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OPINION: केजरीवाल के पास दिखाने-बताने को बहुत कुछ तो BJP का भरोसा पीएम नरेन्द्र मोदी

भूपेंद्र चौबे | News18Hindi
Updated: January 17, 2020, 11:51 AM IST
OPINION: केजरीवाल के पास दिखाने-बताने को बहुत कुछ तो BJP का भरोसा पीएम नरेन्द्र मोदी
समय बीतने के साथ-साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ती जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बीजेपी (BJP) के एक स्थानीय नेता को आगे नहीं बढ़ाने और अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के राष्ट्रीय या फिर राष्ट्रवाद की राजनीति में नहीं फंसने से दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में कांटे की टक्कर होने की संभावना है.

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  • Last Updated: January 17, 2020, 11:51 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) की सरगर्मी अपनी चरम सीमा पर है. जहां भी जाइए चारों तरफ आपको अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के पोस्टर देखने को मिलेंगे. केजरीवाल जी का कहना है कि ‘5 साल बेमिसाल’, वहीं मोदी जी का कहना है- ‘दिल्ली चले मोदी के साथ. मोदी है तो मुमकिन है.’ क्या पिछले छह-सात महीनों में आम आदमी पार्टी ने जो अपना स्थान लोकसभा चुनाव में खोया था, उसे वापस पाने में सक्षम है? हमने दिल्ली में कई लोगों से बात की. जानकारों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी का दिल्ली में एक चेहरा न दे पाना, शायद उनकी अपनी मजबूरी दर्शाता है. आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को भुनाने में लगी है.

क्या दिल्ली का यह चुनाव मोदी बनाम केजरीवाल है
दिल्ली का चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जाना तय है. भारतीय जनता पार्टी इस प्रयास में जरूर लगी है कि किसी तरीके से स्थानीय मुद्दों के बजाय दिल्ली विधानसभा का भी चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा जाए. जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के जो धरना-प्रदर्शन हुए क्या उनका असर दिल्ली के चुनाव पर पड़ेगा? आम आदमी पार्टी का अपना दावा है कि लोग उनको वोट इसलिए देंगे, क्योंकि उन्होंने महिलाओं के लिए बस में फ्री में सफर शुरू कराया है.

बात चाहे फ्री बिजली की हो या फिर फ्री पानी की, सच्चाई यह है कि आम आदमी पार्टी का यह पूरा चुनाव पिछले 5 साल के कार्यकाल की एक रिपोर्ट कार्ड की तरह है. वहीं भाजपा का आरोप है कि केजरीवाल जी बोलते ज्यादा हैं और करते कम हैं. जबसे केजरीवाल जी ने अन्ना हजारे से आगे बढ़कर आम आदमी पार्टी बनाई तब से वे लगातार अपने आप को भारतीय राजनीति का सबसे साफ सुथरा नेता मानते हैं, लेकिन यह भी मानना पड़ेगा कि यही केजरीवाल जी हैं, जो कभी शरद पवार के साथ रहते हैं तो कभी लालू यादव के साथ या फिर कभी ममता बनर्जी के साथ दिखते हैं.



भ्रष्टाचार बनेगा मुद्दा?
केजरीवाल का कहना है कि उन्होंने देश को भ्रष्टाचार से निपटना सिखाया है. हाल ही में लोकल सर्किल पोलिंग एजेंसी ने एक सर्वे किया. उसमें यह दर्शाया गया कि 46% लोगों ने दिल्ली में अपने काम के लिए सरकारी अफसर को घूस दी है, लेकिन यह घूस या तो पुलिस को दी गई या फिर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए दी गई है. सर्वे में यह भी बताया गया कि पूरे देश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार पर जो कार्रवाई हुई है या कमी आई है तो वह दिल्ली में ही आई है, लेकिन सवाल यह है कि लोग दिल्ली विधानसभा में क्या सोच कर वोट देते हैं? क्या वे बिजली-सड़क-पानी नाला को देखकर वोट देते हैं या फिर वह मजबूत नेतृत्व को देखकर वोट देते हैं. आम आदमी पार्टी का दावा है कि मोहल्ला क्लीनिक हो या फिर दिल्ली के सरकारी स्कूल, जिस प्रकार का काम पार्टी ने क्षेत्र में किया है. आप समर्थकों का दावा है कि इन सब का फायदा होगा.बड़बोलेपन का आरोप चलेगा?
भाजपा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने बड़बोलापन दिखाया है. फिलहाल जो चुनावी माहौल बनता दिखता है, उस माहौल में भाजपा का एक स्थानीय नेता को आगे न बढ़ाना और अरविंद केजरीवाल का राष्ट्रीय या फिर राष्ट्रवाद की राजनीति में न फंसना, दोनों दलों का अपना-अपना पक्ष दर्शाता है. इस माहौल में फिलहाल यह दिखता है कि केजरीवाल के पास अपना किया दिखाने और बताने के लिए बहुत कुछ है. इस तरह से फिलहाल लड़ाई भाजपा और आप के बीच ही होती दिखती है.

कहां खड़ी है कांग्रेस
आकस्मिक घटना नहीं घटती तो यह एक द्विपक्षीय चुनाव दिखता है जो आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच है. कांग्रेस पार्टी लड़ाई में फिलहाल काफी पीछे दिखती है. सुभाष चोपड़ा जिनको दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. लेकिन यह भी एक अहम खबर है कि कांग्रेस के अपने ही नेता इस बार चुनाव लड़ना नहीं चाहते. उन्हें लगता है कि केजरीवाल को टक्कर देना फिलहाल उनके बस की बात नहीं है. हां यह एक बात जरूर है कि अगर लड़ाई तिकोनी होती है यानी कांग्रेस भी इस लड़ाई में मजबूत होती है तब बीजेपी को फायदा हो सकता है.

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First published: January 16, 2020, 8:05 PM IST
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