्ली के 14 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं का इस बार बिल जीरो आया है. ये वो उपभोक्ता हैं, जिन्होंने महीने में दो सौ यूनिट से कम बिजली खर्च की और अब इसके लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा. दिल्ली सरकार का दावा है कि अगले महीने ये संख्या और ज्यादा बढ़ेगी और दिसंबर आते आते दिल्ली के 60 से 70 फीसदी बिजली उपभोक्ताओं को कोई बिल नहीं आएगा. यानी इसका सीधा फायदा दिल्ली की 60 से 70 फीसदी आबादी को मिलने लगेगा. अगले साल की शुरुआत में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होना है. जाहिर है कि ऐसे में अगर दिल्ली सरकार के मुफ्त बिजली का ये दावा इतनी बड़ी आबादी के लिए हकीकत में बदल गया, तो चुनाव के दौरान विरोधियों को इसका करंट लग सकता है.

दिल्ली के मौसम में सर्दी का आगाज होने ही वाला है, इसी के साथ दिल्ली के चुनावी मौसम की गर्मी भी आहट दे देगी. अभी चुनाव आयोग ने दिल्ली में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि अगले साल फरवरी में दिल्ली के चुनाव हो सकते हैं. दिल्ली सरकार ने अगस्त में घोषणा की थी कि दिल्ली में दो सौ यूनिट से कम बिजली खर्च करने वालों से कोई बिल नहीं लिया जाएगा और उन्हें ये बिजली मुफ्त दी जाएगी. चुनाव से तीन-चार महीने पहले उसका नतीजा भी सामने आने लगा है.

दिल्ली सरकार का दावा है कि इस बार 14 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं (यानी करीब 28 फीसदी कुल उपभोक्ताओं) का बिजली बिल जीरो आया है क्योंकि उन्होंने दो सौ यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल की है. अब दिल्ली में सर्दी का मौसम शुरू होने वाला है. सर्दियों के मौसम में बिजली की खपत गर्मियों के मुकाबले कम हो जाती है. यानी जैसे जैसे सर्दी बढ़ेगी, मुफ्त बिजली पाने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी. चुनाव से ठीक पहले यानी दिसंबर और जनवरी में दिल्ली में सर्दी अपने शबाब पर होती है. यानी की तापमान सबसे कम इन्हीं महीनों में रहता है.

दिल्ली सरकार का अनुमान है कि उन महीनों में मुफ्त बिजली का फायदा दिल्ली की 60 से 70 फीसदी आबादी को सीधे तौर पर मिलेगा. अगर ऐसा हुआ, तो दिल्ली की आम आदमी पार्टी के राजनीतिक विरोधियों के लिए मुश्किलें हो सकती हैं. जब आम जनता वोट डालने जाएगी, तो उनके जेहन में मुफ्त बिजली की यादें बिल्कुल तरोताजा होंगी और उसका असर वोटिंग पर हो सकता है.

दिल्ली में यूं तो त्रिकोणीय मुकाबला होता है. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के सामने बीजेपी और कांग्रेस मैदान में होंगी. पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली से कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ कर दिया था. कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि बीजेपी सिर्फ तीन सीटे जीतने में कामयाब रही थी. 67 सीट जीतकर आम आदमी पार्टी ने इतिहास बना दिया था.

इस बार की बात करें तो मुख्य मुकाबला बीजेपी से होने की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस अपना प्रदर्शन सुधारने की कोशिश करेगी. आम आदमी पार्टी को लगता है कि उनका मुकाबला बीजेपी से ही होगा. लोकसभा चुनाव के दौरान जो वोट कांग्रेस की तरफ चले गए थे, वो विधानसभा में दोबारा उनके पास लौटेंगे. पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह का कहना है कि लोकसभा चुनाव में जनता ने देश की गद्दी देखकर वोट दिए थे, जबकि विधानसभा में वो दिल्ली की सरकार और होने वाले मुख्यमंत्री को देखकर वोट देंगे.

दिल्ली की राजनीति मेंं पूर्वांचली वोटों का भी बड़ा महत्व है. कहा जाता है कि दिल्ली की दो दर्जन सीटों पर पूर्वांचली वोट किसी को भी हराने-जीताने की ताकत रखते हैं. इसी कारण दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जब पिछले दिनों एनआरसी के मसले पर दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी को लेकर बयान दिया था, तो बीजेपी ने उसे काफी उठाने की कोशिश की थी.
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जबकि पूर्वांचली वोट के महत्व को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने उस पर उसके बाद कोई ज्यादा बयानबाजी नहीं की. हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी सत्ता में है, लेकिन सरकार के कामकाज से ज्यादा बड़े मुद्दे राष्ट्रवाद, 370 आदि होते जा रहे हैं. लगता है कि राजनीतिक तौर पर बीजेपी राष्ट्रीय मुद्दों को दिल्ली के चुनाव में भी उठाने की कोशिश करेगी.

ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रवाद और आम आदमी पार्टी के बिजली-पानी के बिलों के बीच भी मुकाबला हो सकता है. आम आदमी पार्टी चुनावों में संदेश देने की कोशिश करेगी कि देश के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को दिल्ली की जनता ने लोकसभा में वोट दिए. लेकिन अब चुनाव दिल्ली का है, दिल्ली के लोगों के लिए सस्ते बिजली पानी, अच्छे स्कूल-अस्पतालों का है.

आम आदमी पार्टी जानती है कि पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता इस समय देश में उफान पर है. यही कारण भी है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से पीएम मोदी को लेकर किसी तरह का बयान नहीं दिया है. चुनावी नतीजों के बाद से उनके काम करने के तरीके में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. साफ दिख रहा है कि टकराव की राजनीति जो शुरुआत में उनकी पार्टी की पहचान बन गई थी, अब वो उससे अलग होते हुए सिर्फ अपना काम करते हुए दिखना चाहते हैं.

ऐसे में साफ है कि बीजेपी की कोशिश होगी कि चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों की तरफ बढ़े, लेकिन आम आदमी पार्टी उन्हें स्थानीय और छोटे मुद्दों की तरफ ले जाने की कसरत करेगी. चुनावी मौसम के गर्म होने में अभी कुछ समय लगेगा. लेकिन आम आदमी पार्टी मुफ्त बिजली-पानी के जीरों बिलों से विपक्ष को करंट देने की कोशिश करेगी, तो बीजेपी राष्ट्रवाद और मजबूत सरकार के दावों से उस करंट को बेअसर करने की.

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First published: October 11, 2019, 4:10 PM IST
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