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विधानसभा चुनाव 2019: क्यों धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं छोटे राजनीतिक दल

Anil Rai
Updated: October 17, 2019, 11:58 AM IST
विधानसभा चुनाव 2019: क्यों धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं छोटे राजनीतिक दल
देश की राजनीति में कागजों पर 1700 पार्टियां दर्ज हैं लेकिन सिर्फ पांच ही राजनीतिक दल ऐसे हैं जो देश की राजनीति में सक्रिय रहकर लोकतंत्र में सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं

पहले ये राजनीतिक दल बड़े दलों को दबाव में लेकर 1-2 लोकसभा और कुछ विधानसभा सीटें गठबंधन के सहारे जीत लेते थे, लेकिन जैसे-जैसे देश की राजनीतिक में बीजेपी मजबूती से उभर रही है इन राजनीतिक दलों की दबाव की राजनीति खत्म होती दिख रही है.

  • Last Updated: October 17, 2019, 11:58 AM IST
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नई दिल्ली. देश की चुनावी राजनीति (Election Politics) से क्या छोटे राजनीतिक दलों (Small Political Parties) का भविष्य खत्म हो रहा है, ये सवाल उठा है भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा (JP Nadda) के एक बयान के बाद. महाराष्ट्र (Maharashtra) के नांदेड़ में जे पी नड्डा ने भारतीय लोकतंत्र (Indian Democracy) की चर्चा करते हुए कहा कि देश की राजनीति (Indian Politics) में भले ही कागजों पर 1700 पार्टियां दर्ज हों लेकिन सिर्फ पांच ही राजनीतिक दल ऐसे हैं जो देश की राजनीति में सक्रिय रहकर लोकतंत्र में सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं. जे पी नड्डा ने भले ही यह बात अब कही हो लेकिन देश की राजनीति को करीब से देखें तो 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के समय और उसके बाद से ही छोटे राजनीतिक दलों का प्रभाव खत्म होता जा रहा है. पहले ये राजनीतिक दल बड़े दलों को दबाव में लेकर 1-2 लोकसभा और कुछ विधानसभा सीटें गठबंधन के सहारे जीत लेते थे, लेकिन जैसे-जैसे देश की राजनीतिक में बीजेपी मजबूती से उभर रही है इन राजनीतिक दलों की दबाव की राजनीति खत्म होती दिख रही है.

छोटे दलों के कमजोर होने से आएगी राजनीतिक स्थिरता
देश की राजनीति में छोटे दलों की भूमिका की बात करें तो जब-जब ये छोटे दल मजबूत होते हैं देश की राजनीति में अस्थिरता देखने को मिलती है. वर्ष 1989 से लेकर 2014 तक इन छोटे दलों ने लगातार दिल्ली की सरकार (केंद्र सरकार) को कमजोर रखा लेकिन धीरे-धीरे अब छोटे दलों का प्रभाव कम हो रहा है. बात करें उन राज्यों की जहां अभी विधानसभा चुनाव चल रहे हैं तो वहां छोटे दल हाशिये पर हैं. महाराष्ट्र में कभी सब पर दबाव बनाने वाली राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र निर्माण सेना (एमएनएस) इस बार अलग-थलग पड़ी है, जबकि पिछले चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन से सीटों को लेकर मोलभाव करने वाले आरपीआई, आरएसपी, शिवसंग्राम जैसी पार्टियां अपना अस्तित्व बचाने के लिए बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं.

news - बीजेपी नेतृत्व पार्टी के किसी भी नेता के बेटा-बेटी को हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं देना चाहती है
वर्ष 2014 में देश में बीजेपी का प्रभाव बढ़ने के बाद छोटे दलों की दबाव की राजनीति खत्म होनी शुरू हो गई


कुछ यही हाल हरियाणा का भी है, जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय दलों ने इस बार किसी भी क्षेत्रीय दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से परहेज किया है. इन दोनों राज्यों के बाद झारखंड में भी विधानसभा चुनाव होना है जहां बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) अलग-थलग पड़ी हुई है. कुछ यही हाल बिहार में भी है, पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य में खासा प्रभाव रखने वाली उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी), पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और मुकेश सहनी की वीआईपी अब बिहार की राजनीति में हाशिए पर हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए से पाला बदल कर महागठबंधन में जाने वाले इन दलों का चुनाव में खाता भी नहीं खुल पाया और अब राज्य में हो रहे उपचुनावों में आरजेडी ने इनसे बात करना भी मुनासिब नहीं समझा.

मोदी के सत्ता में आने के बाद कम हुई दबाव की राजनीति
दरअसल वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी की दिल्ली की राजनीति में दमदार इंट्री के बाद छोटे दलों के दबाव की राजनीति धीरे-धीरे खत्म होने लगी, और 2019 आते-आते वो पूरी तरह खत्म हो गई. इसका उदाहरण देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के दौरान देखने को मिला जब बीजेपी ने 2017 का विधानसभा चुनाव साथ में लड़ने वाली ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव समाज पार्टी का हाथ झटक दिया. ओम प्रकाश राजभर लगातार सरकार पर अपनी गलत मांगों को मनवाने के लिए दबाव बना रहे थे, वहीं लोकसभा और विधानसभा चुनाव में साथ रहने वाले अपना दल को इस बार केंद्र और राज्य किसी सरकार में हिस्सेदारी नहीं मिली. यहां तक कि अपना दल कोटे से खाली हुई विधानसभा सीट पर भी बीजेपी ने उपचुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा कर बीजेपी ने साफ संकेत दिया कि वो छोटे दलों के दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाली नही है.

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First published: October 17, 2019, 11:35 AM IST
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