आप के बागी विधायक अनिल बाजपेई और देवेंद्र सहरावत अयोग्य घोषित, BJP में हुए थे शामिल

इन दोनों नेताओं ने इस साल की शुरुआत में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली थी.

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Updated: August 8, 2019, 4:57 PM IST
आप के बागी विधायक अनिल बाजपेई और देवेंद्र सहरावत अयोग्य घोषित, BJP में हुए थे शामिल
अनिल बाजपेई और देवेंद्र सहरावत
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Updated: August 8, 2019, 4:57 PM IST
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने विधायक अनिल बाजपेई और देवेंद्र सहरावत को अयोग्य घोषित कर दिया है. इन दोनों नेताओं ने इस साल की शुरुआत में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली थी. गौरतलब है कि बीते 28 जून को आप के बागी विधायक देवेंद्र सहरावत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. दिल्ली विधानसभा सचिवालय की तरफ से उन्हें अयोग्य ठहराए जाने संबंधी मामले में दखल देने से मना कर दिया था.

बता दें कि दल-बदल कानून के तहत दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष ने उन्हें आप छोड़कर बीजेपी में जाने पर अयोग्य ठहराए जाने संबंधी नोटिस जारी किया था. सहरावत ने सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच में याचिका दायर कर मामले पर फौरन सुनवाई की मांग की थी.

विधानसभा अध्यक्ष ने दिया था नोटिस
सहरावत और अनिल बाजपेई को नोटिस जारी कर विधानसभा अध्यक्ष ने पूछा था कि आप बीजेपी में शामिल हो गए हैं ऐसे में क्यों न आपकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी जाए? लोकसभा चुनाव के दौरान आप के बागी विधायकों के बीजेपी में शामिल होने को लेकर सौरभ भारद्वाज ने विधानसभा अध्यक्ष से लिखित में शिकायत की थी. शिकायत में दोनों बागी विधायकों के बीजेपी के साथ कार्यक्रमों और मंच साझा करने संबंधी पूरा ब्योरा था.



मई में बीजेपी में शामिल हुए थे सहरावत
आम आदमी पार्टी से बगावत करने वाले विधायक देवेंद्र कुमार सहरावत 6 मई को बीजेपी में शामिल हो गए थे. सहरावत ने केंद्रीय मंत्री विजय गोयल की उपस्थिति में बीजेपी का दामन थामा था. जबकि अनिल बाजपेई ने उनसे पहले ही बीजेपी ज्वाइन कर ली थी.
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दोनों विधायकों ने रखा था पक्ष
अनिल बाजपेई और देवेंद्र सहरावत इस मामले में विधानसभा कमेटी के सामने भी पेश हुए थे. दोनों ने कमेटी के सामने अपने पक्ष रखा था. दोनों विधायकों पर आरोप है कि उन्होंने चुपचाप बीजेपी की सदस्यता ले ली. यह आरोप लगने के बाद दोनों विधायकों को स्पीकर ने नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न विधानसभा से उनकी सदस्यता को रद्द कर दिया जाए. इसके बाद दोनों ही विधायकों ने अपने वकीलों के साथ कमेटी के सामने अपना पक्ष रखा.

स्पीकर की भूमिका पर उठाए थे सवाल
बाजपेई और सहरावत के वकीलों ने कमेटी के समक्ष बहस के दौरान स्पीकर रामनिवास गोयल की भूमिका पर ही सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि मामले को तटस्‍थ तरीके से नहीं देखा गया है. दो घंटे तक चली बहस के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया गया है. अब सुनवाई 9 जुलाई को होना तय किया गया है.
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First published: August 8, 2019, 4:30 PM IST
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