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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: 'आप' को बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस से है खतरा!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 1:46 PM IST
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: 'आप' को बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस से है खतरा!
आंकड़ों के मुताबिक 2015 में बीजेपी के 69 में से 2 प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची थी. बीएसपी के 70 में से 69 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. कांग्रेस के 62 प्रत्याशी जमानत बचाने में नाकाम रहे थे. (फाइल फोटो)

Delhi Assembly Election-2020: पिछले तीन चुनावों में 30 फीसदी से कम नहीं हुआ बीजेपी (BJP) का वोटबैंक, लेकिन कांग्रेस (Congress) का 40 से गिरकर 10% पर आया. कांग्रेस का वोटर आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के साथ खड़ा हो गया था. इसलिए कांग्रेस जितना बढ़ेगी 'आप' उतना ही कमजोर होगी.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 1:46 PM IST
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नई दिल्ली. विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी  (BJP) के बीच जोरदार सियासी जंग जारी है. हवा, पानी को लेकर दोनों एक दूसरे पर पोस्टरबाजी कर रहे हैं. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 'आप' को बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस से खतरा है. इसका कारण है 2015 के चुनाव में 'आप' ने जो वोट हासिल किए थे वो बीजेपी के नहीं बल्कि कांग्रेस के हुआ करते थे. कांग्रेस (Congress) के वोटरों ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) एंड टीम पर भरोसा जताया था. इस बार कांग्रेस पहले जितनी कमजोर नहीं है. उसने अपनी टीम में सुभाष चोपड़ा (पंजाबी) और कीर्ति आजाद (बिहारी-ब्राह्मण) को जगह देकर जातीय समीकरण से आम आदमी पार्टी को उलझाने की कोशिश शुरू कर दी है.

बीजेपी का वोट बरकरार
बीजेपी ने 2013 के चुनाव में 31 सीटें जीतकर 33.07% वोट लिए थे. 2008 में उसकी 23 सीटें थीं, जबकि वोट 36.34% था. 2015 में उसकी सीटें घटकर सिर्फ 3 रह गईं लेकिन वोट परसेंट 30 से कम नहीं हुआ. पार्टी को इस स्थिति में भी 32.19 फीसदी वोट मिले. आम आदमी पार्टी की आंधी चली थी. 70 में से 67 सीटें अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली 'आप' ने जीती थी. इसके बावजूद बीजेपी के सिर्फ 2 प्रत्याशियों की ही जमानत जब्त हुई थी.

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बीजेपी का वोटबैंक आम आदमी पार्टी की लहर में भी कम नहीं हुआ


दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं कि तीन साल के ये आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी का कोर वोटर किसी भी सूरत में उसके साथ खड़ा है. 2015 में केजरीवाल एंड टीम को जो वोट मिला वो बीजेपी से नहीं बल्कि कांग्रेस से शिफ्ट हुआ था. कांग्रेस को तब सिर्फ 9.65 फीसदी वोट मिले थे और उसके 62 प्रत्याशी जमानत बचाने में नाकाम रहे थे. क्योंकि अन्ना के नेतृत्व में जो आंदोलन हुआ था उसमें निशाने पर कांग्रेस थी.

कांग्रेस के वोट में गिरावट
कुमार कहते हैं कि 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 8 सीटें जीती थीं. उसका वोट 24.55 परसेंट था. जबकि 2008 में 43 सीटों के साथ उसके पास 40.31 फीसदी वोटों का समर्थन था. ऐसे में कहा जा सकता है कि आम आदमी पार्टी को उन्हीं लोगों का वोट मिला जो पहले कांग्रेस को वोट देते थे. 2013 और 2015 में आम आदमी पार्टी एक बड़े आंदोलन का प्रोडक्ट थी. उस वक्त कांग्रेस के खिलाफ गुस्से का उसे फायदा मिला. जबकि अब यह पार्टी एक राजनीतिक प्रोडक्ट बन गई है. वो आंदोलन वाली पार्टी का नहीं बल्कि पारंपरिक पार्टियों जैसी राजनीति कर रही है. ऐसे में उसे जनता पहले जैसी तवज्जो देगी, इसमें संशय है.
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कांग्रेस का वोटबैंक लगातार कम हुआ है


कुमार के मुताबिक कांग्रेस की स्थिति पड़ोसी राज्य हरियाणा में अच्छी हुई है. इससे उसके हौसले बुलंद हैं. वो यहां 2015 से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है. उसका बढ़ना आम आदमी पार्टी के लिए खतरा है. बीजेपी भी अंदरखाने यही चाहती है कि कांग्रेस बढ़े जिससे 'आप' कमजोर हो और उसे फायदा मिले. लेकिन कांग्रेस इतना नहीं बढ़ेगी कि आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने का खतरा पैदा हो जाए. क्योंकि केजरीवाल ने लोअर मिडिल क्लास को खुश कर रखा है. बिजली, पानी फ्री मिल रहा है. महिलाओं को बस में किराया फ्री है. अभी तक के हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बीजेपी का कोर वोटबैंक बरकरार रहेगा.

कितने प्रत्याशियों की जब्त हुई थी जमानत
चुनाव आयोग (Election commission) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में बीजेपी के 69 में से 2 प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची थी. बीएसपी के 70 में से 69 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. कांग्रेस के 62 प्रत्याशी जमानत बचाने में नाकाम रहे थे. एनसीपी, सीपीएम, सीपीआई और जेडीयू के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी. जब कोई प्रत्याशी किसी भी चुनाव क्षेत्र में पड़े कुल वैध वोट का छठा हिस्सा भी हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी जमानत राशि जब्त मानी जाती है.

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2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी को 54.34 फीसदी वोट मिले


71 पार्टियां थीं मैदान में
दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनाव में 71 पार्टियां मैदान में थीं. 195 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन कोई भी जमानत सुरक्षित नहीं रख पाया. क्योंकि सारा वोट तो आम आदमी पार्टी को मिला था. पार्टी को रिकॉर्ड 54.34 फीसदी वोट मिले थे.

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First published: November 21, 2019, 1:34 PM IST
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