दलित बोले, राम मंदिर को अयोध्‍या से स्‍थानांतरित नहीं किया जा सकता तो रविदास मंदिर को क्‍यों ?

ऑल इंडिया अंबेडकर महासभा के कार्यकारी अध्‍यक्ष राकेश बहादुर ने सवाल उठाया, 'जब भी अनुसूचित जातियों (Schedule Castes) के अधिकारों की बात आती है तो यह दोहरा मापदंड क्‍यों अपनाया जाता है. जो लोग हमसे मंदिर को पुनर्स्‍थापित करने के लिए कह रहे हैं ये वही लोग हैं जो कई दशकों से राम मंदिर के लिए आंदोलन कर रहे हैं. '

News18Hindi
Updated: August 22, 2019, 4:29 PM IST
दलित बोले, राम मंदिर को अयोध्‍या से स्‍थानांतरित नहीं किया जा सकता तो रविदास मंदिर को क्‍यों ?
संत रविदास मंदिर को लेकर दलितों ने उठाए सवाल.
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Updated: August 22, 2019, 4:29 PM IST
दिल्‍ली के तुगलकाबाद में संत रविदास मंदिर (Saint Ravidas Temple) को तोड़े जाने को लेकर रामलीला मैदान (Ramleela Maidan) में इकठ्ठा हुए दलित संगठन लगातार आक्रोश जाहिर कर रहे हैं. बुधवार को लाखों की संख्‍या में लोग हरियाणा, पंजाब, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थाान और अन्‍य राज्‍यों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आए. इस दौरान उनका कहना था कि अगर राम मंदिर (Ram Mandir) को अयोध्‍या (Ayodhya) से स्‍थानांतरित नहीं किया जा सकता तो रविदास के अनुयायी पांच सौ साल पुराने मंदिर के स्‍थानांतरण के लिए कैसे हामी भर दें.

ऑल इंडिया अंबेडकर महासभा के कार्यकारी अध्‍यक्ष राकेश बहादुर ने सवाल उठाया, 'जब भी अनुसूचित जातियों (Schedule Castes) के अधिकारों की बात आती है तो यह दोहरा मापदंड क्‍यों अपनाया जाता है. जो लोग हमसे मंदिर को पुनर्स्‍थापित करने के लिए कह रहे हैं ये वही लोग हैं जो कई दशकों से राम मंदिर के लिए आंदोलन कर रहे हैं. '

क्या मांग है दलितों की?
प्रदर्शन (Protest) कर रहे संगठनों की मांग थी कि अगर रविदास मंदिर को 26 नवंबर तक वापस उसी जगह स्‍थापित नहीं किया जाता है तो वे देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे. हालांकि दलित संगठनों का यह विरोध प्रदर्शन अपनी मुख्‍य मांग के बजाय प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के चलते खत्‍म हुआ.

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर हिरासत में
इस दौरान पुलिस ने भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद (Bhim Army chief Chandrashekhar Azad) के अलावा कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की. जबकि प्रदर्शन में शामिल दलित नेताओं ने प्रशासन पर ही हिंसा करने का आरोप लगाया. इस दौरान दलित अधिकार कार्यकर्ता अशोक भारती ने कहा कि उनका प्रदर्शन वास्‍तविक दर्द का परिणाम था. इसी प्रकार पिछले साल अप्रैल में हुए उनके भारत बंद को भी यही हिंसक रंग दे दिया गया था.

वहीं अन्‍य दलित कार्यकर्ता बिनॉय कोरिवि ने कहा कि संत रविदास की विरासत और शिक्षाएं उनकी संस्‍कृति का हिस्‍सा हैं. दलित समुदाय के अधिकांश लोग रविदासजी की शिक्षाओं के अनुयायी हैं. 30 करोड़ से ज्‍यादा लोगों की श्रद्धा संत रविदास से जुड़ी है.
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‘Demolish Sabarimala and Tirupati Temples Too’: At Ravidas Mandir Protest, Dalits Bristle at Double Standards

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First published: August 22, 2019, 4:05 PM IST
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