तो क्या 2019 के लोकसभा चुनाव में आरक्षण बनाम आरक्षण होगा मुद्दा?

मोदी सरकार की मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उठाए सवाल- 55 फीसदी आबादी को सिर्फ 27 फीसदी आरक्षण क्यों? जातीय जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग ने पकड़ा जोर

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: January 10, 2019, 10:14 PM IST
तो क्या 2019 के लोकसभा चुनाव में आरक्षण बनाम आरक्षण होगा मुद्दा?
ओबीसी सबसे बड़ा वोटबैंक हैं (demo pics)
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: January 10, 2019, 10:14 PM IST
मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10% आरक्षण देने संबंधी 124वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित करवा लिया. इसके साथ ही एक नई बहस शुरू हो गई है. ये बहस है जातीय जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक कर सबको उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षण  देने की. खुद सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल ने यह मांग उठाई. कुछ दिन पहले एनडीए छोड़कर यूपीए का दामन थामने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने भी जातियों की संख्या के हिसाब से आरक्षण मांगा. सियासी जानकारों का कहना है कि मोदी सरकार का यह दांव 2019 के लोकसभा चुनाव का मिजाज बदलेगा. चुनाव में सबसे ऊपर आरक्षण बनाम आरक्षण का का मुद्दा होगा. (ये भी पढ़ें: सवर्णों के दस फीसदी आरक्षण की चर्चा के बीच कैसे आ गया 'मुंगेरीलाल')

राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया का कहना है कि सरकार ने आरक्षण का जिन्न बोतल से निकाल दिया है, अब यह क्या-क्या करेगा कुछ कहा नहीं जा सकता. लेकिन इतना कहा जा सकता है कि इसे वापस बोतल में बंद करना मुश्किल होगा. देखिए अब आरक्षण से जुड़ी किस-किस तरह की मांग होती है, कौन-कौन उठाता है. निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की मांग उठ रही है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि सरकारी नौकरियां कितनी हैं? इस सवाल का जवाब मिले बिना आरक्षण का कोई मतलब नहीं है.

Constitutional Status to OBC Commission, Lok Sabha, SC/ST act, पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा, लोकसभा, एससी/एसटी एक्ट, ओबीसी, OBC Politics, sub-categorisation of Other Backward Classes, CSDS, Narendra Modi, BJP, ओबीसी राजनीति, अन्य पिछड़ा वर्ग, ओबीसी, सीएसडीएस, नरेंद्र मोदी, बीजेपी, ओबीसी में वर्गीकरण, dalit politics, Loksabha election 2019,BSP,supreme court,Mayawati,दलित पॉलिटिक्स, लोकसभा चुनाव 2019, बीएसपी, मायावती,          राज्यवार ओबीसी आबादी

दिल्ली यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार का कहना है कि आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के बाद अब सरकार पर जातीय जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव बनेगा. ओबीसी समुदाय, जिसे उसकी आबादी के अनुपात में लगभग आधा ही आरक्षण मिला हुआ है वह अब अपने पूरे हक के लिए मांग करने लग गया है. लोकसभा में मुद्दा उठ रहा है.(ये भी पढ़ें: मोदी सरकार ने क्यों चला सवर्णों को आरक्षण का दांव, क्या संविधान देता है इजाजत? )

24 अकबर रोड के लेखक रशीद किदवई कहते हैं कि ओबीसी और दलित समुदाय में ये बेचैनी है कि कहीं आगे चलकर आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक से हटाकर आर्थिक न कर दिया जाए. गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भी ऐसी की आशंका जाहिर करता हुआ एक ट्विट किया है.



बीजेपी के बागी सांसद ने मांगा 100 फीसदी आरक्षण

हरियाणा के कुरुक्षेत्र से बागी भाजपा सांसद राजकुमार सैनी तो काफी पहले से जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग उठा रहे हैं. उनकी मांग जातीय जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक कर 100 फीसदी आरक्षण की है. उन्होंने कहा है कि हर परिवार में एक नौकरी  मिले. जानकारों का कहना है कि आरक्षण पर सहयोगी दलों का परस्पर विरोधी रुख बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है.

 upper caste reservation, 10% upper caste reservation, modi govt, narendra modi, indian constitution, dalit, SC ST, upper caste protest, amit shah, 2019 loksabha election, गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण, सवर्ण आरक्षण, सवर्ण जातियां, दलित, अनुसूचित जाति जनजाति आरक्षण, संविधान में आरक्षण, मोदी सरकार, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, लोकसभा चुनाव 2019, obc politics, BJP, reservation for backward Caste, ओबीसी पॉलिटिक्स, बीजेपी, भाजपा, ओबीसी रिजर्वेशन,          केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल (फाइल फोटो)

