अगर परिवार का कोई व्यक्ति डिप्रेशन में दीख रहा हो तो क्या करें

लगातार डिप्रेशन में रहने के नतीजे होते हैं खतरनाक, आत्महत्या करने तक के फैसले कर लेते हैं मरीज, कैसे परिवार के लोग कर सकते हैं उनकी मदद

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 3:44 PM IST
अगर परिवार का कोई व्यक्ति डिप्रेशन में दीख रहा हो तो क्या करें
डिप्रेशन की अनदेखी खतरनाक होती है
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Updated: July 31, 2019, 3:44 PM IST
आज के दौर में हताशा और मानसिक परेशानी के अनगिनत कारण है. किसी ने व्यवसाय के लिए कर्ज ले रखा है तो कोई क्रेडिट कार्ड के कर्ज जाल में फंस गया है. किसी को नौकरी की परेशानी है तो कोई नौकरी न मिलने से परेशान है. यहां तक कि जमाने में आगे निकलने की होड़ में बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं. और भी बहुत सारे कारण हैं, जिनकों लेकर आदमी मानसिक परेशानियों के दौर से चलते चलते  डिप्रेशन में पहुंच जाता है. इन सारी परेशानियों की भूलभुलैया की राहें किसी न किसी खतरनाक मोड़ पर ले जा रही हैं.

कई बार तो इसका नतीजा बहुत ही खराब होता है और परेशानी, उलझन, डिप्रेशन में फंस कर व्यक्ति आखिरकार अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं. जब तक परिवार के लोगों को समझ में आए कि उसके कोई अपना इस भयानक भंवर में फंस चुका है तब तक कई बार देर हो जाती है.

परेशानी को समझें

इसके लिए जरूरी है कि लोग अपने परिजनों की परेशानी को समझें. उसकी दिक्कतों में भले ही दखल न दें. लेकिन उसे भावनात्मक सपोर्ट दें. ज्यादातर लोग ऐसा करते भी हैं. फिर भी नतीजे सही नहीं दिखते हैं. ऐसे में जानकारों का कहना है कि अगर कोई भी व्यक्ति दो सप्ताह से या उससे ज्यादा वक्त से डिप्रेशन में दीख रहा हो तो उसे विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है.

कुछ लक्षणों के दिखते ही सावधान हो जाना चाहिए, Beware of some symptoms of depression
कुछ लक्षणों के दिखते ही सावधान हो जाना चाहिए


विशेषज्ञ को दिखाएं

जाने माने मनोचिकित्सक अचल भगत का कहना है –“कोई भी व्यक्ति दो सप्ताह से डिप्रेशन में है तो उसे विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. विशेषज्ञ ही तय करेगा कि उसे इलाज की जरूरत है या नहीं है. ” साथ ही डॉक्टर भगत ये भी जोड़ते हैं कि जरूरी नहीं है कि कोई विशेषज्ञ के पास चला गया तो उसे दवाएं ही खानी होगी. या फिर उसे बार बार सलाह के लिए डॉक्टर के यहां आना होगा. विशेषज्ञ उसकी दशा देख कर उसके इलाज की प्रक्रिया तय कर देंगे.
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कब स्थिति खतरनाक है?

इस स्थिति को कब खतरनाक माना जाय, इस सवाल पर डॉक्टर भगत का कहना है कि दो सप्ताह तक कोई अलग थलग रहता है, किसी चीज में रुचि नहीं लेता है तो उसे विशेषज्ञ से दिखा कर उसकी मदद की जा सकती है. आम तौर पर इससे अधिक वक्त तक लोग डिप्रेशन की अनदेखी करते हैं जो ठीक नहीं है.

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First published: July 31, 2019, 3:28 PM IST
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