‘केजरीवाल भ्रष्ट अधिकारियों पर तो नकेल कसेंगे, लेकिन भ्रष्ट मंत्रियों का क्या करेंगे?’

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल को भ्रष्ट अधिकारियों की याद क्यों आ रही है? सत्ता में रहते इतने सालों तक अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट अधिकारी क्यों नहीं याद आए?

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 3:52 PM IST
‘केजरीवाल भ्रष्ट अधिकारियों पर तो नकेल कसेंगे, लेकिन भ्रष्ट मंत्रियों का क्या करेंगे?’
दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल को भ्रष्ट अधिकारियों की याद क्यों आ रही है?
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 3:52 PM IST
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी अब भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है. भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए अरविंद केजरीवाल ने अपने कैबिनेट मंत्रियों और दिल्ली के कैबिनेट सचिव को निर्देश जारी किए हैं. अरविंद केजरीवाल ने बीते शनिवार को ही इस मामले को लेकर दिल्ली के एलजी अनिल बैजल और मुख्य सचिव विजय देव से मुलाकात की थी. अरविंद केजरीवाल के इस मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि अब भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट बननी शुरू हो जाएगी. लेकिन, विपक्षी सवाल कर रहे हैं कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल को भ्रष्ट अधिकारियों की याद क्यों आ रही है? अरविंद केजरीवाल के पूर्व सहयोगी कपिल मिश्रा ने इसे नया राजनीतिक ड्रामा बताया है.

साढ़े चार साल बाद भ्रष्टाचार का मुद्दा क्यों याद आया

जानकार मानते हैं कि साढ़े चार साल पहले आम आदमी पार्टी जिन मुद्दों के सहारे दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई थी भ्रष्टाचार भी उसमें एक अहम मुद्दा था. लेकिन, पिछले साढ़े चार सालों में अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को छुआ तक नहीं. अब अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट अधिकारी इसलिए याद आ रहे हैं क्योंकि दिल्ली में चुनाव होने हैं. साथ ही देश की मोदी सरकार ने भी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की है तो अरविंद केजरीवाल को लगता है कि वह भी इस मुद्दे को हवा बना कर एक विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक दांव खेल सकते हैं.

विपक्षियों का मानना है कि दिल्ली की सत्ता में रहते इतने सालों तक अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट अधिकारी क्यों नहीं याद आए? दिल्ली में जिन भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट तैयार की जा रही है उस लिस्ट को तैयार आखिर कौन करेगा? अधिकारियों को रिटायरमेंट देने के लिए क्या आधार तैयार किए जाएंगे? मामला अगर कोर्ट पहुंचता है तो दिल्ली सरकार क्या दलील पेश करेगी? दिल्ली में इसके बहाने कहीं अधिकारियों और आप सरकार में टकराव तो नहीं शुरू होंगे? ये कुछ सवाल हैं, जिसको जानना जरूरी है.

भ्रष्ट अधिकारियों को रिटायरमेंट को लेकर केजरीवाल एलजी अनिल बैजल से मिल चुके हैं


अरविंद केजरीवाल के पूर्व सहयोगी और दिल्ली पूर्व कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा न्यूज-18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'देखिए ये अच्छी बात है कि केजरीवाल जी भ्रष्ट अधिकारियों को चिन्हित कर रिटायरमेंट देंगे, लेकिन क्या भ्रष्ट मंत्री बनाएंगे भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट? दिल्ली के मंत्रियों पर यह नियम क्यों नहीं लागू होगा? अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता के आंखों में धूल झोंक रहे हैं. साढ़े चार साल बाद उनको एक बार फिर से दिल्ली में भ्रष्टाचार का मुद्दा याद आ रहा है. इतने सालों तक वह सोये क्यों थे? देखिए अरविंद केजरीवाल पीएम मोदी का नकल कर रहे हैं.'

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल के इऱादों पर सवाल उठाया है

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बता दें कि कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को रिटायरमेंट दे दिया था. मोदी सरकार के इस फैसले के बाद से ही कुछ राज्य सरकारों ने भी भ्रष्ट अधिकारियों पर डंडा चलाने की एक नई परंपरा की शुरुआत की है. पिछले महीने ही केंद्र सरकार ने वित्त मंत्रालय के 20 भ्रष्ट अधिकारियों की सेवा समाप्त कर दी थी. कुछ दिन पहले ही यूपी की योगी सरकार ने भी अपने 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों की सेवा समाप्त कर रिटायरमेंट दे दिया था.

सत्ता में आने के साथ जीरी टॉलरेंस की नीति की बात की थी

हालांकि, अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता में आने के बाद से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात करते रहे हैं. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी दिए थे, लेकिन बाद में वह इस मुद्दे को उसी हाल पर छोड़ दिया. अरविंद केजरीवाल ने 2013-14 में अपने पहले 49 दिनों के कार्यकाल में भी भ्रष्‍ट अधिकारियों पर नकेल कसी थी.

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 200 से अधिक अधिकारियों को रिटायरमेंट दे दिया है


वहीं अपने दूसरे कार्यकाल में भी केजरीवाल ऐसे कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति काफी सख्‍त रहे हैं. केजरीवाल का कहना है कि ऐसे अधिकारियों की वजह से लोककल्‍याणकारी नीतियां प्रभावित होती हैं. हालांकि, ऐंटी-करप्शन ब्यूरो जैसी एजेंसियों की कमी के कारण दिल्ली सरकार ने ऐसे मामलों को एलजी के सामने उठाया, क्योंकि केजरीवाल सरकार सीधे अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं कर सकती है.

क्योंकि, दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल नजीब जंग ने भी दागी और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इसलिए अब अरविंद केजरीवाल भी इस मुद्दे को उठा कर राजनीतिक दांव खेल दिया है. केजरीवाल ने भी एलजी के साथ हुई बैठक में साफ कर दिया कि वे भी दिल्‍ली में ऐसे बाबुओं और अधिकारियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाएंगे. ऐसे अधिकारियों को सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) के फंडामेंटल रूल 56 (जे) के तहत जबरन रिटायरमेंट दिया जाएगा.

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First published: July 8, 2019, 2:53 PM IST
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