अनुप्रिया का तंज, 50 प्रतिशत का अघोषित आरक्षण था

मंगलवार (8 जनवरी) को अनुप्रिया पटेल ने शुरुआत में इस बिल पर सरकार का समर्थन किया. लेकिन अगले ही पल उन्होंने तंज भी कसना शुरू कर दिया. कहा कि 50 प्रतिशत का अनारक्षित हिस्‍सा असल में एक तरह का अघोषित आरक्षण हुआ करता था, जो केवल सामान्य वर्ग के लिए हुआ करता था. अब उस आरक्षण में भी गरीब को हिस्‍सेदारी मिलेगी. उन्होंने सवाल किया कि क्या ओबीसी के जातिगत जनगणना के आंकड़े आने के बाद पिछड़ों को आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलेगा?

पटेल ने इस पर चिंता जाहिर की कि कि पिछड़ों की आबादी 55 प्रतिशत है, लेकिन उन्‍हें केवल 27 फीसदी आरक्षण ही दिया गया है. कई ऐसे राज्य हैं जहां पिछड़ों को मिलने वाला आरक्षण पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है. मध्‍य प्रदेश में ओबीसी को 27 की जगह‍ 14 फीसदी आरक्षण ही मिल रहा है. उन्होंने सरकार से पूछा कि जिन राज्यों में आबादी के अनुपात में आरक्षण नहीं है, क्या उसको लेकर सरकार कोई प्रावधान नहीं करेगी? क्‍या प्राइवेट सेक्‍टर में भी आरक्षण दिया जाएगा?

‘जातीय जनगणना की रिपोर्ट प्रकाशित होनी चाहिए’

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने लोकसभा में कहा, संविधान में 50 फीसदी आरक्षण का जो बैरियर है उसे तोड़ा जाना चाहिए. कहा कि जातीय जनगणना, सामाजिक जनगणना और आर्थिक जनगणना हुई है उसकी रिपोर्ट प्रकाशित होनी चाहिए. ओबीसी की जितनी संख्या है उसके अनुपात में जितना आरक्षण मिलना चाहिए वो देना चाहिए. कुशवाहा ने कहा कि उनके क्षेत्र के सवर्ण युवक उन्हें आरक्षण वाला मंत्री कहते थे.

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सरकार को सभी पदों पर असमानता दूर करने की आवश्यकता है. आबादी के हिसाब से समाज के सभी वर्गों को आरक्षण की जरूरत है.

 upper caste reservation, 10% upper caste reservation, modi govt, narendra modi, indian constitution, dalit, SC ST, upper caste protest, amit shah, 2019 loksabha election, गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण, सवर्ण आरक्षण, सवर्ण जातियां, दलित, अनुसूचित जाति जनजाति आरक्षण, संविधान में आरक्षण, मोदी सरकार, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, लोकसभा चुनाव 2019, obc politics, BJP, reservation for backward Caste, ओबीसी पॉलिटिक्स, बीजेपी, भाजपा, ओबीसी रिजर्वेशन,          आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा

85 फीसदी के लिए 90 फीसदी हो आरक्षण

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार द्वारा सवर्ण वर्ग को दस फीसदी आरक्षण देने के निर्णय पर मांग की कि पहले केंद्र जातीय-आर्थिक जनगणना की रिपोर्ट को जारी करे, ताकि यह पता तो चले कि 51 फीसदी मजदूर किस जाति के हैं?  उन्होंने कहा कि जब 15 फीसदी सवर्ण को 10 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है तो 85 फीसदी दलित-शोषित एवं पिछड़ों के लिए 90 फीसदी आरक्षण भी देना चाहिए.

मायावती का स्टैंड

बसपा सुप्रीमो ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के फैसले का समर्थन किया है लेकिन ये भी कहा है कि देश में अभी तक SC/ST, OBC को जो 49.5 फीसदी आरक्षण मिलता है उसकी समीक्षा करने की आवश्यकता है. तर्क दिया है कि लगातार जनसंख्या बढ़ रही है ऐसे में जातियों का अनुपात भी बढ़ रहा है, इसलिए समीक्षा की जरूरत है. बढ़ी हुई आबादी के आधार पर ही आरक्षण का अनुपात भी बढ़ना चाहिए, इसके लिए नई संवैधानिक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें:

दलितों, पिछड़ों के ये नेता सवर्णों के लिए क्यों मांग रहे थे आरक्षण?

 

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Delhi से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 9, 2019, 2:30 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...