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कबूतर फैला रहे हैं ये खतरनाक बीमारी, 200 से ज्यादा लोग हुए शिकार

News18India
Updated: December 4, 2019, 6:46 PM IST
कबूतर फैला रहे हैं ये खतरनाक बीमारी, 200 से ज्यादा लोग हुए शिकार
कबूतर उड़ते हैं तो उनकी बीट जो सूख कर पाउडर का रूप ले लेती है, वो हवा से साथ मनुष्य के फेफड़ों में पहुंच जाती है, इससे लंग्स की बीमारी हो सकती है (Demo Pic)

अगर आपके घर के आसपास कबूतर (Pigeon) रहते हैं तो आपको सावधान होने की जरूरत है क्योंकि कबूतर की बीट (Droppings) और पंख (Feathers) से जानलेवा बीमारी फैल रही है.

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  • Last Updated: December 4, 2019, 6:46 PM IST
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नई दिल्ली. पक्षियों में कबूतर को शांति का प्रतीक माना जाता है, शहर के किसी न किसी कोने में कबूतरों को दाना डालते हुए लोग देखे जा सकते हैं. लेकिन इन्हीं कबूतरों के करीब रहने पर आपको कई जानलेवा बीमारियां (Diseases Caused by Pigeon) हो सकती हैं. दिल्ली एनसीआर (Delhi-NCR) में अनगिनत परिवार हैं, जो कबूतरों से पैदा होने वाली खतरनाक बीमारियों से बेपरवाह हैं, कबूतरों (Pigeon) की आवाजाही से लोग परेशान हैं, लेकिन ये नहीं जानते कि ये सिर्फ तंग करने वाला पंछी नहीं बल्कि ऐसा पंछी है जिसकी बीट और पंख आपको बीमार, बहुत बीमार बना सकते हैं.

कबूतरों पर हुए शोध में बड़े खतरे सामने आए हैं. डॉक्टरों का भी कहना है कि कबूतर की बीट में ऐसे इंफेक्शन होते हैं जो आपके फेफड़ों को खासा नुकसान पहुंचाते हैं और आपको जल्दी इनका पता भी नहीं चलता है. आपके घर में लगे एसी के आसपास कबूतरों ने घोंसला बनाया है तो ये खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

दरअसल जहां पर भी ज़्यादा कबूतर होते हैं, वहां पर एक अजीब सी दुर्गन्ध होती है. ये कबूतर उन्हीं जगहों पर बैठना पसंद करते हैं, जहां पर इन्होंने बीट की हो. जब ये बीट सूख जाती है तो पाउडर का रूप ले लेती है, और जब ये पंख फड़फड़ाते हैं तो बीट का पाउडर सांसों के ज़रिए हमारे भीतर पहुंच जाता है. इसी से फेफड़े की भयंकर बीमारी होती है. कबूतरों पर शोध में खुलासा हुआ है कि इनकी बीट की वजह से कई बीमारियां पैदा हो सकती हैं.

रिसर्च में हुआ खुलासा

प्रोफेसर वी वासुदेव राव की रिसर्च के मुताबिक, एक कबूतर एक साल में 11.5 किलो बीट करता है. बीट सूखने के बाद उसमें परजीवी पनपने लगते हैं. बीट में पैदा होने वाले परजीवी हवा में घुलकर संक्रमण फैलाते हैं. इस संक्रमण की वजह से कई तरह की बीमारियां होती हैं. कबूतर और उनकी बीट के आसपास रहने पर इंसानों में सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में इन्फ़ेक्शन, शरीर में एलर्जी हो सकती है.

दिल्ली में रहने वाले पीड़ित सुंदर स्वरूप सिंघल ने बताया कि कबूतरों ने उनकी पत्नी की जान ले ली. उनकी पत्नी की बीमारी की शुरुआत सिर्फ पेट दर्द से हुई. फिर उनकी पत्नी ऐसी बीमारी की गिरफ्तर में आ गई, जो कबूतरों की वजह से होती है. जिसका कोई इलाज नहीं है.


सर गंगाराम हॉस्पिटल की डॉक्टर रश्मि सामा ने बताया कि कबूतर से होने वाली काफी सारी बीमारी फेफड़ों से जुड़ी हो सकती हैं, जिसको हम हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस कहते हैं. जिसमें लंग्स का एलर्जिक रिएक्शन होता है. कबूतर की ड्रॉपिंग से फंगल डिज़ीज़ भी हो सकती हैं, जिसको दवाइयों के ज़रिए ट्रीट किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर वक्त रहते बीमारियां पकड़ में न आएं तो किसी मरीज़ के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं.
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हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस बेहद ख़तरनाक
डॉक्टर रश्मि ने बताया कि हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस बेहद ख़तरनाक होती है, यह वेरियस स्टेजेस में आता है, अगर एक्यूट हो तो सांस लेने में बहुत परेशानी हो सकती है, खांसी हो सकती है, ऑक्सीजन ड्रॉप हो सकती है, जोड़ों में दर्द हो सकता है.

कबूतरों से होने वाली ये बीमारियां कबूतरों की संख्या के साथ हर साल बढ़ती जा रही हैं. शायद इसीलिए कबूतरों से होने वाली हाइपर सेंसिटिविटी के मरीज़ों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है.
डॉक्टर दीपक तलवार कहते हैं, "ऑन द रिकॉर्ड अभी हमारे पास हाइपर सेंस्टिविटी के दो सौ मरीज़ हैं. ये 200 लोग, कबूतरों की बीट और उनके पंखों की वजह से बीमार हुए हैं."


शुरुआत में बीमारी के लक्षण हल्के होते हैं
तकनीकी तौर पर इन बीमारियों को हिस्टोप्लाज़मिस, क्रिप्टोकोकोसिस, सिटाकोसिस, साल्मोनेला और लिस्टिरिया के नाम से जाना जाता है. डॉक्टर दीपक तलवार के मुताबिक, इस बीमारी के लक्षण शुरुआत में बड़े हल्के होते हैं, खांसी का आना, सूखी खांसी का आना, और थोड़ा सांस का फूलना, धीरे धीरे बॉडी में वेट लूज़ होना, हल्का हल्का बुखार सा लगना, बॉडी में पेन, इस तरह के सिमटम होते हैं, कभी रहते हैं कभी नहीं रहते हैं, ज्यादातर खांसी और सांस का फूलना होता है. इसको चेक करने के लिए हम लोग ब्लड टेस्ट भी करते हैं. जिससे पता लगता है कि आपको कबूतर से होने वाली कोई बीमारी हुई है या नहीं.

2001 में ट्राफलगर स्क्वायर में कबूतरों को दाना डालने पर बैन लगा था
बता दें, 2001 में तो विश्व के कई देशों ने कबूतरों की गंदगी के खिलाफ जंग ही छेड़ दी थी. 2001 में लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में कबूतरों को दाना डालने पर बैन लगा दिया गया था. इतना ही नहीं वेनिस ने 2008 में सेंट मार्क स्क्वायर पर पक्षियों के लिए खाना बेचने वालों पर जुर्माने का प्रावधान कर दिया था. जबकि कुछ साल पहले कैटेलोनिया में कबूतरों को ओविस्टॉप नामक गर्भनिरोधक दवा खिलानी शुरू कर दी गई थी.

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First published: December 4, 2019, 5:50 PM IST
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