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अयोध्या पर जवाहरलाल नेहरू का आदेश टालने वाले IAS अफसर की पूरी कहानी!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 10:12 AM IST
अयोध्या पर जवाहरलाल नेहरू का आदेश टालने वाले IAS अफसर की पूरी कहानी!
केरल के अलेप्पी के रहने वाले केके नायर 1930 बैच के आईसीएस अफ़सर थे

Ayodhya Ram Mandir Case: 1949 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आदेश के बाद भी अयोध्या के विवादित स्थल से रामलला की मूर्तियां न हटवाने वाले फैजाबाद के डीएम केके नायर हिंदुत्व के बड़े प्रतीक बन गए थे. इसी की बदौलत नायर और उनकी पत्नी दोनों को जनता ने संसद पहुंचा दिया. उनका ड्राइवर उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य बना.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 10:12 AM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya land dispute) को लेकर आज 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) अपना फैसला सुनाएगा. इतिहास के सबसे लंबे विवाद पर आने वाले फैसले का पूरा देश इंतजार कर रहा है. इस बीच हम अपने पाठकों को मामले से जुड़े रहे लोगों से रूबरू करवा रहे हैं. ऐसे ही लोगों में शामिल थे फैजाबाद के डीएम केके नायर (K.K Nayar). अयोध्या के विवादित स्थल पर रखी गईं रामलला की मूर्तियों को हटवाने के लिए उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) ने उन्हें दो बार आदेश दिया लेकिन नायर ने दोनों बार उनके आदेश का पालन करवाने में असमर्थता जताकर बड़े हिंदूवादी चेहरे के रूप में पहचान बनाई.

डीएम और उनकी पत्नी ने बाद में चुनाव लड़ा और दोनों लोकसभा पहुंचे जबकि उनका ड्राइवर भी इस इमेज का फायदा उठाकर यूपी विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहा.

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विवादित स्थल पर रखी गईं रामलला की मूर्तियों को हटवाने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने दो बार आदेश दिए थे (फाइल फोटो)


जब मूर्तियां रखी गईं! 

वर्ष 1949 में 22 और 23 दिसंबर की आधी रात मस्जिद (Masjid) के अंदर कथित तौर पर चोरी-छिपे रामलला की मूर्तियां रख दी गईं. अयोध्या में शोर मच गया कि जन्मभूमि में भगवान प्रकट हुए हैं. मौके पर तैनात कॉन्स्टेबल के हवाले से लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस घटना की सूचना कॉन्स्टेबल माता प्रसाद ने थाना इंचार्ज राम दुबे को दी. ‘50-60 लोगों का एक समूह परिसर का ताला तोड़कर, दीवारों और सीढ़ियों को फांदकर अंदर घुस आया और श्रीराम की प्रतिमा स्थापित कर दी. साथ ही उन्होंने पीले और गेरुआ रंग में श्रीराम लिख दिया.’

दक्षिण के निवासी ने उत्तर में बनाई पहचान

‘युद्ध में अयोध्या’ नामक अपनी किताब में हेमंत शर्मा ने मूर्ति से जुड़ी एक दिलचस्प घटना का जिक्र किया है. उनके मुताबिक, 'केरल के अलेप्पी के रहने वाले के.के नायर 1930 बैच के आईसीएस अफसर थे. फैजाबाद के जिलाधिकारी रहते इन्हीं के कार्यकाल में बाबरी ढांचे में मूर्तियां रखी गईं या यूं कहें इन्होंने ही रखवाई थीं. बाबरी मामले से जुड़े आधुनिक भारत के वो ऐसे शख्स हैं जिनके कार्यकाल में इस मामले में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया और देश के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने पर इसका दूरगामी असर पड़ा.'
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'नायर 1 जून 1949 को फैजाबाद के कलेक्टर बने. 23 दिसंबर, 1949 को जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में स्थापित हुईं तो उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत से फौरन मूर्तियां हटवाने को कहा. उत्तर प्रदेश सरकार ने मूर्तियां हटवाने का आदेश दिया, लेकिन जिला मजिस्ट्रेट केकेके नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई.'

पति-पत्नी दोनों बने सांसद

शर्मा लिखते हैं, 'जब नेहरू ने दोबारा मूर्तियां हटाने को कहा तो नायर ने सरकार को लिखा कि मूर्तियां हटाने से पहले मुझे हटाया जाए. देश के सांप्रदायिक माहौल को देखते हुए सरकार पीछे हट गई. डीएम नायर ने 1952 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) ले ली. चौथी लोकसभा के लिए वो उत्तर प्रदेश की बहराइच सीट से जनसंघ के टिकट पर लोकसभा पहुंचे. इस इलाके में नायर हिंदुत्व के इतने बड़े प्रतीक बन गए कि उनकी पत्नी शकुंतला नायर भी कैसरगंज से तीन बार जनसंघ के टिकट पर लोकसभा पहुंचीं. बाद में उनका ड्राइवर भी उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य बना.'

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विवादित स्थल से मूर्तियां न हटाए जाने के खिलाफ मुसलमानों में तीखी प्रतिक्रिया हुई. उन्होंने इसका विरोध किया. दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया. फिर सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर के ताला लगा दिया.

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First published: November 8, 2019, 11:22 AM IST
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