CM केजरीवाल ने एक झटके में खत्‍म किया दशकों पुराना मुद्दा, AAP-BJP में श्रेय लेने की मची होड़

दिल्ली सरकार के लिए इन काॅलोनियों को नियमित करने का श्रेय लेना इतना आसान भी नहीं होगा. बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सालों से इस मुद्दे पर कोई कदम नहीं उठाया.

विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: July 21, 2019, 2:37 PM IST
CM केजरीवाल ने एक झटके में खत्‍म किया दशकों पुराना मुद्दा, AAP-BJP में श्रेय लेने की मची होड़
दिल्ली की राजनीति में कच्ची या अनाधिकृत कालोनियों का मुद्दा दशकों से हावी रहा है.
विक्रांत यादव
विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: July 21, 2019, 2:37 PM IST
दिल्ली में यूं तो विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी में होने हैं, लेकिन दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार तेज रफ्तार में आ गई है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को ऐलान किया कि राजधानी की सभी कच्ची काॅलोनियों में रहने वालों को जल्द ही मालिकाना हक दे दिया जाएगा, जिसके बाद इन काॅलोनियों की रजिस्ट्री खुल जाएगी. दिल्ली की राजनीति में कच्ची काॅलोनियों का मुद्दा सबसे बड़े मुद्दों में से एक है. इन काॅलोनियों में लाखों लोग रहते हैं. इसे देखते हुए इसे एक बड़ा चुनावी दांव कहा जा सकता है.

अगर अरविंद केजरीवाल सरकार के कामकाज पर नजर डाली जाए, तो साफ दिखाई देता है कि सरकार एक बहुत बड़े वोट बैंक को मजबूती से अपने साथ जोड़े रखने के मकसद से आगे बढ़ रही है. ये वोट बैंक है, दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों, कच्ची काॅलोनियों में रहने वाली दिल्ली की अधिसंख्य आबादी का. चाहे दिल्ली के सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर हो या फिर सस्ती बिजली-मुफ्त पानी का मामला हो, ये सभी इन काॅलोनियों में रहने वाले लोगों के जीवन से सीधे तौर पर जुड़ा है. अब कच्ची काॅलोनियों का मालिकाना हक, ये तो ऐसा मुद्दा है जिस पर दशकों से दिल्ली की राजनीति होती आई है.

दशकों से हावी रहा है अनाधिकृत काॅलोनियों का मुद्दा
दिल्ली की राजनीति में कच्ची या अनाधिकृत काॅलोनियों का मुद्दा दशकों से हावी रहा है. जबकि केजरीवाल सरकार ने एक जनवरी 2015 तक बसी काॅलोनियों को नियमित करने की बात कही है. करीब 1800 काॅलोनियों में से ज्यादातर सरकारी जमीन पर बसी हैं, तो करीब तीन सौ कालोनी निजी जमीनों पर बसी हुई है. आमतौर पर इन काॅलोनियों में रहने वाले लोग मालिकाना हक नहीं होने के अभाव में एक डर से जी रहे हैं. अगर इन्हें मालिकाना हक मिल गया, तो ये अपने घरों और इलाकों के विकास के बारे में सोच सकेंगे. सबसे बड़ी बात यहां के लाखों निवासियों को हमेशा के लिए उस भय से मुक्ति मिल जाएगी कि उन्हें कभी भी कच्ची या अनाधिकृत कालोनी से बेदखल किया जा सकता है. एक बार नियमित होने यानि यहां रह रहे लाखों लोगों को मालिकाना हक मिलने के बाद सरकार को यहां विकास कार्यों को रफ्तार देने में मदद मिलेगी.

केजरीवाल सरकार ने 1 जनवरी 2015 तक बसी काॅलोनियों को नियमित करने की बात कही है. दिल्‍ली में करीब 1800  काॅलोनियों में से ज्यादातर सरकारी जमीन पर बसी हैं.


