NMC BILL: स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक में नहीं बनी बात, जारी रहेगी डाॅक्टरों की हड़ताल

NMC बिल को लेकर डाक्टरों का विरोध जारी है. डाक्टरों के साथ स्वास्थ्य मंत्री डाॅ हर्षवर्धन की हड़ताल बेनतीजा रही. जहां डाॅक्टरों का कहना है कि इससे नीम हकीम बढ़ेंगे, वहीं केंद्र का कहना है कि इससे डाक्टरों की कमी दूर होगी.

रवि सिंह | News18India
Updated: August 2, 2019, 8:12 PM IST
NMC BILL: स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक में नहीं बनी बात, जारी रहेगी डाॅक्टरों की हड़ताल
बिल पर सरकार और डाक्टरों में बना हुआ है गतिरोध
रवि सिंह
रवि सिंह | News18India
Updated: August 2, 2019, 8:12 PM IST
NMC बिल पर हड़ताली डाॅक्टरों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाॅ हर्षवर्धन के बीच बातचीत आज बेनतीजा रही. नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (NMC) का लंबे वक्त से विरोध हो रहा था. लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार ने इस बिल को संसद में कुछ संशोधनों के साथ पास करवा लिया. हालांकि संशोधन के बाद बिल फिर से लोकसभा में जायेगा लेकिन बिल को लेकर रास्ता अब साफ हो चुका है. बिल के पक्ष में सरकार की दलीलों के बावजूद डाॅक्टरों का विरोध अब भी जारी है और सरकार न झुकने को तैयार है और न ही डाॅक्टरों की मांग मानने के मूड में है.

स्वास्थ्य मंत्री से मिले हड़ताली डाॅक्टर
रेजिडेंट डाॅक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन से मिला. डाॅक्टरों ने अपनी शिकायतें मंत्री के सामने रखी लेकिन हर्षवर्धन ने इस बिल को ऐतिहासिक बताकर डाॅक्टरों से हड़ताल वापस लेने की अपील कर डाली. स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने न्यूज 18 इंडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने बैठक में डाॅक्टरों को समझाया कि विकसित देशों में एनएमसी बिल जैसा ही प्रावधान है. ये बिल डाॅक्टर और मरीज दोनों के हित में है और ये चिकित्सा के क्षेत्र में वरदान साबित होगा. हर्षवर्धन के मुताबिक उन्होंने हड़ताल वापस लेने की अपील की है क्योंकि इसका कोई औचित्य नहीं है.

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सरकार की दलील है कि इस बिल के माध्यम से देशभर में डॉक्टरों की जो कमी है, उसे पूरा किया जा सकेगा


क्यों है डाॅक्टरों को इस बिल से ऐतराज

  • नेशनल मेडिकल बिल में प्रावधान है कि आयुर्वेद-होम्योपैथी डाॅक्टर ब्रिज कोर्स करने के बाद एलोपैथिक इलाज कर सकेंगे. डाॅक्टरों को ऐतराज इस बात का है कि इससे नीम हकीम और झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार हो जायेगी.

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  • बिल में ये भी है कि पढ़ाई के बाद प्रैक्टिस शुरू करने के लिए डॉक्टरों को एक टेस्ट पास करना होगा जबकि डाॅक्टरों का विरोध है कि एक बार टेस्ट में फेल होने के बाद दोबारा टेस्ट देने का विकल्प नहीं है.

  • निजी मेडिकल कॉलेजों को पचास फीसदी सीटों की फीस तय करने करने का अधिकार होगा जबकि डॉक्टरों का कहना है कि इससे निजी मेडिकल कॉलेजों में करप्शन को बढ़ावा मिलेगा.


बिल पर सरकार की दलील
सरकार की दलील है कि कि देशभर में डॉक्टरों की कमी है इस बिल के माध्यम से इस कमी को पूरा किया जा सकेगा. सरकार की दलील है कि ये विदेशों में होता रहा है. साथ ही WHO की गाइडलाइन्स में भी कमेटी हेल्थ प्रोवाइडर को बाकायदा तरजीह दी गयी है. नेशनल मेडिकल कमीशन में निर्वाचित सदस्यों को की संख्या संशोधन के जरिए बढ़ाकर 33 कर दिया गया है जबकि पहले ये संख्या 25 थी.

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First published: August 2, 2019, 6:10 PM IST
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