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बुराड़ी केस: लाशों पर नहीं मिले संघर्ष के निशान, PM रिपोर्ट में ये है मौत की वजह

बुराड़ी केस: लाशों पर नहीं मिले संघर्ष के निशान, PM रिपोर्ट में ये है मौत की वजह

बुराड़ी के संतनगर में रविवार सुबह एक परिवार के 11 सदस्यों की संदिग्ध हालात में लाशें मिली

बुराड़ी के संतनगर में रविवार सुबह एक परिवार के 11 सदस्यों की संदिग्ध हालात में लाशें मिली

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दो बच्चों और बुजुर्ग महिला नारायण देवी समेत 8 लोगों का पोस्टमार्टम किया गया है. अब तक पुलिस को गला घोंटे जाने या हाथापाई के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

    उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में रविवार को एक घर में 11 लोगों के शव मिलने की घटना में पुलिस की जांच जारी है. पुलिस के मुताबिक, 11 लोगों में से 8 के पोस्टमार्टम में संघर्ष के कोई संकेत नहीं मिले हैं. पुलिस का कहना है कि सभी लोगों की मौत फांसी पर लटक कर दम घुटने से हुई है.

    बता दें कि बुराड़ी के संतनगर में रविवार सुबह एक परिवार के 11 सदस्यों की संदिग्ध हालात में लाशें मिली. इनमें से 10 के शव फंदे पर लटके थे. उनके मुंह और आंखों पर टेप चिपका था. कानों में रुई ठूंसी हुई थी. 75 साल की महिला का शव दूसरे कमरे में जमीन पर पड़ा था. पुलिस ने मौके से दो रजिस्टर, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटके की चीजें और माता की चुनरियां बरामद की हैं. जिनसे यह अंदाज लगाया जा रहा है कि परिवार के लोगों ने मोक्ष की चाहत में सामूहिक आत्महत्या की. मरने वालों में सात महिलाएं और दो बच्चे भी थे.

    हालांकि, परिवार के मुखिया भूपी की बहन सुजाता का दावा है कि परिवार बाबाओं पर विश्वास नहीं करता था. पुलिस की कहानी झूठी है और ये आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या का मामला है.

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    क्या कहती है पोस्टमार्टम रिपोर्ट?
    >>एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दो बच्चों और बुजुर्ग महिला नारायण देवी समेत 8 लोगों का पोस्टमार्टम किया गया है. अब तक पुलिस को गला घोंटे जाने या हाथापाई के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

    >>पुलिस ने बताया कि दस लोग लोहे के जाल में फांसी से लटके थे, जबकि 77 वर्षीय महिला घर के एक अन्य कमरे में मृत मिली थीं. पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि नारायण देवी की मौत गला घोंटे जाने से हुई है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है उनकी मौत भी फांसी लगने के कारण ही हुई है, क्योंकि रस्सी उनके शव के पास लटकी हुई पाई गई.

    >>पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब यह जांच का विषय है कि उनके गले से रस्सी को निकाला किसने होगा. उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआती जांच में ऐसा लगता है कि उन सभी की मौत फांसी पर लटकने की वजह से ही हुई है. अंतिम रिपोर्ट अभी आई नहीं है.’’

    >>मृतकों की पहचान नारायण देवी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57) और दो बेटे भावनेश (50) और ललित भाटिया (45) के रूप में हुई है. भावनेश की पत्नी सविता (48) और उनके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25) और ध्रुव (15), ललित भाटिया की पत्नी टीना (42) और उनका 15 साल का बेटा शिवम, प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33) भी मृत पाए गए.

    >>बताया जा रहा है कि मृतक परिवार ने रात में खाने के लिए 20 रोटियां मंगवाई थी. वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर लोगों के पेट खाली थे.

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    रजिस्टर में लिखा था- कोई मरेगा नहीं, भगवान से मिलेगा
    पुलिस ने घटनास्थल से दो रजिस्टर बरामद की हैं. इनमें कुछ नोट्स लिखे हैं. पुलिस को संदेह है कि यह मामला सोच-समझकर की गई आत्महत्या का है. जिसे धार्मिक अनुष्ठान के तहत अंजाम दिया गया. पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कुछ नोट्स पर लिखा है कि ‘‘ कोई मरेगा नहीं ’’ बल्कि कुछ ‘‘ महान ’’ हासिल कर लेगा. पुलिस को मिले नोटबुक में लिखा है:
    1- पट्टियां अच्छे से बांधनी हैं. शून्य के अलावा कुछ भी न दिखे.
    2- गुरुवार या रविवार का दिन चुनें.
    3- रस्सी के साथ सूती चुन्नियों या साड़ी का प्रयोग करना है.
    4-सात दिन बाद लगातार पूजा करनी है, थोड़ी लगन और साधना से. अगर कोई आ जाए तो उसके अगले दिन फिर शुरू करेंगे.
    5-बेबे खड़ी नहीं हो सकतीं तो अलग कमरे में लेट सकती हैं.
    6- सबकी सोच एक जैसी होनी चाहिए, ये करते ही तुम्हारे आगे के काम दृढ़ता से शुरू होंगे.
    7-मद्धम रोशनी को प्रयोग करना है.
    8-हाथों की पट्टियां बच जाएं तो उसे आंखो पर डबल कर लेना.
    9- मुंह की पट्टी भी रूमाल से डबल कर लेना.
    10- रात्रि के 12-1 बजे के बीच क्रिया करना है. उसके पहले हवन करना है. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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