इन काॅलोनियों में पानी की लाइनें, बिजली व्यवस्था बेहतर करने समेत तमाम ऐसी सुविधाएं हैं, जो आम पक्की काॅलोनियों में सरकार की जिम्मेदारी होती हैं, लेकिन कच्ची या अनाधिकृत काॅलोनियों होने के कारण ये अब तक उससे महरूम रहती थी. जाहिर है कि अगर चुनाव से पहले ये हो गया तो दिल्ली के चुनाव में ये सबसे बड़ा मुद्दा होने जा रहा है. 2008 में दिल्ली की तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार ने भी इन कालोनियों को नियमित करने का बड़ा दांव खेला था. उस समय तत्कालीन सरकार ने इन काॅलोनियों को नियमित करने के लिए प्रोविजनल सर्टिफिकेट भी जारी कर दिए थे, लेकिन उन पर लगने वाले डैमेज चार्ज, लैंड फीस आदी को लेकर मामला फंस गया था.

बीजेपी का दावा है कि इन कच्ची कालोनियों को नियमित करवाना उसका मुद्दा रहा है.

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केजरीवाल सरकार की झुग्गी बस्तियों और कच्ची काॅलोनियों पर रही खास नजर
अब बात करते हैं, दिल्ली सरकार के अन्य कदमों की, जो झुग्गी बस्तियों और कच्ची काॅलोनियों में रहने वाले लोगों के जीवन पर सीधा असर कर रहे हैं. केजरीवाल सरकार के अब तक के कार्यकाल में सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा व्यवस्था को सुधारने को लेकर हुई है. सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा इन्हीं कच्ची काॅलोनियों, झुग्गी बस्तियों में रहने वालों को हुई है. गरीब व्यक्ति जो अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में नहीं पढ़ा सकता, आज दिल्ली सरकार के स्कूलों की बदलती तस्वीर से उसे सबसे अधिक फायदा हो रहा है.

इसी तरह से सस्ती बिजली और 20 हजार लीटर तक पानी उपयोग करने वालों को नि:शुल्क देना इस वोट बैंक को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचा रहा है. दिल्ली के निचले और मध्यम इलाकों में रहने वाले कम आय वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से मोहल्ला क्लिनिक चलाए जा रहे हैं. इनका फायदा भी सबसे ज्यादा इसी वोट बैंक को मिल रहा है.

सरकार दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को नि:शुल्क यात्रा के प्रस्ताव पर भी गंभीरता से काम कर रही है.अगर किसी तरह से ये चुनाव से पहले लागू हो गया, तो पार्टी को उम्मीद है कि उसके वोट बैंक में बड़ा इजाफा होगा.


श्रेय लेने की मचेगी होड़
लेकिन दिल्ली सरकार के लिए इन काॅलोनियों को नियमित करने का श्रेय लेना इतना आसान भी नहीं होगा. बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सालों से इस मुद्दे पर कोई कदम नहीं उठाया. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले कार्यकाल की 7 मार्च को हुई आखिरी कैबिनेट बैठक में एक कमेटी बनाई गई थी, जिसे तीन महीने के भीतर इस संबंध में सभी संभावनाएं तलाशने को कहा गया था. कमेटी को ये कहा गया था कि वो ये बताए कि आखिर इन काॅलोनियों को किस तरह से नियमित किया जा सकता है. ये कमेटी दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में गठित हुई थी, जिसके बाद ही बात आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शहरी विकास मंत्रालय को दे दी, जिसके बाद कैबिनेट नोट तैयार हो रहा है.

बीजेपी का दावा है कि इन कच्ची काॅलोनियों को नियमित करवाना उसका मुद्दा रहा है और केंद्र सरकार के कारण ही इन काॅलोनियों के मामले में बात आगे बढ़ रही है. यानि साफ है कि अब आने वाले समय में जंग होगी, इस मामले में श्रेय लेने की और जो पार्टी श्रेय लेने यानी जनता के बीच ये विश्वास जताने में कामयाब हो गई कि इस फैसले के पीछे उनका योगदान है उसे इसका बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है.

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First published: July 18, 2019, 7:39 PM IST
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