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केजरीवाल की 5 साल की मेहनत पर मोदी सरकार का ये मास्टर स्ट्रोक पड़ेगा भारी!

विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 8:55 PM IST
केजरीवाल की 5 साल की मेहनत पर मोदी सरकार का ये मास्टर स्ट्रोक पड़ेगा भारी!
अवैध कॉलोनियों पर मोदी कैबिनेट के फैसले के बाद दिल्ली में सर्दी शुरू होने से पहले ही राजनीति गर्मा गई है.

दिल्ली (Delhi) की राजनीति (Politics) में कच्ची या अनाधिकृत कॉलोनियों (Unauthorized colonies) का मुद्दा दशकों से हावी रहा है. मोदी सरकार (Modi Government) ने एक जनवरी 2015 तक बसी कॉलोनियों को नियमित करने की बात कही है.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 8:55 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली में यूं तो विधानसभा चुनावों की घोषणा नहीं हुई है, अनुमान है कि अगले साल फरवरी में चुनाव होंगे. लेकिन, दिल्ली की सर्दी शुरू होने से पहले ही दिल्ली की राजनीति गर्मा गई है. दिल्ली सरकार पिछले काफी दिनों से राजधानी में फ्री बिजली-पानी को बड़ा मुद्दा बना रही थी. उसकी काट करते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को एक बड़ा ऐलान कर दिया. केंद्र सरकार ने दिल्ली की 1797 अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का ऐलान किया. यानी इन कॉलोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक देने की घोषणा की, जिससे 40 से 50 लाख लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा.

दिल्ली की राजनीति इस फैसले के बाद होगी गर्म
कुछ दिनों पहले ही दिल्ली सरकार ने भी ऐलान किया था कि जल्द ही इन कॉलोनियों में रजिस्ट्री खुलेगी. दिल्ली और केंद्र सरकार दोनों के ही रुख को देखते हुए साफ है कि आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में ये सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकता है. ऐसे में अब इसके लिए श्रेय लेने की लड़ाई भी दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच शुरू होगी.

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कुछ दिनों पहले ही दिल्ली सरकार ने भी ऐलान किया था कि जल्द ही इन कॉलोनियों में रजिस्ट्री खुलेगी. (फोटो-AAP)


दिल्ली की राजनीति में कच्ची या अनाधिकृत कॉलोनियों का मुद्दा दशकों से हावी रहा है. सरकार ने एक जनवरी 2015 तक बसी कॉलोनियों को नियमित करने की बात कही है. इन 1797 कॉलोनियों में से ज्यादातर सरकारी जमीन पर बसी हैं, करीब तीन सौ कॉलोनियां निजी जमीनों पर बसी हुई हैं.

बीते कई सालों से इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग मालिकाना हक नहीं होने के अभाव में डर से जी रहे हैं. मालिकाना हक मिलने के बाद ये अपने घरों और इलाकों के विकास के बारे में सोच सकेंगे. सबसे बड़ी बात यहां के लाखों निवासियों को हमेशा के लिए उस भय से मुक्ति मिल जाएगी कि उन्हें कभी भी कच्ची या अनाधिकृत कॉलोनी से बेदखल किया जा सकता है. एक बार नियमित होने यानी यहां रह रहे लाखों लोगों को मालिकाना हक मिलने के बाद सरकार को यहां विकास कार्यों को रफ्तार देने में मदद मिलेगी. इन कॉलोनियों में पानी की लाइनें, बिजली व्यवस्था बेहतर करने समेत तमाम ऐसी सुविधाएं हैं, जो आम पक्की कॉलोनियों में सरकार की जिम्मेदारी होती हैं, लेकिन कच्ची या अनाधिकृत कॉलोनी होने के कारण ये अब तक उससे महरूम रहती थीं.

इस फैसले से बीजेपी को फायदा हो सकता है
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जाहिर है कि अगर चुनाव से पहले हुए इस फैसले का असर दिल्ली के चुनाव में साफ तौर पर देखा जाएगा. 2008 में दिल्ली की तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार ने भी इन कॉलोनियों को नियमित करने का बड़ा दांव खेला था. उस समय तत्कालीन सरकार ने इन कॉलोनियों को नियमित करने के लिए प्रोविजनल सर्टिफिकेट भी जारी कर दिए थे. लेकिन उन पर लगने वाले डैमेज चार्ज, लैंड फीस को लेकर मामला फंस गया था. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले कार्यकाल की 7 मार्च को हुई आखिरी कैबिनेट बैठक में एक कमेटी बनाई गई थी, जिसे तीन महीने के भीतर इस संबंध में सभी संभावनाएं तलाशने को कहा गया था.

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इस फैसले का असर दिल्ली के चुनाव में साफ तौर पर देखा जाएगा.


कमेटी को ये कहा गया था कि वो ये बताए कि आखिर इन कॉलोनियों को किस तरह से नियमित किया जा सकता है. ये कमेटी दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में गठित हुई थी. जिसके बाद ही बात आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शहरी विकास मंत्रालय को दे दी, जिसके बाद कैबिनेट नोट तैयार हो रहा है. बीजेपी का दावा है कि इन कच्ची कॉलोनियों को नियमित करवाना उसका मुद्दा रहा है और केंद्र सरकार के कारण ही अब इन कॉलोनियों में रहने वालों के सपने पूरे होने वाले हैं. यानी साफ है कि अब आने वाले समय में जंग होगी, इस मामले में श्रेय लेने की और जो पार्टी श्रेय लेने यानी जनता के बीच ये विश्वास जताने में कामयाब हो गई कि इस फैसले के पीछे उऩका योगदान है उसे इसका बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है.

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First published: October 23, 2019, 7:30 PM IST
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