दिल्ली चुनाव से पहले PM मोदी के खिलाफ केजरीवाल ने अपनाई यह रणनीति

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Updated: August 19, 2019, 3:19 PM IST
दिल्ली चुनाव से पहले PM मोदी के खिलाफ केजरीवाल ने अपनाई यह रणनीति
लोकसभा चुनाव के बाद से ही अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ अपनी रणनीति में बदलाव की शुरुआत कर दी थी. (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के नतीजों और केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए (Article 370 And 35A) को निरस्त करने के फैसले के बाद से देश का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है.

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रूपाश्री नंदा
लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के नतीजों और केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए (Article 370 And 35A) को निरस्त करने के फैसले के बाद देश का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है. इसका असर सीपीएम (CPM), आम आदमी पार्टी (AAP) से लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) तक पर पड़ा है.

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) समय रहते ही सचेत हो गई हैं. वे प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के पास नई रणनीति के लिए पहुंच चुकी हैं. वहीं आम चुनावों का सबसे ज्यादा असर आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर दिख रहा है. एक समय में प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) और बीजेपी (BJP) के सामने प्रमुख विपक्षी के तौर पर देखे जाने वाली पार्टी की जमीन खिसकती हुई नजर आ रही है. बदलते परिदृश्य से मुकाबले के लिए अब केजरीवाल ने नई रणनीति बनाई है.

आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव काफी अहम

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद आम आदमी पार्टी को आने वाले महीनों में दिल्ली में काफी महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव लड़ना है. आम चुनाव में मिली हार तो एक बात है. आप के लिए चिंता का विषय यह है कि पार्टी के उम्मीदवार दिल्ली में भारी अंतरों से हारे. सात में से पांच सीटों पर आलम ये रहा कि प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई.

आप के वोट शेयर में आई है भारी कमी
बीजेपी से हारना एक अलग किस्सा है लेकिन हालत यह हो गई है कि पार्टी को कांग्रेस से भी कम वोट मिले. 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में 54 प्रतिशत वोट के साथ 70 में से 67 सीट जीतने वाली पार्टी की हालत ऐसी क्यों और कैसे हो गई, जबकि पार्टी के पास एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री भी हैं? 2014 लोकसभा चुनाव में आप को 33 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन 2019 में पार्टी को मात्र 18 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. वहीं 2014 के मुकाबले बीजेपी के वोट शेयर में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई और पार्टी को इस बार 57 प्रतिशत वोट मिले.
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अरविंद केजरीवाल ने बदली अपनी रणनीति
एक समय में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले दिल्ली सीएम अब ज्यादातर मामलों पर या तो चुप्पी साध लेते हैं या बीजेपी के स्टैंड से मिलता ही उनकी पार्टी का भी स्टैंड होता है. हाल में आर्टिकल 370 के मामले पर भी यही स्थिति रही. इसके अलावा, व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ा बदलाव अरविंद केजरीवाल की तरफ से पीएम मोदी और केंद्र सरकार के लिए नजर आया. दिल्ली सीएम के जन्मदिन पर पीएम ने शुभकामनाएं दी थी. इस पर रिप्लाई देते हुए केजरीवाल ने लिखा, 'शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद प्रधानमंत्री सर.' यह अपने आप में एक बड़े बदलाव का संकेत था.

Arvind Kejriwal New Strategy Against PM Modi
आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)


हिंदू पहचान को स्थापित करने की कोशिश
अरविंद केजरीवाल अपनी हिंदू पहचान को लेकर भी अब सजग हो गए हैं. लोकसभा चुनाव परिणाम के 12 दिन बाद केजरीवाल ने 'स्वामी नारायण भगवान का अभिषेक' कैप्शन के साथ ट्विटर पर अपनी फोटो शेयर की थी. इसके अलावा पार्टी के ट्विटर हैंडल से डाले गए 'अभिषेक' की अन्य तस्वीरों को भी रीट्वीट किया था. वहीं 4 जुलाई को ईद के मौक पर केजरीवाल ने अनमने ढंग से बगैर किसी फोटो के ईद की बधाई दी. कठुआ रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उन्होंने स्वागत किया. लेकिन इसके बाद पहलू खान मॉब लिंचिंग केस पर आए कोर्ट के फैसले पर उन्होंने चुप्पी साध ली.

इसके साथ ही आम आदमी पार्टी सरकार की महत्वकांक्षी तीर्थ योजना का प्रचार प्रसार भी खूब किया जा रहा है. तीर्थयात्रियों के एक जत्थे के साथ 20 जुलाई को दिल्ली सीएम केजरीवाल खुद जाने वाले थे लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के बाद इसे स्थगित कर दिया गया. वहीं महिलाओं के लिए फ्री बस सर्विस की घोषणा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की गई. संयोग बस इसी दिन रक्षाबंधन भी था. सरकार की घोषणाओं के मुताबिक, इस योजना को भाई दूज के दिन से लागू किया जाएगा.

मूल लेख (अंग्रेजी) को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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First published: August 19, 2019, 2:30 PM IST
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